डोनाल्ड ट्रंप का H-1B Visa पर यूटर्न? इन प्रोफेशनल्स को छूट देनी की तैयारी
H-1B Visa: अमेरिका के ट्रंप प्रशासन का हालिया फैसला भारतीय प्रोफेशनल्स और आईटी इंडस्ट्री के लिए चिंता का सबब बन गया है। H-1B वीजा, जिसे अब तक भारतीय टैलेंट के लिए सबसे बड़ा रास्ता माना जाता था, उसकी फीस अचानक कई गुना बढ़ा दी गई है।
नए नियमों के तहत कंपनियों को अब एक कर्मचारी के लिए 1 लाख डॉलर यानी करीब 88 लाख रुपये तक चुकाने पड़ सकते हैं। इससे भारतीय कंपनियों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि कुछ सेक्टरों, खासकर मेडिकल प्रोफेशनल्स, को इस नियम से छूट मिल सकती है।

मेडिकल सेक्टर के लिए राहत की उम्मीद
हालांकि, इस फैसले से डॉक्टरों और मेडिकल रेजिडेंट्स को राहत मिलने के संकेत मिले हैं। व्हाइट हाउस प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने कहा कि प्रोक्लेमेशन में छूट का प्रावधान है, जिसमें मेडिकल पेशेवर शामिल हो सकते हैं। अमेरिकी मेडिकल संगठनों ने चेतावनी दी थी कि भारी फीस से विदेशी डॉक्टरों का आना बंद हो जाएगा, खासकर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में जहां डॉक्टरों की भारी कमी है। अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष बॉबी मुक्कामला ने इसे मरीजों की जिंदगी पर सीधा खतरा बताया है।
भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है
आईटी इंडस्ट्री के लिए यह फैसला किसी बड़े झटके से कम नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक, कुल H-1B वीजा धारकों में 71% भारतीय हैं और इनमें से अधिकांश आईटी सेक्टर में काम करते हैं। इंफोसिस, विप्रो, कॉग्निजेंट और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) जैसी दिग्गज कंपनियां इसी वीजा प्रोग्राम के जरिए हर साल हजारों इंजीनियर अमेरिका भेजती हैं। लेकिन अब नई फीस व्यवस्था के तहत, हर तीन साल की वीजा अवधि पर कंपनियों को करोड़ों रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना होगा। नतीजतन, भारत की 250 अरब डॉलर की आईटी इंडस्ट्री पर इसका सीधा और गंभीर असर पड़ना तय माना जा रहा है।
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शेयर बाजार और ग्लोबल प्रभाव
रॉयटर्स के मुताबिक, जैसे ही यह घोषणा हुई, अमेरिका में लिस्टेड भारतीय आईटी कंपनियों के शेयर 2% से 5% तक गिर गए। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर नियम कड़ाई से लागू हुआ तो भारतीय टैलेंट की मौजूदगी अमेरिका में कम हो सकती है, जिससे वहां की टेक इंडस्ट्री पर भी असर पड़ेगा। हालांकि, ट्रंप प्रशासन का दावा है कि इस कदम से अमेरिका को 100 अरब डॉलर से ज्यादा की आमदनी होगी, जो राष्ट्रीय कर्ज कम करने और टैक्स घटाने में मदद करेगी।
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