अमेरिका में गर्भपात कानून पर इतना हंगामा क्यों है? सुप्रीम कोर्ट का फैसला लीक, देशभर में भारी प्रदर्शन

अमेरिका में सबसे पहले गर्भपात को लेकर विवाद साल 1973 में शुरू हुआ था, जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की 9 सदस्यीय बेंच ने 7-2 के बहुमत गर्भपात कानून के खिलाफ फैसला सुनाया था।

वॉशिंगटन, मई 04: अमेरिका में काफी ज्यादा संवेदनशील माने जाने वाले अबॉर्शन कानून को लेकर भारी विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं और हजारों की संख्या में लोग अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं। अमेरिका के लिए ये मुद्दा पिछले 50 सालों से काफी संवेदनशील बना हुआ है और एक बार फिर से इस कानून को लेकर प्रदर्शन किए जा रहे हैं। आखिर ये मुद्दा अचानक फिर से क्यों उठा है, अमेरिकी सरकार का रूख क्या है, सुप्रीम कोर्ट का फैसला कैसे लीक हो गया और अमेरिकी नागरिक क्या चाहते हैं, आइये तमाम बातें जानते हैं।

अभी प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं?

अभी प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं?

अमेरिका में पिछले 50 सालों से गर्भपात कानून को लेकर विवाद बना रहा है और अमेरिकी समाज भी गर्भपात करवाने के लिए कानून होना चाहिए या नहीं होना चाहिए, इस मुद्दे पर दो हिस्सों में बंटा रहा है। और इस वक्त भी सुप्रीम कोर्ट में गर्भपात कानून से जुड़े एक मुद्दे पर सुनवाई चल रही है और पिछले एक साल से लगातार गर्भपात कानून का मुद्दा लगातार सुर्खियों में बना हुआ है और अब कुछ ही दिनों में गर्भपात कानून पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाला है, लेकिन इससे पहले की सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुनाता, कोर्ट के जजों का ही फैसला लीक हो गया। अमेरिका की 'पोलिटिको' नाम की एक खोजी वेबसाइट ने अमेरिकी जजों के फैसले को लीक कर दिया और फिर पूरा अमेरिका सुलग उठा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले में क्या है?

सुप्रीम कोर्ट के फैसले में क्या है?

'पोलिटिको' वेबसाइट ने दावा किया है कि, कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के 9 में से 5 जजों ने गर्भपात कानून के पक्ष में अपना फैसला दिया है, जबकि चार जजों ने कानून के खिलाफ फैसला दिया है। यानि, इस कानून को लेकर 9 सदस्यीय जजों की टीम भी बंटी नजर आ रही है। अगर 'पोलिटिको' का दावा सही है, तो अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मतलब ये हुआ, कि गर्भपात करवाना गैर-कानूनी ही रहेगा। जबकि, अमेरिकी की एक बड़ी आबादी का मानना है, कि गर्भपात करवाना उनका मौलिक अधिकार है और सुप्रीम कोर्ट उनसे यह अधिकार नहीं छीन सकता है। वेबसाइट का दावा ये भी है, कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस भी कानून बनाने के समर्थन में हैं। जिसके बाद अमेरिका में गर्भपात पर कानून बनाने का रास्ता खुल जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट का पुराना फैसला क्या था?

सुप्रीम कोर्ट का पुराना फैसला क्या था?

अमेरिका में सबसे पहले गर्भपात को लेकर विवाद साल 1973 में शुरू हुआ था, जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की 9 सदस्यीय बेंच ने 7-2 के बहुमत गर्भपात कानून के खिलाफ फैसला सुनाया था। उस वक्त सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, कि गर्भपात करना महिलाओं का निजी अधिकार है। अमेरिकी कोर्ट ने कहा था, कि गर्भपात करना महिलाओं के लिए उनका मौलिक अधिकार है। इसके बाद साल 1992 में भी अमेरिका में इसी तरह का एक मामला आया और उस वक्त भी सुप्रीम कोर्ट ने गर्भपात कानून के खिलाफ ही फैसला सुनाया था। उस वक्त अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए यहां तक कहा था, कि एक मां गर्भपात करने लिए पूरी तरह से स्वतंत्र है और इसमें किसी भी तरह की दखलअंदाजी नहीं दी जा सकती है। हालांकि, अदालत की तरफ से अपने फैसले में ये भी कहा गया था, कि कोख में जब तक भ्रूण है, तभी तक मां ऐसा कर सकती है, लेकिन एक बार जैसे ही भ्रूण में जीवन आ जाए, उसके बाद सरकार गर्भपात पर कानून बना सकती है।

फिर से क्यों उठा है गर्भपात कानून का मुद्दा?

फिर से क्यों उठा है गर्भपात कानून का मुद्दा?

अमेरिका में गर्भपात कानून को लेकर चूंकी समाज पूरी तरह से शामिल है, लिहाजा ये मुद्दा पूरी तरह से राजनीतिक हो चुका है और रिपब्लिकन पार्टी गर्भपात पर रोक लगाने वाली कानून के समर्थन में है, लिहाजा जिन राज्यो में रिपब्लिकन पार्टी की सरकार है, वहां पर ऐसे कानूनी इंतजामात किए जा रहे हैं, जो गर्भपात को कानूनी दायरे में लाए। रिपब्लिकन पार्टी की सरकार वाली मिसिसिपी राज्य में सरकार ने कानून बनाते हुए 15 हफ्ते से ऊपर के भ्रूण गिराने को गैर-कानूनी घोषित कर दिया है। जिसके बाद राज्य सरकार के इस कानून को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी और इसीलिए सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की एक बेंच इस केस की सुनवाई कर रही है और माना जा रहा है, कि बहुत जल्द गर्भपात कानून पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ सकता है।

पूरे अमेरिका में विरोध प्रदर्शन

पूरे अमेरिका में विरोध प्रदर्शन

वहीं, अब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला लीक होने के बाद अमेरिका के कई शहरों में प्रदर्शन किए जा रहे हैं और मांग की जा रही है। लोगों की मांग है, कि सुप्रीम कोर्ट 1973 में सुनाए गये अपने ही फैसले को ना उलटे। न्यूयॉर्क शहर में गर्भपात-अधिकार रैली के लिए हजारों लोग सड़कों पर निकले, जो सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक था। अमेरिका में चूंकी अगले कुछ महीने में सीनेटर्स के चुनाव होने हैं, लिहाजा ये मुद्दा काफी गर्म हो चुका है।

कई और राज्यों में बन रहे हैं कानून

कई और राज्यों में बन रहे हैं कानून

व्यक्तिगत गर्भपात के अधिकार देने वाले रो बनाम वेड के फैसले को पलटने के लिए सुप्रीम कोर्ट के लीक हुए मसौदे के बीच, ओक्लाहोमा के गवर्नर केविन स्टिट ने मंगलवार को इस विवादास्पद बिल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिसके तहत 6 हफ्ते के बाद के गर्भपात को गैर-कानूनी ठहराता है और 6 हफ्ते के बाद के गर्भपात पर प्रतिबंध लगाता है। ओक्लाहोमा में जो कानून बनाया गया है, वो काफी ज्यादा सख्त हैं और ऐसे करने वाले को गुनहगार ठहराते हुए 10 साल तक की जेल और एक लाख अमेरिकी डॉलर का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, अगर एक मां के जीवन को खतरा है, उसी मेडिकल स्थिति में गर्भपात को मंजूरी दी गई है। ओक्लाहोमा में बने इस कानून ने लोगों के गुस्से को और भड़का दिया है और माना जा रहा है, कि अभी कई और राज्य इस तरह का कानून बनाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट के बाहर प्रदर्शन

सुप्रीम कोर्ट के बाहर प्रदर्शन

पोलिटिको वेबसाइट ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के 98 पन्नों के इस फैसले को लीक कर दिया था, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों की भीड़ सुप्रीम कोर्ट के आगे मौजूद है और सुप्रीम कोर्ट से फैसला फौरन बदलने की मांग की जा रही है। प्रदर्शनकारी यूएस कैपिटल से कोर्टहाउस के बैरिकेडेड के बीच हजारों की तादाद में मौजूद हो गये, और देश भर में गर्भपात के संवैधानिक अधिकार को समाप्त करने के समर्थन और विरोध के लिए जोरदार आवाजें उठाईं। कई दर्जन गर्भपात विरोधी कार्यकर्ताओं ने दिन की शुरुआत में विरोध प्रदर्शनों के दौरान काफी आक्रामक रहे। हालांकि, इस दौरान गर्भपात कानून के समर्थक भी वहां पहुंच गये और उन्होंने भी नारेबाजी शुरू कर दी, जिसमें कहा जा रहा था, कि गर्भपात हिंसा है, बच्चे को मारने के लिए नहीं जन्मा जाता है और गर्भपात उत्पीड़न है, जैसे नारे लगाए जा रहे थे। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने गर्भपात पर कानून बनाने का विरोध किया है और कहा है, कि इससे महिलाओं के अधिकारों का हनन होगा।

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