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इथियोपिया के प्रधानमंत्री ने गृहयुद्ध में संभाला सेना का मोर्चा, 2019 में मिल चुका है शांति के लिए नोबेल पुरस्

नई दिल्ली, 26 नवंबर। अफ्रीका महाद्वीप में दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश इथियोपिया में इन दिनों गृहयुद्ध की वजह से हालात बहुत खराब हैं। इस महीने के शुरुआत में ही यहां पर इमरजेंसी घोषित कर दी थी, लेकिन इसके बावजूद भी विद्रोहियों ने पूरे देश के अंदर आतंक मचाया हुआ है। हालात खराब होते देख देश के प्रधानमंत्री अबी अहमद खुद युद्ध के मैदान में चले गए हैं और सेना का नेतृत्व कर रहे हैं। बुधवार को प्रधानमंत्री ने खुद युद्ध में जाने की घोषणा की थी। हालांकि ये जानकारी उन्होंने नहीं दी कि वो कहां से युद्ध का नेतृत्व कर रहे हैं। उनकी गैरमौजूदगी में उपप्रधानमंत्री ने कामकाज का जिम्मा संभाल लिया है।

अली अहमद को 2019 में मिला था शांति पुरस्कार

अली अहमद को 2019 में मिला था शांति पुरस्कार

आपको बता दें कि 45 साल के अबी अहमद खुद एक सैनिक रह चुके हैं और आपको जानकर हैरानी होगी कि उन्हें 2019 में नोबेल का शांति पुरस्कार भी मिल चुका है। अबी अहमद अली को उनके शांति प्रयासों खासकर पड़ोसी देश इरिट्रिया के साथ सीमा विवाद को हल करने में निर्णायक भूमिका निभाने के लिए यह पुरस्कार दिया गया था। अबी अहमद को इथियोपिया का नेल्सन मंडेला भी कहा जाता है। अबी अहमद ने इसी साल देश में अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत की थी। जून 2021 में उनकी प्रोस्पेरिटी पार्टी ने 436 में से 410 सीटें जीती थीं।

क्यों इथियोपिया में खराब हैं हालात?

क्यों इथियोपिया में खराब हैं हालात?

आपको बता दें कि इथियोपिया में पिछले कुछ महीनों से गृहयुद्ध चल रहा है। यहां देश के टाइग्रे क्षेत्र के लड़ाकों और इथियोपिया के सैनिकों के बीच युद्ध चल रहा है। इस युद्ध में अभी तक 10 हजार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। फ्रांस, जर्मनी और तुर्की जैसे बड़े देशों ने वहां से अपने नागरिकों को निकाल लिया है और जो वहां हैं, उन्हें तुरंत देश छोड़ने के लिए कहा है। इस देश में अभी हालात और भी खराब होने की आशंका है, क्योंकि विद्रोही लड़ाकों ने राजधानी अदीस अबाबा की ओर बढ़ना शुरू कर दिया है।

गृहयुद्ध में अबी अहमद की हो सकती है हत्या

गृहयुद्ध में अबी अहमद की हो सकती है हत्या

आपको बता दें कि अबी अहमद जब से सत्ता में आए हैं, तब से टाइग्रे विद्रोहियों ने उनके खिलाफ आंदोलन को हिंसक कर दिया है। उनके सत्ता में आने से पहले टाइग्रे विद्रोहियों का सरकार पर अच्छा खासा कंट्रोल था। हाल के कुछ हफ्तों में टाइग्रे फोर्स ने प्रधानमंत्री अबी अहमद को अपना पद छोड़ने के लिए मजबूर किया है। कुछ जानकारों का कहना है कि इथियोपिया में हालात असामान्य हैं, उपर से एक प्रधानमंत्री का युद्ध में मोर्चे पर चले जाना स्थिति को और भी खतरनाक बना सकता है। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस के शोधकर्ता अदेम अबेबे ने कहा है, "स्थिति बेहद खतरनाक है।" "अगर प्रधानमंत्री अबी अहमद घायल या फिर मारे जाते हैं तो ना केवल संघीय सरकार गिर जाएगी, बल्कि सेना भी जमीन पर आ जाएगी।

ये भी पढ़ें: हिंसा की आग में जल रहा है ऑस्ट्रेलिया का पड़ोसी सोलोमन आईलैंड्स

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