S Jaishankar: जापान-दक्षिण कोरिया की यात्रा पर जाएंगे एस जयशंकर, इन अहम कार्यक्रमों में लेंगे हिस्सा
विदेश मंत्री एस जयशंकर 5 मार्च से 8 मार्च तक दक्षिण कोरिया और जापान की द्विपक्षीय यात्रा पर जाने वाले हैं। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, जयशंकर 5-6 मार्च, 2024 को पहली बार सियोल का दौरा करेंगे। दक्षिण कोरिया के महामहिम विदेश मंत्री चो ताए-यूल के साथ 10वीं भारत-दक्षिण कोरिया संयुक्त आयोग बैठक (जेसीएम) की सह-अध्यक्षता करेंगे।
विदेश मंत्री भारत-जापान और भारत-दक्षिण कोरिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने जा रहे हैं। उनकी यह यात्रा 4 मार्च से शुरू होगी। इस दौरान हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चुनौतियों समेत अहम द्विपक्षीय, क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर अपने वार्ताकारों के साथ बातचीत करेंगे।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि जयशंकर की भारत के दो प्रमुख साझेदारों कोरिया गणराज्य व जापान की यात्रा द्विपक्षीय आदान-प्रदान को और गति प्रदान करेगी तथा भविष्य के सहयोग के लिए एजेंडा तय करेगी। बयान में कहा गया है कि यात्रा के दौरान विदेश मंत्री के कोरियाई गणमान्य व्यक्तियों, थिंक टैंक के प्रमुखों और भारतीय समुदाय से भी मिलने की उम्मीद है।
जयशंकर दो दिवसीय यात्रा पर पहले सियोल जाएंगे जहां वह कोरिया के अपने समकक्ष चो ताइ-युल के साथ 10वीं भारत-दक्षिण कोरिया संयुक्त आयोग बैठक (जेसीएम) की सह-अध्यक्षता करेंगे। दक्षिण कोरिया के साथ भारत की विशेष रणनीतिक साझेदारी का सहयोग के विविध क्षेत्रों तक विस्तार हुआ है जिसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, शिक्षा और प्रौद्योगिकी शामिल हैं।
दक्षिण कोरिया की यात्रा के बाद, जयशंकर जापान की विदेश मंत्री योको कामिकावा के साथ 16वीं भारत-जापान विदेश मंत्रियों की रणनीतिक वार्ता के लिए 6 से 8 मार्च तक जापान की यात्रा करेंगे। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। उनसे स्वतंत्र, खुले, समावेशी, शांतिपूर्ण और समृद्ध इंडो-पैसिफिक के लिए सहयोग पर विचारों का आदान-प्रदान करने की भी उम्मीद है।
बयान के अनुसार, पिछले दशक में रक्षा और डिजिटल प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला, स्वच्छ ऊर्जा, हाई-स्पीड रेल, औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी और गहरी हुई है।
जापान यात्रा के दौरान टोक्यो में जयशंकर की बैठकें इन क्षेत्रों में भारत के कार्यात्मक सहयोग को रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान करेंगी। विदेश मंत्री टोक्यो में पहले रायसीना गोलमेज सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे। विज्ञप्ति में कहा गया है कि गोलमेज बैठक भारत और जापान के बीच ट्रैक 2 आदान-प्रदान को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विज्ञप्ति के अनुसार, विदेश मंत्री की कोरिया और जापान यात्रा से द्विपक्षीय आदान-प्रदान को गति मिलेगी और भविष्य में सहयोग का एजेंडा तय होगा।












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