शरण देने के लिए दलाई लामा ने भारत को कहा शुक्रिया, ताइवान को लेकर जानिए क्या कहा?
तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने उन्हें और उनके अनुयायियों को भारत देश में शरण प्रदान करने के लिए भारत सरकार का बार-बार आभार व्यक्त किया है।
नई दिल्ली, नवंबर 10: तिब्बत के निर्वासित धर्म गुरु दलाई लामा ने भारत को घर देने के लिए शुक्रिया कहा है। इसके अलावा दलाई लामा ने चीन और ताइवान को लेकर भी काफी अहम बयान दिए हैं। दलाई लामा ने बुधवार को कहा कि, वह भारत में रहना पसंद करते हैं क्योंकि ताइवान और चीन के बीच संबंध "काफी नाजुक" हैं।

भारत सरकार का जताया आभार
तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने उन्हें और उनके अनुयायियों को भारत देश में शरण प्रदान करने के लिए भारत सरकार का बार-बार आभार व्यक्त किया है। वहीं, जब दलाई लामा ने ताइवान में रहने को लेकर एक ऑनलाइन वेबसाइट की तरफ से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि, वो ताइवान में नहीं, बल्कि भारत में ही रहना चाहते हैं और भारत में ही रहना पसंद करते हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक दलाई लामा ने यह भी कहा कि, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने की उनकी कोई खास योजना नहीं है।
ताइवान को अपना हिस्सा मानता है चीन
चीन लोकतांत्रिक द्वीप ताइवान को अपने क्षेत्र के रूप में दावा करता है और कहता है कि यदि आवश्यक हुआ, तो इसे बलपूर्वक हासिल कर लिया जाएगा। ताइवान यह कहते हुए चीन का विरोध करता है कि, वह एक स्वतंत्र देश है और चीन की आक्रामकता के सामने अपनी स्वतंत्रता और लोकतंत्र की रक्षा करेगा। ऐसा लगता है कि बीजिंग ने हाल के दिनों में अपनी शत्रुतापूर्ण नीतियों को बढ़ा दिया है, जिसमें रिकॉर्ड संख्या में चीनी सैन्य विमान ताइवान के वायु रक्षा पहचान क्षेत्र के ऊपर से बार-बार उड़ान भर रहे हैं। ताइवान के राडार ने पिछले महीने की शुरुआत में 150 चीनी वायु सेना के विमानों को अपने वायु रक्षा क्षेत्र में प्रवेश करते हुए देखा, जिससे साफ पता चलता है कि, चीन लगातार ताइवान पर दबाव बना रहा है।

कौन हैं दलाई लामा?
आपको बता दें कि, दलाई लामा, तिब्बती बौद्ध परंपरा में एक सर्वोच्च महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं और भारत में एक शरणार्थी का जीवन तब से जी रहे हैं, जब से उन्हें 1959 में एक विद्रोह के बाद तिब्बत से पलायन करना पड़ा था। तिब्बत की स्वायत्तता और तिब्बतियों के धार्मिक अधिकारों सहित तिब्बती संस्कृति की सुरक्षा के लिए चीन के साथ बातचीत के लिए राजनयिक दृष्टिकोण का आह्वान करते हैं। हालांकि, चीन बार बार दलाई लामा को मानने से इनकार करता है। जबकि, दलाई लामा तिब्बत की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
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