चीन ने समुद्र में बनाए टापू और तैनात किए विनाशक हथियार, शी जिनपिंग के खतरनाक मंसूबे से खलबली

चीन के ये सभी सैन्य द्वीप ठिकाने आपस में जुड़े हुए हैं और उन द्वीपों में आपसी कनेक्शन स्थापित करने के लिए 50 हाई फ्रीक्वेंसी एंटीना लगाए गये हैं, जो लंबी दूरी तक कम्युनिकेशन सिस्टम स्थापित करने की सुविधा प्रदान करते हैं।

China Pla South China Sea: पूरी दुनिया को आशंका थी, कि चीन एक ऐसे युद्ध की तैयारी कर रहा है, जो अगर लड़ा गया, तो फिर दुनिया में विनाश आने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचेगा। चीन की सैन्य तैयारियों को लेकर होने वाले खुलासे इतने खतरनाक है, कि आने वाले वक्त में चीन से उलझना किसी भी देश के लिए आसान नहीं होगा। फिलहाल, चीन ने दक्षिण चीन सागर का पूरा का पूरा हिस्सा चीन में मिलाने के लिए काफी आक्रामक तैयारी शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने दक्षिण चीन सागर में स्थित टापुओं मिसाइलों और विनाशक हथियारों से लैस करना शुरू कर दिया है, जबकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपकि बराक ओबामा से वादा किया था, कि वो टापुओं का इस्तेमाल सैन्य इस्तेमाल के लिए नहीं करेंगे।

टापुओं पर विनाशक हथियारों की तैनाती

टापुओं पर विनाशक हथियारों की तैनाती

साउथ चायना सी में जिन जगहों पर भी समुद्र के अंदर ऊभरी हुई चट्टानें हैं, चीन ने उन जगहों का इस्तेमाल सैन्य गतिविधियों के लिए करना शुरू कर दिया है। जिनपर अब दुनिया ने ध्यान देना शुरू किया है। पिछले सात से आठ सालों में चीन ने इन द्वीपों को खुला सैन्य ठिकाना बनाने के लिए पानी की तरह पैसे बहाए हैं, जबकि साल 2015 में शी जिनपिंग ने बराक ओबामा से वादा किया था, कि चीन इन सुविधाओं का सैन्यीकरण नहीं करेगा। लेकिन, शी जिनपिंग ने बराक ओबामा से सफेद झूठ बोला था, जो अब पूरी तरह से साफ हो गया है। चीन पर नजर रखने वाले सैन्य विश्लेषकों ने इन सैन्य ठिकानों के बारे में काफी खतरनाक चेतावनियां जारी की हैं, जिससे खुलासा होता है, कि चीन किस तरह से एक महाविनाशक लड़ाई के लिए खुद को तैयार कर रहा है।

द्वीप बने चीन के सैन्य ठिकाने

द्वीप बने चीन के सैन्य ठिकाने

सैन्य विश्लेषकों के मुताबिक, दक्षिण चीन सागर में पैरासेल द्वीप समूह में चीन ने 20 सैन्य चौकियों का निर्माण किया है, जिनमें वुडी द्वीप सबसे बड़ा है। इनके साथ ही चीन ने दक्षिणी स्प्रैटली द्वीपों में सात सैन्य ठिकानों का निर्माण किया है और ये द्वीप चीन के लिए कभी ना डूबने वाले अकल्पनीय एयरक्राफ्ट कैरियर की तरह हैं। पैरासेल द्वीपों पर चीन पिछली शताब्दी के उत्तरार्ध से ही दावा करता आया है और पिछले एक दशक में चीन की सेना PLA ने हांगकांग से लगभग 1,300 किमी दक्षिण में Spratlys में सात सैन्यीकृत चौकियों का निर्माण किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, PLA ने Cuarteron, Fiery Cross, Gaven, Hughes, Johnson, Mischief और Subi Reefs पर हाई-टेक सेंसर लगाए हैं। सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है, कि इन इन ठिकानों पर चीन ने रनवे, बर्थ, हैंगर, बैरक, रडार सिस्टम, नौसेना बंदूकें और एयर डिफेंस सिस्टम्स की तैनाती करने के साथ साथ बुनियादी ढांचों का भारी विस्तार किया है।

द्वीपों से दुश्मनों की घेराबंदी

द्वीपों से दुश्मनों की घेराबंदी

जॉन हॉपकिंस एप्लाइड फिजिक्स यूनिवर्सिटी ने दक्षिण चीन सागर में चीन के द्वारा बनाए गये इन ठिकानों के बारे में आकलन की एक सीरिज प्रकाशित की है, जिसमें एक्सपर्ट जे. माइकल डेम ने कहा कि,"कुल मिलाकर दो दर्जन से ज्यादा संभावित रडार द्वीप की चट्टानों पर देखे गये हैं। इन रडारों में एयर डिफेंस सिस्टम समेत अलग अलग तरह के रडार शामिल हैं। द्वीपों पर जिन रडारों को तैनात किया गया है, उनकी क्षमता काफी ज्यादा है और वो लंबी दूरी तक के टारगेट को पकड़ सकते हैं। चीन इन द्वीपों पर इलेक्ट्रॉनिक वायरफेयर सिस्टम्स की तैनाती कर रहा है, जिससे चीन की फौज को लड़ाई के वक्त एक साथ कई द्वीपों से हमला करने की क्षमता हासिल होगी, जिससे चीन को दुश्मन के खिलाफ काफी बढ़त मिलेगी। इसके साथ ही चीन इन द्वीपों को इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिस्टम से घेर रहा है, ताकि इन द्वीपों की रक्षा की जा सके। साथ ही रिपोर्ट में ये भी कहा गया है, कि चीन इन द्वीपों पर खुफिया सैन्य सुविधाओं का भी निर्माण कर रहा है।

आपस में जुडे़ हैं सभी सैन्य द्वीप ठिकाने

आपस में जुडे़ हैं सभी सैन्य द्वीप ठिकाने

रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के ये सभी सैन्य द्वीप ठिकाने आपस में जुड़े हुए हैं और उन द्वीपों में आपसी कनेक्शन स्थापित करने के लिए 50 हाई फ्रीक्वेंसी एंटीना लगाए गये हैं, जो लंबी दूरी तक कम्युनिकेशन सिस्टम स्थापित करने की सुविधा प्रदान करते हैं। वहीं, इन द्वीपों को फाइबर ऑप्टिक केबल लिंक के जरिए चीन की मुख्य भूमि से भी जोड़ दिया गया है और इसका काम पूरा हो चुका है। साल 2016 से साल 2019 के बीच न ने हैनान और पैरासेल द्वीप समूह के बीच सेंसर और संचार उपकरणों का एक नेटवर्क तैयार कर लिया था। इस ब्लू ओशन इंफॉर्मेशन नेटवर्क में हैनान के चारों तरफ पांच 34 मीटर लंबे फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म और पैरासेल्स में बॉम्बे रीफ में एक फिक्स्ड प्लेटफॉर्म शामिल है। जिनके बारे में सभावना है, कि वो समुद्री डेटा कलेक्ट करते हैं और फिर कम्युनिकेशन चैनल के तौर पर काम करते हैं।

लेकिन, क्या इनसे चीन बन जाएगा अजेय?

लेकिन, क्या इनसे चीन बन जाएगा अजेय?

हालांकि, इन द्वीपों से चीन की शक्ति में काफी इजाफा होता है, लेकिन सिंगापुर में एस. राजारत्नम स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के रिसर्च फेलो प्रोफेसर कॉलिन कोह ने सवाल उठाते हुए कहा कि, "क्या आपने कभी सोचा है, कि चीन के इन सभी द्वीप ऑउटपोस्ट पर इतने कम सैनिक क्यों होते हैं, जबकि वहां पूरा रेजिमेंट जा सकता है?" उन्होंने कहा कि, "ऐसा इसलिए है, क्योंकि भू-आकृति विज्ञान के नजरिए से देखें, तो ये द्वीप काफी अस्थिर हैं।" कोह ने एक चीनी सरकारी अधिकारी के हवाले से कहा कि, इन "कृत्रिम द्वीपों को जल्दबाजी में बनाया गया है और पर्यावरण के प्रभावों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है। परियोजना में तेजी लाने के लिए तमाम सुरक्षा के उपायों को खत्म कर दिया गया है, लिहाजा चीन के बनाए ये कृत्रित द्वीप कभी भी चीन को धोखा दे सकते हैं।

चीनी वैज्ञानिक हो रहे हैं परेशान

चीनी वैज्ञानिक हो रहे हैं परेशान

उन्होंने कहा कि, दरअसल, चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के वैज्ञानिक इस समस्या से उसी वक्त से जूझ रहे थे, जबसे ये निर्माण कार्य जोरों पर था। यह हार्बिन इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय के जर्नल द्वारा प्रकाशित अगस्त 2016 के एक अध्ययन में देखा जा सकता है। सार से पता चलता है कि दक्षिण चीन सागर में कंक्रीट संरचनाओं का कार्बोनेशन सेवा की उम्र 25 साल से कम है और द्वीप बनाने में जिन मैटेरियल्स का इस्तेमाल किया गया है, वो समशीतोष्ण क्षेत्रों की तुलना में काफी कमजोर हैं, लिहाजा जैसे ही इन द्वीपों से ऑपरेशन शुरू होगा, इन द्वीपों के लिए लंबे ऑपरेशन को संभालना असंभव हो जाएगा।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+