चीनी मीडिया ने माउंट एवरेस्ट को बताया चीन में, सोशल मीडिया पर हो रही आलोचना
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद काफी लंबे समय से है। लेकिन चीन का सीमा विवाद सिर्फ भारत से ही नहीं है, वह अब नेपाल स्थित माउंड एवरेस्ट पर भी दावा करने लगा है। दरअसल चीन ने लिंक रोड का उद्घाटन किया जोकि नेपाल से भारत होता हुआ चीन जाता है। लेकिन चीनी मीडिया ने इस खबर को रिपोर्ट करते समय दावा किया है कि माउंट एवरेस्ट चीन का है। चीन की ग्लोबल टेलिवीजन नेटवर्क ने 2 मई को एक ट्वीट किया, जिसमे दावा किया गया कि दूनिया की सबसे उंची चोटी माउंट एवरेस्ट चीन का है।
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ट्वीट पर खड़ा हुआ सवाल
सीजीटीएन का ट्वीट ऐसे समय आया है जब चीन ने शोधकर्ताओं की एक टीम को माउंट एवरेस्ट भेजा है ताकि वह माउंट एवरेस्ट की चोटी को नाप सके। बता दें कि माउंट एवरेस्ट पर कोरोना वायरस महामारी के समय चढ़ाई पर पाबंदी है। चीन की मीडिया द्वारा किए गए इस दावे के बाद चीन की काफी आलोचना हो रही है। लोग सोशल मीडिया पर काफी आलोचना हो रही है। नेपाल में चीनी मीडिया के दावे की काफी आलोचना हो रही है। यही नहीं लोग मांग कर रहे हैं कि चीनी मीडिया इस ट्वीट को वापस ले और माउंट एवरेस्ट पर अपने दावे को वापस ले। लोगों के भारी विरोध के बाद इस ट्वीट को डिलीट कर दिया गया है।

5जी टावर लगा
बता दें कि माउंट एवरेस्ट की उंचाई 8848 मीटर है जोकि चीन और नेपाल दोनों ही देश में है। हाल ही में चीन की हुवई मेबाइल कंपनी ने ऐलान किया था कि उसने 5जी एंटीना को माउंट एवरेस्ट पर लगाया है, इसे 6500 मीटर की उंचाई पर लगाया गया है, जबकि इसका लोवर बेस 53000 मीटर की उंचाई पर है जोकि सर्वे करने में काफी मदद करेगा।
मोटी रकन देनी पड़ती है
गौरतलब है कि विदेशी पर्वतारोही एवरेस्ट से चढ़ाई के लिए कम से कम 30,000 डॉलर का भुगतान करते हैं। हालांकि स्थानीयों का कहना है कि विदेशी पर्वतारोही पर्यावरणीय पतन पर कम ध्यान देते हैं। यदि प्रत्येक पर्वतारोही 8 किलो (18 पाउंड) कचरे को अपने साथ वापस लाता है, तो नेपाल प्रत्येक टीम द्वारा जमा की गई 4,000 डॉलर की जमा राशि वापस करता है, लेकिन वह कूड़े के साथ केवल आधी धनराशि ही वापस करता है।












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