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डेनमार्क में इजराइली दूतावास के पास विस्फोट के पीछे 2 स्वीडिश किशोर? लगे आतंकवाद के आरोप

पिछले महीने डेनमार्क के कोपेनहेगन में इजराइली दूतावास के पास हुए विस्फोटों ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। इस घटना के बाद 17 और 19 साल के दो स्वीडिश किशोरों पर आतंकवाद से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। आरोपों के तहत, इन किशोरों को हिरासत में रखने की अनुमति मिली है। यह गिरफ्तारी उस समय हुई जब अक्टूबर की शुरुआत में दूतावास के पास दो हैंड ग्रेनेड फेंके गए थे।

विस्फोट राजनयिक मिशन से लगभग 100 मीटर की दूरी पर हुआ, जिससे पास की एक इमारत को मामूली नुकसान पहुंचा। हालांकि, इस विस्फोट में किसी को भी चोट नहीं आई। डेनिश मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रारंभिक आरोपों में कहा गया है कि इन किशोरों का उद्देश्य दूतावास के आसपास के व्यक्तियों को नुकसान पहुंचाना था।

Israeli Embassy

हिरासत में लिए गए दो संदिग्ध
दोनों संदिग्धों को कोपेनहेगन के केंद्रीय स्टेशन पर हिरासत में लिया गया। गिरफ्तारी के दौरान ली गई एक तस्वीर में एक किशोर को एक सफेद हजमत सूट में दिखाया गया, जिसे आमतौर पर संभावित सबूतों को सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। किशोरों ने किसी भी प्रकार के गलत काम से इनकार किया है।

संगठित अपराध में किशोरों की बढ़ती भूमिका
डेनिश और स्वीडिश अधिकारियों ने हाल ही में देखा है कि संगठित अपराध गिरोह डेनमार्क में आपराधिक गतिविधियों के लिए स्वीडिश किशोरों की भर्ती कर रहे हैं। इन किशोरों को सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क किया जाता है और उनकी नाबालिग उम्र के कारण वे कम पुलिस निगरानी में रहते हैं, जिससे वे अक्सर अभियोजन से बच जाते हैं। हाल ही में एक 16 वर्षीय स्वीडिश किशोर को डेनमार्क में हत्या की योजना बनाने के आरोप में एक साल के लिए किशोर सुविधा में भेजा गया है।

डेनमार्क-स्वीडन के बीच बढ़ता सहयोग
इजराइली दूतावास के पास हुए विस्फोट और संगठित अपराध में किशोरों की बढ़ती संलिप्तता के कारण डेनिश और स्वीडिश अधिकारियों के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। यह घटनाएं सीमा पार आपराधिक गतिविधियों में किशोरों की भागीदारी को लेकर बढ़ती चिंता को दर्शाती हैं, और संगठित अपराध को रोकने के लिए नए कदम उठाने की मांग करती हैं।

यह घटना बताती है कि संगठित अपराध में किशोरों की भूमिका को गंभीरता से समझने और उनसे निपटने के लिए डेनमार्क और स्वीडन को मिलकर काम करने की आवश्यकता है। आतंकवाद के आरोपों में इन किशोरों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही चल रही है और मामले की जांच के लिए सबूत एकत्र किए जा रहे हैं। उम्मीद की जा सकती है कि इस घटना से मिले सबक के आधार पर दोनों देश नाबालिगों के संगठित अपराध में भागीदारी को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाएंगे।

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