दलाई लामा के उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया में चीन सरकार की नहीं हो दखलअंदाजी- अमेरिका की चेतावनी
दलाई लामा चुनने की प्रक्रिया में चीन सरकार की नहीं हो गई दखलअंदाजी- अमेरिका की चेतावनी। China should have no role in choosing the Dalai Lama's successor: US
वाशिंगटन/तिब्बत: तिब्बत पर अतिक्रमण करने वाला चीन अब दलाई लामा के उत्तराधिकारी को लेकर भी खेल करने की फिराक में है। जिसको लेकर अमेरिका ने चीन को सख्त चेतावनी दी है। व्हाइट हाउस ने बयान जारी करते हुए कहा है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया में चीन का कोई दखल नहीं होना चाहिए। अमेरिका ने चीन को चेतावनी उस वक्त की दी है जब दलाई लामा का उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया चल रही है।

चीन को डायरेक्ट चेतावनी
व्हाइट हाउस की तरफ से बयान जारी करते हुए कहा गया है कि तिब्बतियों के धर्मगुरु दलाई लामा के उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया में चीन सरकार की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा है कि 'अमेरिका का मानना है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया में चीन की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए। 25 साल से ज्यादा वक्त से पहले पंचेन लामा के उत्तराधिकारी की प्रक्रिया में बीजिंग का हस्तक्षेप, जिसमें पंचेन लामा को बचपन में गायब करना और चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी की सरकार द्वारा चुने गये उत्तराधिकारी को उनका स्थान देने की कोशिश करना धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन दर्शाता है'

डोनाल्ड ट्रंप की कोशिश
इससे पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल दिसंबर में एक कानून तिब्बती नीति एंड समर्थन कानून 2020 पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें तिब्बत में कॉमर्स मिनिस्ट्री बनाने और एक अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन बनाने की बात की गई है। डोनाल्ड ट्रंप का कहना था कि यह कोशिश सिर्फ इसलिए की जा रही है ताकि आगामी दलाई लामा चुनने की प्रक्रिया में चीन के किसी भी हस्तक्षेप को खत्म किया जा सके। अमेरिका पहले से ही कहता आया है कि दलाई लामा के चयन में चीनी दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दलाई लामा का चुनाव सिर्फ और सिर्फ तिब्बती समुदाय के लोग करें जिसमें चीन का किसी भी तरह से कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। चीन के विरोध के बाद भी अमेरिकी सीनेट ने पिछले सप्ताह इसे पास किया है। इस कानून के तहत तिब्बतियों को उनके धर्म गुरु चुनने में स्वतंत्रता प्रदान करने की व्याख्या की गई है।

दलाई लामा का चुनाव
दरअसल, किसी तिब्बती धर्मगुरु की मौत के बाद उनके उत्तराधिकारी का चुनाव किया जाता है। उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया काफी पेचीदा माना जाता है क्योंकि उत्तराधिकारी का चुनाव वंश के आधार पर या फिर चुनाव के आधार पर नहीं होता है, बल्कि उत्तराधिकारी का चुनाव पुर्नजन्म के आधार पर होता है। माना जाता है कि तिब्बती धर्मगुरु अपने अवतार संबंधी कुछ निशान छोड़ जाते हैं और उसी की मदद से अगले दलाई लामा का चुनाव किया जाता है। संकेतों के आधार पर उन बच्चों की लिस्ट बनाई जाती है, जो धर्मगुरु के अवतार जैसे हों या फिर जिनके बारे में संकेत दिए गये हों। सबसे महत्वपूर्ण बात ये होती है कि धर्मगुरु की मृत्यु के बाद अगले 9 महीने बाद जन्म लेने वाले हर बच्चे पर नजर रखी जाती है।

दलाई लामा पर चीन की चाल
आपको बता दें कि दलाई लामा को लेकर चीन इसलिए परेशान रहता है क्योंकि अगर एक बार दलाई लामा चीन की बातों में गये तो चीन के लिए तिब्बत की समस्या ही खत्म हो जाएगी। पिछले कई सालों से चीन दलाई लामा के अगले अवतार को लेकर दावा करता रहा है। जिसे खुद वर्तमान दलाई लामा खारिज कर चुके हैं। वहीं, तिब्बत की निर्वासित सरकार भी चीनी दावे को खारिज कर चुकी है। दलाई लामा और तिब्बत की निर्वासित सरकार ने कहा था कि अगला दलाई लामा तिब्बत की परंपरा और तिब्बत की नियमों के आधार पर ही चुना जाएगा। वहीं, तिब्बत की सरकार को अमेरिका का पूर्ण समर्थन हासिल है। वहीं, 85 साल के वर्तमान दलाई लामा इस बात का ऐलान कर चुके हैं कि 90 साल का होने के बाद वो इस बात पर फैसला लेंगे कि उनका अगला अवतार होगा या नहीं।












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