Aeolus satellite: स्पेस में दिखी 'आग की लपटें', भस्म हुआ एओलस, मलबा ही बची 'निशानी'
ईएसए का एक उपग्रह करीब पांच साल बाद वापस लौट रहा था। जिसको लेकर स्पेस एजेंसी अहम वजह बताई थी। इसके पिछले हफ्ते ही धरती पर आने की उम्मीद थी, लेकिन इस हफ्ते ESA ने कहा कि एओलस स्पेस में ही जल गया।
पिछले कुछ महीनों में यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) के एओलस सैटेलाइट (Aeolus satellite) को लेकर एक बयान के बाद कई तरह से कयास लगाए गए। दरअसल, ये सैटेलाइट करीब पांच साल पहले छोड़ा गया था। तीन साल का मिशन पूरा होने के बाद पृथ्वी की ओर वापस लौट रहा था। लेकिन पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते इसमें आग लग गई। उपग्रह पूरी तरह जल गया, सिर्फ उसका मलबा ही पृथ्वी आ सका।
एओलस सैटेलाइट का अंतरिक्ष यान 1360 किलोग्राम वजन था। इसे ईएसए के अर्थ एक्सप्लोरर अनुसंधान कार्यक्रम के तहत लॉन्च किया गया था। स्पेस एजेंसी की ये मिशन तीन साल का था। जो पूरा होने बाद धीरे-धीरे इसका ईंधन खत्म हुआ, जिसके बाद इससे वापस पृथ्वी की ओर कूच किया था।

मिशन की अवधि के दौरान एओलस सैटेलाइट ने पृथ्वी से 320 किलोमीटर ऊपर से पृथ्वी पर बहने वाली हवाओं को ऑब्वर्ज किया। सैटेलाइट का फ्यूल काफी कम हो गया है। जिसके कारण स्पेस एजेंसी इसे नीचे ला रही थी। लेकिन उपग्रह ने जैसे ही पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश किया उसका तापमान इतना बढ़ गया कि वो जलने लगा।
इससे पहले अंतरिक्ष एजेंसी को उम्मीद थी कि एओलस को कम स्पीड से 120 किलोमीटर तक नीचे लाय जाएगा। जब ये पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर जाएगा तो इसे अटलांटिक महासागार में उतारा जाएगा। लेकिन उपग्रह के जलने के बाद से ईएसए का संपर्क एओलस से टूट गया। आर्बिटर द्वारा भेजी तस्वीरें स्पेस एजेंसी ने साझा कीं। जिसमें देखा गया की एओलस में पूरी तरह आग लग चुकी थी।
एओलस को धरती पर लाने की योजना अपने आप में बिल्कुल अलग थी। क्यों कि आमतौर पर सैटेलाइट जब अपना मिशन पूरा कर लेते हैं, तो वह अनियंत्रित होकर पृथ्वी पर गिर जाते हैं। अधिकतर उपग्रह क्रैश समुद्री इलाकों में होता है। एओलस सैटेलाइट के लिए भी कुछ ऐसा ही सोचा गया था, लेकिन ऐन वक्त पर मिशन से जुड़ी टीम ने इस नियंत्रित तरीके से खत्म करने का फैसला किया।












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