Explainer: डिफेंस, स्पेस, चीन और इंडो-पैसिफिक.. फ्रांस के साथ ऐतिहासिक समझौतों से कितना बदल जाएगा भारत?
India-France News: भारत और फ्रांस ने अपने इंडो-पैसिफिक सिक्योरिटी, डिफेंस और स्पेस संबंधों को गहरा करने का फैसला किया है, जिसमें पहले की जो निर्यात को लेकर समझौते किए गये थे, उन्हें आगे बढ़ाने, सैन्य-औद्योगिक सहयोग से लेकर संयुक्त रूप से हेलीकॉप्टर इंजन का निर्माण, अतिरिक्त पारंपरिक पनडुब्बियों का निर्माण और संयुक्त उपग्रह प्रक्षेपण जैसे सौदे शामिल हैं।
गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि बने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत की राजकीय यात्रा के दौरान ये समझौते किए गये हैं। रिपब्लिक डे में मुख्य अतिथि के तौर पर हिस्सा लेने फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने नई दिल्ली का दौरा किया था और इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक हुई। जिसके बाद दोनों पक्षों ने रणनीतिक क्षेत्रों में कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

सितंबर 2023 में भारत की अध्यक्षता में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली की यात्रा के बाद छह महीने में दूसरी बार होने वाली मैक्रों की यात्रा का मुख्य फोकस, उन लाभों को बढ़ाना था, जो दोनों देशों ने पिछले कुछ वर्षों में हासिल किए हैं।
मैक्रों और मोदी ने रक्षा और सुरक्षा साझेदारी को दोनों देशों के संबंधों के प्रमुख स्तंभ और अपने-अपने देश की संप्रभुता और रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करने और भारत-प्रशांत क्षेत्र में शांति को आगे बढ़ाने के स्रोत के रूप में मान्यता दी है।
इंडो-पैसिफिक में सुरक्षा पर समझौता
फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने इंडो-पैसिफिक में सिक्योरिटी के मुद्दों को संबोधित करने के लिए भारत के साथ दीर्घकालिक साझेदारी को और गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कम्युनिस्ट चीन की आक्रामक, विस्तारवादी योजनाओं का मुकाबला करने के लिए "स्वतंत्र, खुले, समावेशी, सुरक्षित और शांतिपूर्ण इंडो-पैसिफिक और उससे आगे को आगे बढ़ाने के लिए क्षेत्र में उनकी साझेदारी की महत्वपूर्ण भूमिका" को भी स्वीकार किया।
भारत और फ्रांस ने चीन के खिलाफ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए जुलाई 2023 में एक व्यापक रोडमैप पर हस्ताक्षर किए थे, जो अपने क्षेत्रीय दावों के साथ इंडो-पैसिफिक देशों के लिए एक दर्द है। चीन न केवल भारत के साथ, बल्कि फिलीपींस जैसे अन्य देशों के साथ भी सैन्य संघर्ष में उलझा हुआ है और हाल के दिनों में फिलीपींस और चीन के बीच कई झड़पें भी हो चुकी हैं।
फ्रांस के साथ भारत के संबंध खुफिया जानकारी और सूचना के आदान-प्रदान से लेकर सैन्य अभ्यास और रक्षा उपकरण खरीद तक समुद्र तल से लेकर अंतरिक्ष तक सभी क्षेत्रों तक फैले हुए हैं।

डिफेंस-इंडस्ट्रियल कॉपरेशन
दोनों नेताओं ने दोनों देशों के संबंधित डिफेंस इंडस्ट्री को बढ़ावा देने और भारत की रक्षा जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से सह-डिजाइन, सह-विकास और सह-उत्पादन के अवसरों की पहचान करने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है। जिसका मकसद फ्रांस को भारत का एक विश्वसनीय डिफेंस स्रोत भी बनना है।
भारत और फ्रांस का लक्ष्य 2025 तक सैन्य उत्पादन में 25 अरब अमेरिकी डॉलर और हथियारों के निर्यात में 5 अरब अमेरिकी डॉलर के लक्ष्य को पूरा करने के लिए भारत की रक्षा औद्योगिक क्षमताओं को बढ़ावा देना है। इससे ना सिर्फ भारत में हजारों लोगों के लिए नई नौकरियां पैदा होंगी, बल्कि हथियार प्रोडक्शन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मेक इन इंडिया ड्रीम को भी बूस्ट मिलेगा।
इसके अलावा, फ्रांस के सफरान और भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के बीच लड़ाकू जेट एयरो-इंजन विकसित करने के लिए भी समझौता होने की उम्मीद है। वहीं, सिविल लीप एयरो-इंजन और राफेल के लिए रखरखाव-मरम्मत-ओवरहाल सुविधाओं की स्थापना जैसे क्षेत्रों को शामिल किया जा सकता है।
हेलीकॉप्टर के लिए एयरबस-टाटा समझौता
इसके अलावा, दोनों नेताओं ने भारत में सिंगल-इंजन H125 नागरिक हेलीकॉप्टरों की असेंबली शुरू करने के लिए टाटा एडवांस्ड सिस्टम के साथ साझेदारी करने के एयरबस के फैसले की भी घोषणा की है। भारत सरकार की आत्मनिर्भरता की रणनीति के अनुरूप, दोनों कंपनियां भारत में हेलीकॉप्टर बनाने वाली पहली निजी क्षेत्र की कंपनियां बन जाएंगी।
एयरबस ने अपने यूरोपीय असेंबली प्लांटों के लिए भारत में विमान के हिस्सों के बढ़ते ऑर्डर देने का फैसला किया है। दोनों कंपनियों द्वारा स्थान तय करने के बाद एच125 के लिए अंतिम असेंबली लाइन 24 महीने में तैयार हो जाएगी और भारत निर्मित हेलीकॉप्टर 2026 से शुरू हो जाएंगे।
दिलचस्प बात यह है कि एयरबस और टाटा पहले से ही भारत में C295 सैन्य मालवाहक विमान बनाने के लिए साझेदारी में हैं। जिसके तहत, भारतीय वायु सेना के ऑर्डर पर 56 विमानों में से 40 को मोदी के घर गुजरात के वडोदरा में फाइनल असेंबली लाइन (एफएएल) में बनाया जाएगा।
स्कॉर्पीन पनडुब्बी स्थानीयकरण योजना
दोनों पक्षों ने स्वदेशीकरण सहित भारत में निर्मित होने वाली स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के स्थानीयकरण के अलावा, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और सफरान के बीच एक भारतीय मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर इंजन के लिए एक संयुक्त उद्यम के साथ एक व्यापक हेलीकॉप्टर साझेदारी की भी घोषणा की है।
जुलाई 2023 में, जब मोदी फ्रांस में थे, दोनों देशों ने मुंबई स्थित मझगांव डॉक एंड शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा तीन अतिरिक्त स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के निर्माण की घोषणा की थी, हालांकि बाद में इसे संयुक्त वक्तव्य से हटा दिया गया था। लेकिन, इस साल के ज्वाइंट स्टेटमेंट में इस सौदे का जिक्र किया गया है।
जल्द लॉन्च करेंगे ज्वाइंट सैटेलाइट
भारत और फ्रांस पहले से ही अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग कर रहे हैं और एक-दूसरे के उपग्रहों को उनकी संबंधित अंतरिक्ष एजेंसियों द्वारा लॉन्च किया जा रहा है। अंतरिक्ष क्षेत्र का यह संबंध छह दशकों तक चला है, और दोनों देशों ने अंतरिक्ष सहयोग के सभी पहलुओं में रणनीतिक मार्गदर्शन और दिशा प्रदान करके अपने सहयोग को एक पायदान ऊपर ले जाने के लिए जून 2023 में रणनीतिक अंतरिक्ष संवाद की स्थापना की थी।
भारत और फ्रांस ने इस बार मानवता और दुनिया के लाभ के लिए अंतरिक्ष सहयोग को और विस्तारित करने की प्रतिबद्धता जताई है। जिसमें उपग्रहों और पेलोड के सह-विकास, निर्माण और प्रक्षेपण, नए प्रक्षेपण वाहन टेक्नोलॉडी को लेकर समझौता शामिल है।
इस बैठक के दौरान, भारत के न्यूस्पेस और फ्रांस के एरियनस्पेस ने उपग्रह प्रक्षेपण मिशन पर दीर्घकालिक साझेदारी बनाने का निर्णय लिया और रक्षा अंतरिक्ष सहयोग पर आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए।












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