Defence Budget 2023: पनडुब्बी, ड्रोन, जेट्स...नये हथियारों के लिए खुलेगा खजाना, कैसा रहेगा रक्षा बजट?

पिछले कुछ सालों में चीन के साथ संघर्ष काफी बढ़ गया है और आने वाले वक्त में इस संघर्ष में और इजाफा होगा। खासतौर पर हिंद महासागर पर भारत अपना ध्यान और ज्यादा बढ़ाएगा।

Defence Budget 2023

Defence Budget 2023: चीन की आक्रामकता को काउंटर करने के लिए भारत सरकार के इस साल के बजट में डिफेंस पर खास तौर पर ध्यान रखे जाने की संभावना है। पिछले कुछ सालों से एलएसी पर चीन के साथ संघर्ष की स्थिति में इजाफा हुआ है और हालिया लीक लद्दाख पुलिस की स्पेशल रिपोर्ट में भी कहा गया है, कि आने वाले वक्त में भारत और चीन के सैनिकों के बीच संघर्ष में तेजी आ सकती है। लिहाजा, वित्तमंत्री जब लोकसभा में बजट को पेश करेंगी, तो नये हथियारों के लिए स्पेशल फंड की घोषणा हो सकती है।

बजट में नये हथियारों पर ध्यान

बजट में नये हथियारों पर ध्यान

नए वित्तीय वर्ष में पनडुब्बियों, हल्के टैंकों और लड़ाकू विमानों जैसे बड़े-दाम वाले हथियारों के पूंजी अधिग्रहण कार्यक्रमों का ऐलान हो सकता है। इसके साथ ही, डिफेंस फोर्स एंड इंडस्ट्री आगामी वार्षिक बजट में बड़े आवंटन की उम्मीद कर रहा है। दिप्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा और सुरक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों ने कहा है, कि सेना की तीनों सेवाओं ने रक्षा मंत्रालय के सामने अपनी प्रस्तुतियों में और ज्यादा फंड की मांग की है, जिसे वित्त मंत्रालय के सामने रखा गया है। लिहाजा, इस बात की उम्मीद की जा रही है, कि इस बार के बजट में सेना और हथियारों के आधुनिकीकरण कार्यक्रम के लिए एक गैर-व्यपगत निधि की घोषणा की जा सकती है। इसके साथ ही भारत के निजी क्षेत्र की डिफेंस कंपनियां भी भारत सरकार ने रक्षा क्षेत्र में पूंजीगत व्यय के लिए एक उच्च बजटीय आवंटन की तलाश कर रहा है, क्योंकि यह ज्यादा एक्विजीशन प्रोग्राम के तौर पर भविष्य में सामने आने वाला है।

पेंशन आवंटन में होगी भारी बढ़ोतरी?

पेंशन आवंटन में होगी भारी बढ़ोतरी?

सूत्रों ने कहा है, कि इसमें कोई संदेह नहीं है, कि वन रैंक वन पेंशन योजना में संशोधन को देखते हुए पेंशन आवंटन में भारी बढ़ोतरी की जा सकती है, जिसके परिणामस्वरूप 8,450 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक व्यय होगा, इसके अलावा तीन साल की अवधि में 23,638 करोड़ रुपये की बकाया राशि का भुगतान भी होगा। सरकार ने 2022-23 के बजट में नए रक्षा उपकरणों की खरीद के लिए कैपिटल ऑउटले को 1.38 लाख करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से बढ़ाकर 1.52 लाख करोड़ रुपये कर दिया था।

हथियारों की खरीद के लिए ज्यादा फंड

हथियारों की खरीद के लिए ज्यादा फंड

भारत सरकार के सूत्रों ने कहा, कि प्रोजेक्ट 75I, जिसमें रणनीतिक साझेदारी मॉडल के तहत छह नई पनडुब्बियों का निर्माण शामिल है, वो भारतीय नौसेना के लिए एक बड़ी कीमत वाली वस्तु है, उसके लिए भी एक्स्ट्रा फंड की घोषणा की जा सकती है। अभी तक की रिपोर्ट के मुताबिक, छह पनडुब्बियों के निर्माण के लिए भारत सरकार ने जो बजट रखा है, उस बजट में पनडुब्बियों के निर्माण के लिए कोई कंपनी तैयार नहीं हो पा रही है, लिहाजा पनडुब्बी निर्माण के लिए बजट में बढ़ोतरी किए जाने की संभावना है। वहीं, सूत्रों ने कहा, कि सरकार की योजना अगले वित्त वर्ष के भीतर अनुबंध पर हस्ताक्षर करने की प्रक्रिया को पूरा करने और 27 राफेल समुद्री लड़ाकू विमानों की खरीद पर जोर देने की है। भारत सरकार के ये कार्यक्रम अरबों डॉलर के होने वाले हैं, लेकिन ये इतने जरूरी हैं, कि सरकार इन्हें खरीदने में देर नहीं कर सकती है।

नौसैनिकों के उपकरणों पर जोर

नौसैनिकों के उपकरणों पर जोर

हालांकि, सूत्रों ने स्वीकार किया है, कि प्रोजेक्ट-75I पर अटके रहने की स्थिति में सरकार ज्यादा से ज्यादा स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों के ऑर्डर के लिए एक बैक अप प्लान भी तैयार कर रही है। सूत्रों ने कहा है, कि नौसेना इस साल विशेष नौसैनिक ड्रोन की खरीद के लिए एक कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर करेगी, इसके अलावा नए फ्रिगेट और डिस्ट्रॉयर जैसी चल रही परियोजनाओं के लिए पिछले भुगतान कार्यक्रम को पूरा करेगी। भारतीय वायु सेना के दृष्टिकोण से, सूत्रों ने कहा कि, अतिरिक्त लड़ाकू विमान एजेंडे में सबसे ऊपर है। सरकार को यह तय करना है, कि वह एमआरएफए (मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट) के लिए जाना चाहती है, या अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों के लिए फ्रांसीसी फर्म डसॉल्ट एविएशन से सीधे बात करना चाहती है।

आधुनिकीकरण पर भी सरकार का जोर

आधुनिकीकरण पर भी सरकार का जोर

तत्काल बड़े खर्च के बारे में पूछे जाने पर, भारत सरकार के सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया, कि भुगतान अन्य मिसाइलों और ड्रोन प्रणालियों की खरीद के अलावा एस-400 वायु रक्षा प्रणालियों और अतिरिक्त ब्रह्मोस मिसाइलों को ले जाने के लिए कुछ सुखोई को अपग्रेड किए जाने की योजना है और इसके लिए सरकार अलग से फंड का ऐलान कर सकती है। सूत्रों ने कहा, कि सेना नए वित्तीय वर्ष के दौरान नई आर्टिलरी गन सिस्टम और बड़ी संख्या में ड्रोन की खरीदी के लिए बजट का आवंटन कर सकती है। उन्होंने बताया, कि सरकार की कोशिश डिफेंस सेक्टर के लिए आवंटित बजट को पूरी तरह से खर्च करने के लिए भी योजना बना रही है। वहीं, दिप्रिंट ने ये भी दावा किया है, कि सैन्य उपकरणों की आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को चालू रखने के लिए एक गैर-व्यपगत निधि (non-lapsable fund) जरूरी है। रक्षा प्रतिष्ठान के एक सूत्र ने बताया, कि "कई बार, भुगतान शेड्यूल के कारण और डिलीवरी में देरी होने के कारण पूरा आवंटित पैसा खर्च नहीं होता है। इसका मतलब यह नहीं है, कि पैसे की जरूरत नहीं है। एक गैर-व्यपगत कोष यह सुनिश्चित करेगा, कि आधुनिकीकरण की प्रक्रिया सुसंगत चलती रहे।"

प्राइवेट सेक्टर पर सरकार का फोकस

प्राइवेट सेक्टर पर सरकार का फोकस

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहां बड़ी कंपनियां सरकार से ज्यादा से ज्यादा रक्षा कॉन्ट्रैक्ट मिलने पर नजर गड़ाए हुई हैं, वहीं छोटी कंपनियां उम्मीद कर रही हैं, कि सरकार अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) को आगे बढ़ाएगी। ग्रेन रोबोटिक्स के सीईओ और विंग कमांडर साई मल्लेला (सेवानिवृत्त) ने कहा, कि "हम खुश हैं, कि रक्षा में रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर खास फोकस दिया जा रहा है। रक्षा अनुसंधान में निजी उद्योग को आमंत्रित करने से भारत और रक्षा निर्यात करने वाले देशों के बीच प्रतियोगता में एक समतल मैदान का निर्माण होगा।" एक्सपर्ट्स का कहना है, कि भारत सरकार का लक्ष्य आने वाले सालों में बड़े पैमाने पर रक्षा उपकरणों को बेचना है, लिहाजा रिसर्च एंड डेवलपमेंट्स पर खर्च करना अत्यंत ही जरूरी है। वहीं, ऑप्टिमाइज्ड इलेक्ट्रोटेक के सह-संस्थापक और एमडी संदीप शाह ने कहा, कि वैश्विक मंदी के डर के बीच, भारत विकास करने के लिए तैयार है।

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