इजराइल में कोरोना वायरस की चौथी लहर ने दी दस्तक, तेजी से बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता
नई दिल्ली, 18 अगस्त: बीते साल की शुरूआत के साथ ही शुरू हुआ कोरोना वायरस संक्रमण दुनिया को अभी छोड़ता नहीं दिख रहा है। कुछ देशों में इस समय इसकी दूसरी और तीसरी लहर है तो कई देशों में चौथी लहर ने दस्तक दे दी है। खासतौर से इजराइल में जिस तरह से केस बढ़े हैं और चौथी लहर ने दस्तक दी है। उससे ना सिर्फ इजराइल सरकार बल्कि दुनियाभर में चिंता है। इसकी वजह ये है कि बायोएनटेक/फाइजर की वैक्सीन आपूर्ति बहुत जल्दी इजराइल को मिली थी। इस साल अप्रैल में उसने अपनी 70 प्रतिशत आबादी को वैक्सीन की दोनों डोज लगा दी थीं और अपनी पूरी अर्थव्यवस्था को फिर से खोलने का जश्न मनाया था।

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दुनिया के सबसे अधिक टीकाकरण वाले देशों में से एक इजराइल इन दिनों कोरोना की खतरनाक चौथी लहर का अनुभव कर रहा है। लोग अस्पताल में बेड और बूस्टर शॉट के लिए दौड़ रहे हैं। इजराइल में नए कोरोना मामले मिलने का बीते छह महीने का रिकॉर्ड टूट गया है। ट्रेंड में दिख रहा है कि दूसरी डोज लेने के छह से आठ महीने बाद रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है। इजराइल में नए कोरोना केस में 90 प्रतिशत मामले टीका लगवा चुके 50 साल से ज्यादा के लोगों में हैं। देश के स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि सितंबर की शुरुआत तक कम से कम 5,000 लोगों को अस्पताल के बिस्तरों की आवश्यकता होगी, जिसमें करीब आधे गंभीर हो सकते हैं। इसके साथ ही इजराइल ने 50 साल से अधिक के लोगों को कोरोना वैक्सीन का तीसरा शॉट देना शुरू कर दिया है। सरकार ने ये भी कहा है कि अगर तीसरा डोज भी अप्रभावी साबित होता है, तो फिर लॉकडाउन लगाया जा सकता है।
कई देशों में दिख रही चौथी लहर
इजराइल के अलावा भी दुनिया के कई देशों में डेल्टा कोरोना की चौथी लहर के संकेत मिल रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा कि कोरोना के डेल्टा वेरिएंट ने मिडिल ईस्ट यानी मध्य-पूर्व के देशों में चौथी लहर का रूप ले लिया है और वहां कोरोना वायरस के मामलें में तेज वृद्धि की है। वहीं फ्रांस सरकार ने भी देश में कोरोना महामारी की चौथी लहर आने की बात कहते बुए इसे काबू में करने के लिए कोविड संबंधित गाइडलाइन के सख्ती से पालन के दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
बता दें कि दुनियाभर में अब तक 20 करोड़ से ज्यादा कोरोना के मामले मिल चुके हैं। वहीं संक्रमण से 43 लाख से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। दुनियाभर के भर इससे प्रभावित हैं। वहीं इसका सबसे ज्यादा असर अमेरिका, भारत, ब्राजील, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन पर देखने को मिला है।












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