डोकलाम विवाद: भूटान पीएम ने कहा, हमारी सीमा में नहीं है कोई चीनी गांव, भारत के लिए खतरे की घंटी?

भूटान के पीएम लोटे शेरिंग ने कहा है कि बीजिंग का उच्च ऊंचाई वाले पठार पर विवाद का समाधान खोजने में समान अधिकार है। भूटान के प्रधानमंत्री के इस ताजा बयान ने भारत की चिंता बढ़ा दी है।

Doklam Standoff

Image: Oneindia

डोकलाम में भारतीय और चीनी सैनिकों के विवाद 6 साल बाद भूटान के प्रधानमंत्री लोटे शेरिंग ने इस बात से इनकार किया है कि चीन ने उनकी सीमा में 10 गांव बना लिए हैं। बेल्जियम के दैनिक ला लिबरे के साथ एक साक्षात्कार में पीएम लोटे शेरिंग ने कहा, 'जिन गांवों के बारे में खबरें आई थीं, वो चीन में नहीं हैं। इसे लेकर मीडिया में काफी खबरें आ रही हैं। लेकिन ये बड़ी बात नहीं है क्योंकि ये सच नहीं हैं। हमनें साफ कहा है कि भूटान की सीमा में कोई घुसपैठ नहीं हुई है। यह एक अंतरराष्ट्रीय सीमा है और हम जानते हैं कि वास्तव में हमारा क्या है।'

अपने ही बयान से पलटे भूटान पीएम

भूटान के पीएम ने ये भी कहा है कि चीन का डोकलाम का समाधान खोजने में समान अधिकार है। प्रधानमंत्री लोटे शेरिंग ने कहा कि डोकलाम विवाद का निपटारा करना सिर्फ भूटान से नहीं हो सकता। इसमें तीन देश हैं। कोई छोटा या बड़ा देश नहीं बल्कि सभी बराबर हैं। सभी की एक-तिहाई जिम्मेदारी है। भूटानी पीएम ने कहा कि हम डोकलाम विवाद का हल निकालने के लिए तैयार हैं। जैसे ही बाकी के दो पक्ष तैयार हो जाएंगे, हम इस पर चर्चा करेंगे। पीएम शेरिंग का ये बयान 2019 के उस बयान से अलग है जिसमें उन्होंने कहा था कि मौजूदा ट्राई-जंक्शन के पास एकतरफा कुछ भी नहीं करना चाहिए।

भारत के लिए चिंताजनक

आपको बता दें कि भूटान भारत के लिए सबसे अहम देशों में से एक है। भारत से भूटान की करीबी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि थिम्पू का चीन के साथ अब तक राजनयिक संबंध नहीं है। हालांकि चीन, लगातार भूटान को अपने प्रभाव में लेने की कोशिश करता रहा है। ऐसे में भूटान के पीएम का बयान भारत के लिए बेहद चिंताजनक माना जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने कि, 'भूटान के प्रधानमंत्री के बयान से पता चलता है कि वह अपनी साख बचाने के लिए दावा कर रहा है कि जिन क्षेत्रों पर चीन ने चुपके से कब्जा कर लिया है, वे भूटानी क्षेत्र नहीं हैं।' हालांकि उन्होंने आशंका जताते हुए कहा कि ये भूटानी क्षेत्रों पर चीनी दावे को और बढ़ा सकता है।

चीन ने डोकलाम के पास बनाया गांव

8 महीने पहले आई सैटेलाइट तस्वीरों में इसका खुलासा हुआ था कि चीन ने डोकलाम से 9 किमी दूर भूटान के अमो चू घाटी में गांव बसा लिया है। भूटानी इलाके में मौजूद इस गांव का नाम चीन ने पंगडा रखा है। बीते साल नवंबर महीने में इस गांव के निर्माण की तस्वीरें आई थीं। इन तस्वीरों में लगभग हर घर के आगे कार खड़ी नजर आ रही हैं। डोकलाम के पास भारत, चीन, भूटान तीनों देशों की सीमाएं मिलती हैं। उस ट्राई-जंक्शन को लेकर भारत-चीन के बीच विवाद चलता आ रहा है।

डोकलाम पर चीन करता है दावा

यह ट्राइजंक्शन प्वाइंट बटांग ला नामक स्थान पर स्थित है। चीन की चुम्बी घाटी बटांग ला के उत्तर में स्थित है, भूटान दक्षिण और पूर्व में और भारत (सिक्किम) पश्चिम में स्थित है। चीन चाहता है कि ट्राई-जंक्शन को बटांग ला से लगभग 7 किमी दक्षिण में माउंट जिपमोची नामक चोटी पर स्थानांतरित किया जाए। चीन भूटान के डोकलाम क्षेत्र पर दावा करता है और इसके बदले में वह भूटान को एक दूसरा विवादित क्षेत्र देने को तैयार है। अगर ऐसा होता, तो पूरा डोकलाम पठार कानूनी रूप से चीन का हिस्सा बन जाएगा।

डोकलाम भारत के लिए क्यों अहम

2017 में हुए डोकलाम विवाद के बाद से चीन अमो चू घाटी में गांव और रोड कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी कर रहा है। यह घाटी चीनी कब्जे वाले भूटान के सबसे बड़े इलाके से करीब 30 किमी दक्षिण में है। इस इलाके पर चीन ने पिछले साल कब्जा किया था। इन एक्टिविटी की वजह से सिक्किम में भारतीय सुरक्षा बलों की चिंता बढ़ गई है। अमो चू के आसपास निर्माण की वजह से चीनी आर्मी रणनीतिक तौर पर अहम डोकलाम पठार तक आसानी से पहुंच सकती है। डोकलाम, भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर जिसे चिकन नेक के नाम से भी जाना जाता है, के बेहद करीब है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर पूर्वोत्तर के राज्यों को बाकी देश से जोड़ता है।

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