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Donald Trump New US Map: कनाडा, वेनेजुएला और ग्रीनलैंड बना अमेरिका का हिस्सा? ट्रंप ने जारी किया नया नक्शा

Donald Trump New US Map: डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनते ही वैश्विक राजनीति में एक अभूतपूर्व भूचाल आ गया है। ट्रंप ने हाल ही में एक नया विवादित मानचित्र जारी किया है, जिसमें कनाडा, वेनेजुएला और ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा दिखाया गया है। यह कदम न केवल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के सिद्धांतों का उल्लंघन है, बल्कि कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की हालिया चीन यात्रा के प्रति ट्रंप की तीखी नाराजगी को भी दर्शाता है।

इसके साथ ही, वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के निजी संदेशों को सार्वजनिक करना ट्रंप की उस आक्रामक 'अमेरिका फर्स्ट' नीति का हिस्सा है, जिसने पूरी दुनिया को युद्ध और अस्थिरता की कगार पर खड़ा कर दिया है।

Donald Trump New US Map

यूरोप के नेताओं की मौजूदगी में नक्शे पर चर्चा

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा साझा की गई ओवल ऑफिस की तस्वीर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़ा विवाद बन गई है। इस तस्वीर में कीर स्टार्मर और इमैनुएल मैक्रों जैसे नाटो नेताओं की उपस्थिति में पीछे टंगे नक्शे पर ग्रीनलैंड को अमेरिकी ध्वज के रंगों में रंगा गया है। यह न केवल डेनमार्क की क्षेत्रीय अखंडता का अपमान माना जा रहा है, बल्कि यूरोपीय सहयोगियों की संप्रभुता पर भी एक तीखा कटाक्ष है। ट्रंप का यह 'नक्शा विवाद' दर्शाता है कि वे पारंपरिक राजनयिक मर्यादाओं के बजाय आक्रामक राष्ट्रवाद को प्राथमिकता दे रहे हैं। रणनीतिक रूप से, यह नाटो देशों को यह संदेश देने की कोशिश है कि अमेरिका अब वैश्विक सीमाओं को अपनी सुरक्षा और हितों के अनुसार फिर से परिभाषित करने में संकोच नहीं करेगा। इसने सहयोगियों के बीच भरोसे की कमी और भविष्य के संबंधों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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ग्रीनलैंड की बर्फीली जमीन पर अमेरिकी झंडा

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा साझा की गई 'ग्रीनलैंड 2026' की तस्वीर केवल एक सोशल मीडिया पोस्ट नहीं, बल्कि उनके "अमेरिका फर्स्ट" एजेंडे का एक आक्रामक विस्तार है। इस तस्वीर में ट्रंप, जेडी वेंस और मार्को रुबियो के साथ ग्रीनलैंड की बर्फीली जमीन पर अमेरिकी झंडा गाड़ते दिख रहे हैं, जो सीधे तौर पर डेनमार्क की संप्रभुता को चुनौती देता है।

ट्रंप का तर्क है कि आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को रोकने के लिए ग्रीनलैंड का अमेरिका के पास होना रणनीतिक रूप से अनिवार्य है। 2026 की समय-सीमा तय करके उन्होंने यह संकेत दिया है कि वे इसे केवल एक विचार नहीं, बल्कि अपने कार्यकाल का एक प्रमुख भू-राजनीतिक लक्ष्य मानते हैं। यह कदम नाटो सहयोगियों के बीच तनाव बढ़ा सकता है, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को फिर से परिभाषित करने की कोशिश है।

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फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों का निजी संदेश किया शेयर

वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का एक निजी संदेश साझा किया है, जो ग्रीनलैंड विवाद के बीच वैश्विक कूटनीति की जटिलता को उजागर करता है। इस संदेश में मैक्रों ने सीरिया और ईरान जैसे मुद्दों पर सहयोग की बात तो की, लेकिन ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप के कदमों पर अपनी स्पष्ट उलझन व्यक्त की है।

मैक्रों ने इस गतिरोध को सुलझाने और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा के लिए पेरिस में एक G7 बैठक आयोजित करने का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने इस बैठक के हाशिये पर यूक्रेन, रूस और विशेष रूप से डेनमार्क के प्रतिनिधियों को आमंत्रित करने की योजना साझा की, ताकि ग्रीनलैंड जैसे संवेदनशील विषयों पर संवाद हो सके। ट्रंप द्वारा इस निजी बातचीत को सार्वजनिक करना उनके आक्रामक कूटनीतिक अंदाज को दर्शाता है, जिससे यूरोपीय सहयोगियों के साथ तनाव और बढ़ सकता है।

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