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प्रकृति से खिलवाड़ पर दिल दहला देने वाली रिपोर्ट, मृत्यु दर में होगी कितनी वृद्धि ? जानिए

नई दिल्ली, 9 अगस्त: प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने की कीमत चुकाने का वक्त आ चुका है। दुनिया को अंदाजा नहीं है कि वह धरती को आग के गोले में बदल चुकी है। ग्लोबल वॉर्मिंग और क्लाइमेट चेंज को लेकर जितनी चर्चा हुई है, उसके प्रति उस हिसाब से जागरुकता की कमी रह गई है। परिणाम इस सदी में ही भुगतना होगा। लैंसेट की एक रिपोर्ट आई है, जो बहुत ही भयावह है। इसमें कहा गया है कि आने वाले समय में रात के समय में तापमान लगातार बढ़ता ही जाएगा, जिससे इंसान को नींद से संबंधित परेशानियां बढ़ेंगी और आखिरकार घर वालों को बुरे दिन देखने पड़ेंगे।

रात के समय गर्मी के चलते उड़ेगी नींद

रात के समय गर्मी के चलते उड़ेगी नींद

इंसान ने प्रकृति के साथ जो खिलवाड़ किया है, उसके नतीजे सामने आने लगे हैं। दि लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ जर्नल में एक रिसर्च प्रकाशित हुआ है, जिसमें आने वाले समय में अत्यधिक गर्मी की वजह से मृत्यु दर बहुत ही ज्यादा बढ़ने की बात कही गई है। शोध के मुताबिक जलवायु परिवर्तन की वजह से सदी के अंत तक धरती पर बहुत ही ज्यादा गर्मी पड़ सकती है और इसका अंजाम मृत्यु दर की वृद्धि के तौर पर देखने को मिलेगा। अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना के शोधकर्ताओं ने बताया है कि रात के वक्त में अत्यधिक गर्मी की वजह से सामान्य नींद में बाधाएं आ सकती हैं।

नींद में कमी के चलते होंगी ये जानलेवा बीमारियां

नींद में कमी के चलते होंगी ये जानलेवा बीमारियां

शोधकर्ताओं का कहना है कि नींद में कमी की वजह से रोग प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान होगा और हृदय रोग, पुरानी बीमारियां, सूजन और मानसिक स्वास्थ्य की स्थितियां बिगड़ेंगी। इसमें पूर्वी एशिया के 28 शहरों के बारे में कहा गया कि 2090 तक रात के समय औसत गर्मी 20.4 से बढ़कर लगभग दोगुनी यानी 39.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाएगी। इसके मुताबिक मृत्यु दर का अनुमान रोजाना के औसत तापमान के मुकाबले कहीं ज्यादा हो सकता है।

दिन के तापमान से रात के औसत तापमान में ज्यादा वृद्धि होगी-रिपोर्ट

दिन के तापमान से रात के औसत तापमान में ज्यादा वृद्धि होगी-रिपोर्ट

शोध का परिणाम इस बात की ओर इशारा करता है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से बढ़ने वाली गर्मी का प्रभाव पेरिस जलवायु समझौते की पाबंदियों के बावजूद बढ़ेगा, जिसका लक्ष्य पूर्व-औद्योगिक स्तरों से ग्लोबल वॉर्मिंग को 2 डिग्री सेल्सियस कम रखने का लक्ष्य है। स्टडी के को-ऑथर और यूनिवर्सिटी ऑफ कैरोलिना के क्लाइमेट साइंटिस्ट युक्वियांग झैंग ने कहा, 'रात में बढ़ते तापमान के जोखिमों को अक्सर नजरअंदाज किया जाता था।' उनके मुताबिक, 'जबकि, हमारे अध्ययन में, हमने पाया है कि हॉट नाइट ऐक्सेस की घटनाएं दैनिक औसत तापमान परिवर्तन की तुलना में अधिक तेजी से होने का अनुमान है।'

रात की गर्मी से मृत्यु दर में 6 गुना वृद्धि की आशंका

रात की गर्मी से मृत्यु दर में 6 गुना वृद्धि की आशंका

शोध से पता चला है कि साल 2100 तक गर्म रातों की आवृत्ति और औसत तीव्रता क्रमशः 30% और 60% से ज्यादा बढ़ जाएगी, जबकि दैनिक औसत तापमान में 20% से कम की वृद्धि होगी। शोधकर्ताओं ने चीन, दक्षिण कोरिया और जापान के 28 शहरों में 1980 से 2015 के बीच ज्यादा गर्मी की वजह से मृत्यु के अनुमानों को दो जलवायु परिवर्तन मॉडलों के आधार पर आकलन किया है, जिसके आधार पर गर्मी बढ़ने की वजह से मृत्यु दर में भारी इजाफे की आशंका जाहिर की गई है। शोधकर्ताओं की टीम का अनुमान है कि 2016 से 2100 के बीच रात के समय ज्यादा गर्मी होने की वजह से मौत के जोखिमों का मामला 6 गुना बढ़ जाएगा। यह गर्मी के समय तापमान में औसत इजाफे से होने वाली मौतों के मुकाबले भयावह रूप से ज्यादा है।

लोगों की जीवन रक्षा के लिए अभी से नीतियां बनाने पर जोर

लोगों की जीवन रक्षा के लिए अभी से नीतियां बनाने पर जोर

इस शोध के एक और ऑथर और चीन के फुडान यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हईडोंग कैन ने कहा, 'भविष्य में जलवायु परिवर्तन का और अधिक और बेहतर स्वास्थ्य जोखिम मूल्यांकन नीति निर्माताओं को बेहतर संसाधन आवंटन और प्राथमिकता निर्धारण में मदद कर सकता है।' उन्होंने ये भी कहा, 'जलवायु परिवर्तन से तापमान में होने वाले इजाफे से स्वास्थ्य जोखिम से निपटने के लिए, हमें लोगों को अनुकूलित करने में मदद करने के लिए कुशल उपाय तैयार करने चाहिए।'(इनपुट-पीटीआई)

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