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अल्पसंख्यकों पर अत्याचार, मानवाधिकार, NGO पर नकेल क्यों? EU ने भारत के सामने जताई चिंता

शुक्रवार को भारत दौरा खत्म करने के बाद इमोन गिलमोर ने भारत दौरे को लेकर कई अलग अलग ट्वीट्स किए हैं, जिसमें उन्होंने कहा कि, उन्होंने भारत सरकार के सामने कई मुद्दों को उठाया है।

नई दिल्ली, अप्रैल 30: यूरोप के शीर्ष मानवाधिकार अधिकारी ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के साथ आधिकारिक बैठकों के दौरान कई चिंताओं को लेकर सवाल उठाए हैं, जिनमें भारत में कई एनजीओं पर पाबंदियां, हिलाया समय में सांप्रदायिक हिंसा और जम्मू और कश्मीर के साथ साथ और धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर भी सवाल पूछे हैं। हालांकि, द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, एनएचआरसी और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने बैठकों को लेकर जो नोट्स जारी किए हैं, उनमें इन विवादास्पद मुद्दों का जिक्र नहीं है।

यूरोपीय यूनियन ने जताई चिंता

यूरोपीय यूनियन ने जताई चिंता

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपीय यूनियन के अधिकारियों ने भारत सरकार के अल्पसंख्यक मंत्रालय के सामने इन मामलों को लेकर चिंता तब जाहि की है, जब यूरोपीय संघ के मानवाधिकार के विशेष प्रतिनिधि इमोन गिलमोर भारत दौरे पर रायसीना डायलॉग में भाग लेने के लिए आए नई दिल्ली आए हुए थे और इस दौरान उन्होंने अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ भारतीय अधिकारियों से मुलाकात की। यह चर्चा सोमवार से शुरू हो रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूरोप दौरे से ठीक पहले हुई है, जिसमें वो जर्मनी, डेनमार्क और फ्रांस का दौरा करने वाले हैं। पीएम मोदी का ये यूरोपीय दौरा काफी अहम माना जा रहा है, जिसमें वो नॉर्डिक देशों के प्रधानमंत्रियों के साथ भी मुलाकात करेंगे।

किन-किन मुद्दों पर हुई चर्चा

किन-किन मुद्दों पर हुई चर्चा

शुक्रवार को भारत दौरा खत्म करने के बाद इमोन गिलमोर ने भारत दौरे को लेकर कई अलग अलग ट्वीट्स किए हैं, जिसमें उन्होंने कहा कि, उन्होंने भारत सरकार के अधिकारियों के साथ विदेशी योगदान नियामक अधिनियम (एफसीआरए), नजरबंदी, जमानत, देशद्रोह और आतंकवाद विरोधी कानूनों, यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियों के संबंध में एनएचआरसी की भूमिका)" पर भी चर्चा की है। उन्होंने कहा कि, उन्होंने मुलाकात के दौरान अल्पसंख्यक और व्यक्तिगत मामलों पर भी चर्चा की है। गिलमोर ने इस लिस्ट में NHRC संस्करण को भी जोड़ा, जिसमें केवल यह कहा गया है, कि अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा ने "यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल को दुनिया भर में मानवाधिकारों के कारणों को सुधारने के लिए मिलकर काम करने के लिए कहा है"

भारत सरकार ने दिया जवाब

भारत सरकार ने दिया जवाब

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपीय संघ के मानवाधिकार अधिकारियों से बैठक के दौरान भारत सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कथित तौर पर प्रतिनिधिमंडल को बताया कि, 'साल 2014 के बाद से भारत में एक भी बड़ा सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ है'। नकवी ने गिलमोर की दलीलों को "अलग-थलग घटनाओं" के रूप में खारिज कर दिया, जिन्हें "सांप्रदायिक रंग" दिया गया है। उन्होंने कहा कि पूरी कोशिश नरेंद्र मोदी सरकार को 'परिभाषित' करने की है। वहीं, मुख्तार अब्बास नकवी ने गिलमोर के ट्वीट का कोई जवाब नहीं दिया है। इसके साथ ही गिलमोर और नकवी के बीच हुई बैठक को लेकर जो आधिकारिक बयान आया है, वो इन रिपोर्ट्स के ठीक उलट था और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री नकवी ने जो ट्वीट किया है, उसमें उन्होंने कहा है कि, उन्होंने "अल्पसंख्यकों सहित समाज के सभी वर्गों के सामाजिक-आर्थिक-शैक्षिक सशक्तिकरण के लिए नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा किए जा रहे कल्याण कार्यक्रमों के प्रभावी परिणामों से प्रतिनिधिमंडल को अवगत कराया है"।

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