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Elon Musk ने अपने रिसर्च के लिए सैकड़ों जानवरों की ले ली जान? Neuralink के खिलाफ जांच शुरू

कंपनी की तरफ से शिकायतें मिलीं हैं कि सीईओ एलन मस्क की तरफ से एक्सपेरिमेंट में तेजी का दबाव डाले जाने के कारण, एक्सपेरिमेंट खराब हुए हैं। ऐसे फेल हुए टेस्ट, बार-बार करने पड़ते हैं, जिससे पशुओं की अधिक मौत हुई।

Elon Musks brain-implant firm Neuralink

कुछ दिन पहले एलन मस्क ने इंसानों के दिमाग में चिप लगाने की बात कर लोगों को हैरान कर दिया था। मस्क का दावा था कि उनकी मेडिकल डिवाइस बनाने कंपनी न्यूरालिंक ऐसी तकनीक पर काम कर रही है जो मस्तिष्क को पढ़ सके। लेकिन अब एलन मस्क और उनकी कंपनी न्यूरालिंक मुश्किलों में घिरती नजर आ रही है। न्यूरालिंक पर अब पशुओं संग क्रूरता के मामले की जांच हो रही है। अमेरिकी प्रशासन ने पशु-कल्याण कानूनों के संभावित उल्लंघन को लेकर न्यूरालिंक के खिलाफ जांच शुरू कर दी है।

1500 से अधिक जानवरों की मौत!

1500 से अधिक जानवरों की मौत!

समाचार एजेंसी रॉयटर्स को जानकारी मिली थी कि न्यूरालिंक में जानवरों पर टेस्टिंग की गति बढ़ाने का दबाव डाला जा रहा है, जिससे जानवरों को बेवजह पीड़ा हो रही है और उनकी मौत हो रही है। रॉयटर्स को यह सूचना कंपनी के ऑपरेशन से जुड़े कर्मचारियों ने ही दी थी। रॉयटर्स को मिले दस्तावेजों के मुताबिक न्यूरालिंक में 2018 के बाद शुरू हुए प्रयोगों में करीब 1500 पशुओं की जान गई है। इसमें से लगभग 300 के करीब भेड़ें, सूअर, बंदर और चूहे शामिल हैं।

अमेरिकी कृषि विभाग ने शुरू की जांच

अमेरिकी कृषि विभाग ने शुरू की जांच

सूत्रों के अनुसार, यह एक मोटे अनुमान पर आधारित आंकड़े हैं क्योंकि कंपनी परीक्षण किए गए और प्रयोगों के दौरान मारे जाने वाले जानवरों की सही संख्या का रिकॉर्ड नहीं रखती है। जानवरों की मौतों की कुल संख्या अनिवार्य रूप से इंगित नहीं करती है कि न्यूरालिंक नियमों या मानक अनुसंधान प्रथाओं का उल्लंघन कर रहा है। इस मामले की जानकारी रखने वाले दो सूत्रों के अनुसार, संघीय अभियोजक के अनुरोध पर अमेरिकी कृषि विभाग के महानिरीक्षक द्वारा हाल के महीनों में कंपनी के खिलाफ जांच शुरू की गई है।

प्रयोग के बाद जानवरों को दी जाती है मौत

एक सूत्र ने बताया कि यह जांच एनिमल वेलफेयर एक्ट के उल्लंघन पर केंद्रित है जो यह तय करता है कि शोधकर्ता कुछ जानवरों के साथ कैसे व्यवहार करेंगे और कैसे उनपर टेस्ट किए जाएंगे। कई कंपनियां नियमित रूप से मानव स्वास्थ्य के हित में शोधों के लिए जानवरों का प्रयोग करती हैं। इन कंपनियों को अपने उत्पादों को बाजार में जल्दी लाने के लिए वित्तीय दबाव का भी सामना करना पड़ता है। जानवरों को आम तौर पर प्रयोग पूरे हो जाने के बाद मार दिया जाता है ताकि अनुसंधान से जुड़े उद्देश्यों के लिए उनकी पोस्ट-मॉर्टम की जांच की जा सके।

एलन मस्क के दबाव के कारण जा रही जान

अब अचानक अमेरिकी कृषि विभाग द्वारा जांच की खबरों से एलन मस्क और उनकी कंपनी पर दबाव बढ़ गया है। आपको बता दें कि यह जांच ऐसे समय में की जा रही है जब न्यूरालिंक में एनिमल टेस्टिंग के खिलाफ कर्मचारियों के मतभेद बढ़ते जा रहे हैं। कंपनी की तरफ से शिकायतें मिलीं हैं कि सीईओ एलन मस्क की तरफ से एक्सपेरिमेंट में तेजी का दबाव डाले जाने के कारण, एक्सपेरिमेंट खराब हुए हैं। ऐसे फेल हुए टेस्ट, बार-बार करने पड़ते हैं, जिससे टेस्ट किए जा रहे जानवरों की मौत की संख्या बढ़ती है।

बार-बार हुए परीक्षण के कारण अधिक पशुओं की मौत

बार-बार हुए परीक्षण के कारण अधिक पशुओं की मौत

जानकारी के मुताबिक हाल के वर्षों में 86 सूअरों और 2 बंदरों से जुड़े चार प्रयोग मानवीय त्रुटियों के कारण फेल हो गए। इन गलतियों के कारण बार-बार परीक्षण किए गए जिसमें और कई जानवरों की भी जान गई। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने दावा किया कि उसके पास इसके दस्तावेज भी मौजूद हैं। न्यूरालिंक के डॉक्यूमेंट और कंपनी के कम से कम 20 मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों के इंटरव्यू में रॉयटर्स के सामने यह जानकारी आई है। इलॉन मस्क और न्यूरालिंक के अधिकारियों की ओर से इस बारे में सवाल पूछे जाने पर कोई जवाब नहीं आया है।

अमेरिकी नियम नहीं हैं स्पष्ट

अमेरिकी नियम नहीं हैं स्पष्ट

अमेरिकी नियम यह स्पष्ट नहीं करते कि रिसर्च में कंपनियां कितने जानवरों पर प्रयोग कर सकती हैं, इसे वैज्ञानिकों पर छोड़ा जाता है कि कब और कितने जानवरों पर प्रयोग किया जाएगा। नियमों के इस लूपहोल का ही फायदा कंपनियां उठाती हैं और अंधाधुंध प्रयोगों में निर्दोष जानवरों की जान गंवाती पड़ती है। आपको बता देंकि न्यूरालिंक एक ऐसा दिमाग में लगने वाला चिप बना रही है जिससे लगवाग्रस्त हो चुके लोगों को दोबारा चलने में मदद मिल पाएगी। इसके साथ ही इससे अन्य न्यूरोलॉजिकल कमियां भी दूर हो सकेंगी।

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