खुलासा: कतर में अभी भी फंसे हैं नौसेना के एक पूर्व अधिकारी, तिवारी ने चिट्ठी लिखकर सुनाई टॉर्चर की कहानी
Indian Navy: संडे गार्जियन की रिपोर्ट में सनसीखेज खुलासा करते हुए बताया गया है, कि कतर में अभी भी भारतीय नौसेना के एक पूर्व अधिकारी पूर्णेंदु तिवारी फंसे हुए हैं और उन्होंने कतर में भारतीय राजदूत, भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर, विदेश सचिव विक्रम मिस्री समेत कई भारतीय अधिकारियों को पत्र लिखकर टॉर्चर की कहानी सुनाई है।
पत्र में पूर्व नौसेना कमांडर तिवारी ने बताया है, कि कतर के अधिकारियों ने उन्हें इतना प्रताड़ित किया, कि वे बेहोश हो गए। उन्होंने यह भी बताया है, कि कैसे जासूसी के झूठे आरोप के बाद उन पर बाद में एक और अपराध का आरोप लगाया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, दो महीने तक एकांत कारावास में रखने के बाद, उन्हें टॉर्चर करके, बयानों और दस्तावेजों पर दस्तखत करने के लिए मजबूर किया गया, जिससे वे, अब बंद हो चुकी कंपनी दहरा ग्लोबल के सीईओ खमीस अल आज़मी और कतर के नागरिक तारिक से जुड़े एक मामले में फंस गए, जिन पर मनी लॉन्ड्रिंग और सरकारी वित्त को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया था।
संडे गार्जियन ने दावा किया है, कि ये पत्र एक दिसंबर को लिखा गया है, जिसमें 65 साल के तिवारी ने बताया है, कि उन्हें किस तरह से शारीरिक और मानसिक तौर पर टॉर्चर किया गया है।
तिवारी पिछले ढाई साल से अपने परिवार से अलग रह रहे हैं। पत्र में उन्होंने तत्काल भारत वापस भेजे जाने की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा है, कि अब वे और ज्यादा प्रताड़ना नहीं झेल सकते। इससे उनकी मानसिक स्थिति भी खराब हो गई है।
तिवारी को मिल चुका है राष्ट्रपति से सम्मान
पूर्व नौसेना कमांडर तिवारी को राष्ट्रपति से NRI अवार्ड मिल चुका है और भारतीय नौसेना और वाणिज्यिक क्षेत्र में 44 वर्षों का विशिष्ट अनुभव रखने वाले तिवारी ने बताया है, कि हिरासत में रहने के दौरान कतर के अधिकारियों ने उन्हें किस तरह प्रताड़ित किया।
उन्होंने लिखा है, कि "एकांत कारावास के दौरान मुझे शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया और दुर्व्यवहार के कारण कई बार मैं बेहोश हो गया।"
आपको बता दें, कि कतर में भारतीय नौसेना के 8 पूर्व अधिकारियों को लेकर पिछले साल अचानक रिपोर्ट आई थी, कि उन्हें फांसी की सजा दी गई है। बाद में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हस्तक्षेप के बाद उन्हें कतर के अमीर के क्षमादान दे दिया था, जिसके बाद 6 पूर्व अधिकारी कुछ ही दिनों में वापस भारत लौट आए। लेकिन, तिवारी को नहीं छोड़ा गया। जबकि एक और पूर्व अधिकारी को इस साल फरवरी में वापस भारत भेजा गया है।
तिवारी अभी भी कतर में फंसे हुए हैं और जान बचाने की गुहार लगा रहे हैं।
तिवारी को कतर के अधिकारियों ने कैसे फंसाया?
तिवारी ने लिखा है, कि कैसे कतरी अधिकारियों ने उन्हें उस कंपनी के सीईओ से जुड़े वित्तीय घोटाले के मामले में फंसाया, जिसके लिए वे काम करते थे। तिवारी ने जोर देकर कहा है, कि सीईओ, एक ओमानी नागरिक, कंपनी के वित्तीय मामलों के लिए पूरी तरह जिम्मेदार था। प्रबंध निदेशक के रूप में, तिवारी का दावा है कि उनकी भूमिका ऑपरेशनल देखरेख तक सीमित थी और कंपनी के वित्तीय लेन-देन में उनकी कोई भागीदारी नहीं थी। तिवारी का आरोप है, कि एकांत कारावास के दौरान उन्हें दबाव में बयानों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया था।
उन्होंने लिखा, "मेरे लेन-देन पारदर्शी होने, बैंकों के माध्यम से किए जाने और कतरी अधिकारियों द्वारा ऑडिट किए जाने के बावजूद, मुझे दबाव में दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया।"
तिवारी ने लिखा है, कि वो हाई ब्लडप्रेशर और सुगर के मरीज हैं और उन्हें हॉर्निया का ऑपरेशन भी करवाना है। इसके अलावा, भारत में 86 साल की उनकी मां उनका इंतजार कर रही हैं।
दूसरी तरफ, कतर के अधिकारियों ने तिवारी के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है, सीईओ को उनके खाते से पैसे निकालने की इजाज है और उन्हें पूछताछ के लिए सिर्फ तीन बार बुलाया गया है।
पत्र में विदेश मंत्रालय पर यात्रा प्रतिबंध के तहत तिवारी के कतर में लगातार रहने के लिए कथित रूप से सहमत होने के लिए भी सवाल उठाया गया है। तिवारी ने विदेश मंत्रालय के भीतर एक "झूठी कहानियां" फैलाने की ओर भी इशारा किया है, जिसमें दावा किया गया है, कि वह कतर में अपनी मंगेतर के साथ खुश हैं। उन्होंने इस दावे का जोरदार खंडन किया है।
तिवारी के मुताबिक, चूंकि वह हिरासत में लिए गए दिग्गजों के समूह के सबसे वरिष्ठ सदस्य थे, और कंपनी के प्रबंध निदेशक के रूप में, उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया गया। उन्होंने आरोप लगाया है, "कतर के अधिकारी इस बात से खुश नहीं हैं, कि सभी आठों को छोड़ दिया गया, और वे मुझे और भी फंसाने के लिए बेताब हैं।"
उन्होंने लिखा है, कि "पिछले ढाई साल से मैं दर्द, पीड़ा और कठिनाइयों से गुजर रहा हूं। मैं अब और नहीं सह सकता।" उन्होंने भारतीय अधिकारियों से गुहार लगाई है, कि वे मामले के और आगे बढ़ने से पहले कतर के विदेश मंत्रालय से हस्तक्षेप करें। माना जा रहा है, कि अभी भी जांच के दायरे में चल रहा यह मामला अगर अदालत में जाता है, तो तिवारी की भारत वापसी में और भी देरी होगी।












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