Explainer: चीनी शेयर बाजार में महातबाही, 3 सालों में डूबे 6 ट्रिलियन डॉलर, बर्बादी के कगार पर कम्युनिस्ट देश?
Chinese stocks have lost $6 trillion in 3 years: एक दिन पहले रिपोर्ट आई थी, कि भारतीय शेयर बाजार ने हांगकांग के शेयर बाजार को पीछे छोड़ दिया है और अब इंडियन स्टॉक एक्सचेंज, दुनिया में चौथा सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज बन गया है।
हांगकांग शेयर बाजार के भारत से पिछड़ने की कई वजहों में सबसे बड़ी वजह ये रही, कि चीनी कंपनियों के शेयर्स बुरी तरह से लगातार गिरते रहे। हालांकि, चीनी शेयरों की इस साल शुरूआत उतनी खराब नहीं रही है, लेकिन 2021 के बाद चीनी शेयर बाजार ने काफी ज्यादा खराब प्रदर्शन किया है और पिछले तीन वर्षों में, चीनी शेयर बाजार को 6 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है।

चीन की शेयर बाजार की दुर्गति
चीनी हैंग सेंग इंडेक्श सिर्फ इस साल अभी तक 10 प्रतिशत से ज्यादा गिर चुका है, जबकि शंघाई कंपोजिट और शेन्ज़ेन कंपोनेंट इंडेक्स क्रमशः 7% और 10% नीचे हैं। लिहाजा, चीनी शेयर बाजार में दुर्गति को देखते हुए निवेशकों में काफी डर बैठ गया है और चीन में निवेश करने से विदेशी निवेशक अब तौबा कर रहे हैं।
गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों ने मंगलवार को एक स्टडी नोट में लिखा है, कि "पिछले तीन साल निस्संदेह चीनी इक्विटी में निवेशकों और बाजार सहभागियों के लिए चुनौतीपूर्ण और निराशाजनक रहे हैं।"
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन, असंख्य समस्याओं से ग्रस्त है। उनमें रियल एस्टेट में रिकॉर्ड गिरावट, अपस्फीति, ऋण, गिरती जन्म दर और सिकुड़ती कार्यबल के साथ-साथ कम्युनिस्ट विचारधारा की तानाशाही, जिसकी चपेट में कई बड़ी कंपनियां आई हैं, जिसने प्राइवेट सेक्टर को परेशान कर दिया है और विदेशी कंपनियों को खौफ में भर दिया है।
एपल इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसे कम्युनिस्ट पार्टी की तानाशाही की वजह से सिर्फ 3 दिनों में 200 अरब डॉलर गंवाने पड़े थे, क्योंकि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चीन के सरकारी दफ्तरों में एपल के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी थी।
स्टॉक मंदी ने चीनी बाजारों को इस साल अब तक दुनिया का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला बाजार बना दिया है। यह सब वॉल स्ट्रीट के रिकॉर्ड-सेटिंग रन और एशिया में जापान के नेतृत्व में वैश्विक शेयर बाजार की रैली की बैकग्राउंड में हो रहा है।
ऐसे संकेत हैं, कि चीनी सरकार को अब बड़ी चिंता होने लगी है। रॉयटर्स ने इस सप्ताह रिपोर्ट दी है, कि बीजिंग ने बैंकों से युआन को बढ़ाने के लिए डॉलर बेचने के लिए कहा है, और ब्लूमबर्ग ने मंगलवार को कहा है, कि सरकार शेयरों को समर्थन देने के लिए सीधे हस्तक्षेप करने की तैयारी कर रही है।
चीनी प्रधान मंत्री ली कियांग ने सोमवार को अधिकारियों को, बाजारों को स्थिर करने के लिए "सशक्त और प्रभावी उपाय" करने का आदेश दिया। लेकिन, सवाल ये हैं, कि क्या निवेशकों का विश्वास बहाल किया जा सकता है?

क्यों बर्बाद हो रहा चीनी शेयर बाजार?
बहुत साधारण भाषा में और संक्षेप में समझें, तो निवेशक स्थायी आर्थिक सुधार को बढ़ावा देने के लिए बीजिंग की ओर से प्रभावी नीतियों की कमी को लेकर चिंतित हैं। इसके अलावा, निवेशकों में डर है, कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के फैसले, उन्हें भारी नुकसान में डाल सकते हैं।
2023 में चीन की अर्थव्यवस्था 5.2% बढ़ी। यह 1990 के बाद से विस्तार की सबसे धीमी गति थी। अर्थशास्त्रियों को व्यापक रूप से उम्मीद है, कि इस वर्ष चीन की अर्थव्यवस्था की वृद्धि और धीमी होकर करीब 4.5% तक पहुंच जाएगी और इस साल की दूसरी छमाही में ग्रोथ रेट 4 प्रतिशत से भी नीचे चली जाएगी।
हालांकि, लोग सोच सकते हैं, कि 4 प्रतिशत से ऊपर का ग्रोथ रेट एक अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा है, लेकिन चीन के संदर्भ में ये काफी खराब इसलिए है, क्योंकि पिछले कम से कम 3 दशकों में चीन की अर्थव्यवस्था लगातार 10 प्रतिशत से ऊपर रही है और अब इसके 4 प्रतिशत तक गिरने का अनुमान है, लिहाजा समझा जा सकता है, कि चीनी अर्थव्यवस्था में कैसा हाहाकार मचा हुआ है।
विश्लेषकों का कहना है, कि चीन अभी भी अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर कर सकता है, लेकिन इसके लिए उसे अपनी आक्रामक नीतियों को त्यागना होगा, लेकिन क्या चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ऐसा करेगी?
रेटिंग एजेंसी नोमुरा के विश्लेषकों ने सोमवार देर रात एक रिसर्च नोट में कहा, "अर्थव्यवस्था पर बीजिंग के नीतिगत रुख को लेकर भ्रम बढ़ रहा है।"
नोमुरा ने कहा, कि "चीनी (केंद्रीय बैंक) ने पिछले सप्ताह अपनी बेंचमार्क उधार दरों में अपेक्षित कटौती नहीं की। शीर्ष अधिकारियों की टिप्पणियों से पता चलता है, कि बीजिंग बढ़ते दीर्घकालिक जोखिमों की कीमत पर अल्पकालिक विकास के लिए तैयार नहीं है।"
पिछले हफ्ते, पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (पीबीओसी) ने अपनी मध्यम अवधि की ऋण सुविधा दर को स्थिर रखा, बाजार की उम्मीदों के विपरीत, कि वह अगस्त के बाद अपनी पहली कटौती करेगा। सोमवार को, केंद्रीय बैंक ने अपनी ऋण प्रधान दर - एक प्रमुख ब्याज दर जो मॉरगेज को प्रभावित करती है - उसमें भी बदलाव नहीं किया, जिससे कटौती की उम्मीदें और भी कम हो गईं।
शेयर बाजार में क्रैश पर क्या कर रहा चीन?
सिन्हुआ की तरफ से जारी एक रीड-आउट के मुताबिक, प्रधानमंत्री ली, जिन्होंने सोमवार को कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता की थी, उन्होंने शेयर बाजार को बढ़ावा देने और लिक्विडिटी में सुधार के लिए कार्रवाई करने की कसम खाई है। हालांकि, इसमें विस्तार से नहीं बताया गया, कि वो उपाय क्या होंगे।
लेकिन उसी दिन, अज्ञात स्रोतों का हवाला देते हुए रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि सरकारी स्वामित्व वाले बैंकों ने चीनी करेंसी युआन का समर्थन करने के लिए कदम उठाया है, ताकि चीनी शेयरों में गिरावट के कारण मुद्रा को बहुत तेजी से गिरने से रोका जा सके।
ब्लूमबर्ग की मंगलवार की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि चीनी अधिकारी शेयर बाजार में आ रही तेज गिरावट को कम करने के लिए लगभग 2 ट्रिलियन युआन (282 अरब डॉलर) सीधे झोंकने की योजना बना रहे हैं।
यह फंड हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज के जरिए चीन में लिस्टेट कंपनियों के शेयर खरीदेगा। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने मुख्य भूमि चीनी शेयरों में निवेश के लिए कम से कम 300 बिलियन युआन (42 बिलियन डॉलर) का स्थानीय फंड भी निर्धारित किया है।
चीन में लोगों का फूटा गुस्सा
शेयर बाजार की गिरावट से चीनी सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है, और कई लोगों ने नियामकों से गिरावट को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने का आह्वान किया है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चीन के शेयर बाजारों में 22 करोड़ से ज्यादा व्यक्तियों ने निवेश किया हुआ है, और ये लोग कुल निवेशक आधार का 99% हिस्सा हैं। मंगलवार को चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो पर "बाज़ार में गिरावट" और "चीन के शेयर बाज़ार बचाव" से संबंधित विषय ट्रेंड कर रहे थे।
यहां तक कि आम तौर पर आधिकारिक रुख अपनाने वाले प्रमुख प्रभावशाली लोगों ने भी सरकार से छोटे निवेशकों को बचाने के लिए तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के भोंपू अखबार ग्लोबल टाइम्स के पूर्व प्रधान संपादक हू ज़िजिन ने सोमवार को वीबो पर पोस्ट किया, "मैं आज के शेयर बाजार के प्रदर्शन से दुखी हूं।"
उन्होंने लिखा है, कि "शेयर बाज़ार की लगातार गिरावट का असर पूंजी बाज़ार से आगे बढ़ गया है, और इसका संपूर्ण अर्थव्यवस्था में विश्वास और व्यापक सामाजिक विश्वास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। मैं व्यक्तिगत रूप से मानता हूं, कि यह एक जरूरी मुद्दा है जिसे वित्तीय जोखिमों को रोकने और सामाजिक आत्मविश्वास को बढ़ावा देने के लिए संबोधित करने की आवश्यकता है।''
हू ने कहा, कि पिछले साल जून में शेयर बाजार में निवेश शुरू करने के बाद से उन्हें अब तक कुल 70,000 युआन (9,857 डॉलर) से ज्यादा का नुकसान हुआ है।
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