बच गई पृथ्वी! सूरज से निकला आग का महातूफान दिशा बदलकर मंगल से टकराया, लाल ग्रह को लेकर वैज्ञानिक खोज खत्म?
Science News: क्या वैज्ञानिकों का मंगल ग्रह पर इंसानों की आबादी बसाने का सपना हमेशा के लिए टूट गया है? ये सवाल इसलिए उठ खड़े हुए हैं, क्योंकि सूरज से निकला महाविनाशक सोलर तूफान मंगल ग्रह से जा टकराया है, और इसने मंगल ग्रह के लिए वैज्ञानिकों के कई मिशनों के लिए खतरा पैदा कर दिया है।
लेकिन, इससे भी खतरनाक बात ये थी, कि सूरज से निकला आग का तूफाना पहले पृथ्वी की तरफ बढ़ रहा था, लेकिन फिर तूफान ने अपनी दिशा मंगल ग्रह की तरफ बदल लिया। जिससे पृथ्वी की तरफ आने वाला महाखतरा टल गया है।

नासा (NASA) की रिपोर्ट के मुताबिक, मई महीने में सूरज से निकला अत्यधिक सौर तूफान मंगल ग्रह के सतह से टकराया है और इसने लाल ग्रह को ऑरोरा और रेडिएशन से घेर लिया है, लिहाजा इंसानों के लिए वहां जाने की बात तो छोड़िए, अब दूसरे मिशनों के भविष्य भी अधर में लटक गये हैं।
NASA ने बयान जारी करते हुए कहा है, कि पिछले एक साल में सूरज काफी ज्यादा सक्रियता दिखा रहा है, क्योंकि वो अपने 11 साल के साइकिल के करीब पहुंच गया है, जिसे सोलर मैक्सिमम कहा जाता है, जिसके इस साल के अंत में होने की भविष्यवाणी की गई है।
सूरज ने बिगाड़ा मंगल ग्रह का प्लान?
नासा के बयान में कहा गया है, कि हाल के महीनों सौर गतिविधियों में भारी इजाफा हुआ है, जैसे कि एक्स-क्लास फ्लेयर्स, सबसे शक्तिशाली सौर फ्लेयर्स, और कोरोनल मास इजेक्शन, या प्लाज्मा नामक आयनित गैस के बड़े बादल और चुंबकीय क्षेत्र जो सूर्य के बाहरी वायुमंडल से निकलते हैं, इन घटनाओं में काफी इजाफा हुआ है।
इससे पहले मई में पृथ्वी पर पहुंचे सौर तूफानों ने रंगीन अरोरा को जन्म दिया था, जो उत्तरी कैलिफोर्निया और अलबामा जैसे क्षेत्रों के आसमान में नाच रहे थे, जहां शायद ही कभी ऐसा देखा गया हो। CNN के मुताबिक, नासा ने कहा है, कि सूरज से निकले तूफानों की उत्पत्ति सूर्य के धब्बों के एक विशाल समूह से हुई है, जो संयोग से पृथ्वी की तरफ ही बढ़ रहा था। लेकिन, पृथ्वी की तरफ बढ़ रहा सूरज से निकला आग वाला तूफान अचानक से पृथ्वी से मंगल ग्रह की तरफ मुड़ गया।
खगोलविदों ने मंगल ग्रह पर सौर तूफान के प्रभावों को प्रत्यक्ष रूप से जानने के लिए लाल ग्रह के चारों ओर परिक्रमा करने वाले बहुत से ऑर्बिटर और साथ ही इसकी सतह पर चलने वाले रोवर्स का इस्तेमाल किया है, और यह बेहतर ढंग से समझने के लिए, कि भविष्य में लाल ग्रह पर पहले अंतरिक्ष यात्री किस तरह के विकिरण स्तर का अनुभव कर सकते हैं, उसे जानने की कोशिश कर रहे हैं।
मंगल ग्रह को सोलर रेडिएशन ने घेरा
नासा ने कहा है, कि सूरज से जो आग का तूफान निकला था, वो अत्यधिक भयंकर तूफान था और सोलर ऑर्बिटर अंतरिक्षयान ने जो आंकड़े जुटाए हैं, उससे पता चलता है, कि 20 मई को सूर्य से X12 फ्लेयर निकला था और वो मंगल ग्रह से टकराया है।
इस विशाल X12 फ्लेयर ने एक्स-रे और गामा किरणों को मंगल की ओर काफी तेज रफ्तार से भेजा है और फ्लेयर के फौरन बाद एक कोरोनल मास इजेक्शन जारी हुआ, जिसने लाल ग्रह की दिशा में रेडिएशन को फेंक दिया।
नासा के चंद्रमा से लेकर मैरीलैंड के ग्रीनबेल्ट में गोडार्ड स्पेस फ़्लाइट सेंटर में मंगल अंतरिक्ष मौसम विश्लेषण कार्यालय तक की गतिविधि पर नजर रखने वाले वैज्ञानिकों के मुताबिक, एक्स-रे और गामा किरणें प्रकाश की गति से यात्रा करती हुई पहले मंगल पर पहुंचीं, उसके बाद दसियों मिनट के भीतर रेडिएशन के कण पहुचने लगे।
क्यूरियोसिटी रोवर, जो वर्तमान में मंगल ग्रह के भूमध्य रेखा के ठीक दक्षिण में गेल क्रेटर की खोज कर रहा है, उसने सौर तूफान के दौरान अपने नेविगेशन कैमरों का उपयोग करके ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरें लिए हैं। नासा के मुताबिक, इन तस्वीरें बर्फ जैसी दिखने वाली सफेद धारियां, क्यूरियोसिटी के कैमरों से टकराने वाले आवेशित कणों का परिणाम हैं।
नासा ने कहा है, कि सौर कणों से निकलने वाली ऊर्जा इतनी मजबूत थी, कि मंगल ओडिसी ऑर्बिटर पर लगा स्टार कैमरा, जो ग्रह के चक्कर लगाते समय जांच को दिशा देने में मदद करता है, वो कुछ समय के लिए बंद हो गया था। हालांकि, अच्छी बात ये रही, कि अंतरिक्ष यान एक घंटे के भीतर कैमरे को फिर से चालू करने में सक्षम हो गया। पिछली बार ओडिसी को इस तरह के चरम सौर व्यवहार का सामना 2003 के सौर तूफान के दौरान करना पड़ा था, जब एक X45 फ्लेयर ने ऑर्बिटर के विकिरण डिटेक्टर को घेर लिया था।
कोलोराडो में साउथवेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के सौर प्रणाली विज्ञान और अन्वेषण प्रभाग में RAD के प्रमुख अन्वेषक डॉन हैस्लर ने एक बयान में कहा, कि "मुझे आश्चर्य नहीं होगा, अगर सूर्य पर यह सक्रिय क्षेत्र लगातार फटता रहे, जिसका मतलब ये है, कि आने वाले हफ्तों में पृथ्वी और मंगल, दोनों पर और भी ज्यादा सौर तूफान आएंगे।"
नासा के मुताबिक, भविष्य के अंतरिक्ष यात्री एक दिन मंगल ग्रह के इन प्रकाश शो को देख पाएंगे।
कई मंगल मिशनों से प्राप्त डेटा का पता लगाकर, वैज्ञानिक यह देखने में सक्षम हो गये हैं, कि सौर तूफान कैसे सामने आया है और इसके क्या परिणाम होने वाले हैं। आपको बता दें, कि अगर ये सौर तूफान पृथ्वी की तरफ बढ़ता, तो इसका असर सैटेलाइट्स पर पड़ सकता था और कम्युनिकेशन नेटवर्क खतरे में आ सकता था। इसके अलावा, बिजली संयंत्रों पर भी गहरा असर पड़ सकता था।












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