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तवांग झड़प के बाद पहली बार बोला चीन, भारत के साथ विकास पर काम करने को तैयार, नई चाल?

वांग यी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के काफी करीबी माने जाते हैं और उनके ही कार्यकाल में शी जिनपिंग ने 'वुल्फ वॉरियर' डिप्लोमेसी को तेजी से आगे बढ़ाया है। वांग यी को अब प्रमोशन देकर पॉलिटिकल ब्यूरो में शामिल किया गया है

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India-China News: अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में घुसने की कोशिश करने वाले चीनी सैनकों को खदेड़ने के बाद भारत और चीन के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है और इस घटना के बाद दोनों देशों के सैन्य कमांडरो के बीच लेटेस्ट बातचीत हुई है। जिसके बाद पहली बार चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भारत को लेकर बयान दिया है और उन्होंने कहा है, कि संबंधों को मजबूती की तरफ ले जाने के लिए चीन, भारत के साथ काम करने के लिए तैयार है।

चीन के विदेश मंत्री ने क्या कहा?

चीन के विदेश मंत्री ने क्या कहा?

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने रविवार को कहा कि, चीन द्विपक्षीय संबंधों के "स्थिर और मजबूत विकास" के लिए भारत के साथ काम करने के लिए तैयार है और दोनों देश सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ-साथ बाकी के मुद्दों को भी हल करने के लिए भारतीय और चीनी सैन्य कमांडरों ने 20 दिसंबर को नए दौर की बातचीत शुरू की है और इस बातचीत के शुरू होने के करीब एक हफ्ते बाद चीनी विदेश मंत्री ने यी टिप्पणी की है। 9 दिसंबर को अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में झड़प के बाद पहली बार दोनों पक्षों के सैनिकों के बीच पहली उच्च-स्तरीय वार्ता हुई थी।

भारत-चीन के बीच बातचीत

भारत-चीन के बीच बातचीत

अंतर्राष्ट्रीय स्थिति और चीन के विदेशी संबंधों पर एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि, "चीन और भारत ने राजनयिक और आर्मी-टू-आर्मी चैनलों के माध्यम से कम्युनिकेशन को बनाए रखा है, और दोनों देश सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं ... चीन-भारत संबंधों के स्थिर और मजबूत विकास की दिशा में भारत के साथ काम करने के लिए हम तैयार हैं।" आपको बता दें कि, भारत और चीन के बीच जारी तनाव के बीच चल रही बातचीत को लेकर भारत की तरफ से नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल प्रतिनिधि हैं, तो चीन की तरफ से वांग यी प्रतिनिधि हैं। गतिरोध दूर करने के लिए भारत और चीन के बीच अब तक 17 दौर की वार्ता हो चुकी है। 17वें दौर के बाद पिछले गुरुवार को जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया था, कि वार्ता "स्पष्ट और गहन" थी और "बाकी मुद्दों के जल्द से जल्द समाधान के लिए काम करने के लिए दोनों देशों के नेताओं द्वारा दिए गए मार्गदर्शन के मुताबिक" थी।

शांति-स्थिरता के लिए दोनों देश सहमत

शांति-स्थिरता के लिए दोनों देश सहमत

ज्वाइंट स्टेटमेंट में पूर्वी लद्दाख क्षेत्र का भी जिक्र किया गया और कहा गया, कि 'फिलहाल के लिए, दोनों पक्ष पश्चिमी क्षेत्र में जमीन पर सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने पर सहमत हुए हैं।' आपको बता दें कि, इससे पहले सितंबर महीने में भारतीय और चीनी पक्ष गोगरा-हॉट स्प्रिंग क्षेत्र को खाली करने के लिए तैयार हुए थे और लगातार 16 दौर की चली बातचीत के बाद इन दोनों क्षेत्रों को लेकर दोनों देशों के बीच सहमति बनी थी। ये बातचीत साल 2020 से चल रही थी, जब डोकलाम में दोनों देशों के सैनिकों के बीच टक्कर हुई थी। हालांकि, डेपसांग में चीनी सैनिक अभी भी मौजूद हैं और डेमचोक में चीनियों ने घुसपैठ कर रखा है, जबकि पैंगोंग त्सो पर चीन ने काफी तेजी के साथ दो पुलों का निर्माण किया है, इसके साथ ही उस क्षेत्र में इन्फ्रास्ट्रक्टर का भी चीन विकास कर रहा है, जिसकी वजह से अभी भी तनाव जारी है। इन पुलों के निर्माण से झील के दक्षिणी तट पर चीनी लामबंदी में लगने वाले समय को काफी कम कर देगा।

किन क्षेत्रों को लेकर चल रही बात?

किन क्षेत्रों को लेकर चल रही बात?

भारत और चीन के सैनिकों के बीच पूर्वी लद्दाख में जून-2020 में पहली बार घातक भिड़ंत हुई थी, जिसके बाद अब जाकर अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में चीनी सैनिकों ने घुसपैठ करने की कोशिश की, जिसके बाद एक दूसरे के बीच लाठी और डंडों से झड़प हुई है। वहीं, यह पूछे जाने पर, कि क्या चीन के साथ चल रही बातचीत में अरूणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर के मुद्दे को उठाया गया, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सीधी प्रतिक्रिया देने से परहेज किया और उन्होंने कहा कि, "हम सभी अटकलें लगा सकते हैं, लेकिन चूंकि मेरे पास फिलहाल इसकी पुष्टि नहीं है, इसलिए मैं इसकी पुष्टि नहीं कर पाऊंगा। ईमानदारी से कहूं, तो हमने पश्चिमी क्षेत्र के बारे में बात की थी। इसलिए यदि इसे नहीं उठाया गया है, तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा। मुझे भी कोई टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।' उन्होंने कहा कि, "हम इस बात पर जोर देते रहे हैं, कि हमारे सैनिक हमारी सीमाओं की रक्षा के लिए मजबूती से खड़े रहेंगे। इसलिए मैं इससे आगे कुछ नहीं कहना चाहता।'

चीन की नई चाल?

चीन की नई चाल?

चीन अपनी स्लाइसिंग पॉलिसी के लिए कुख्यात है, जिसके तहत वो थोड़े-थोड़े हिस्से में घुसपैठ कर उसे विवादित बनाता है और फिर उसपर अपना हक जताते हुए उसपर कब्जा करने की कोशिश करता है। लिहाजा, चीन को लेकर भारत पूरी तरह से सतर्क है। वहीं, इस कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अमेरिका के साथ चीन के अशांत संबंधों और रूस के साथ बढ़ती नजदीकी संबंध को लेकर भी बात की। आपको बता दें कि, वांग यी का कार्यकाल अगले साल खत्म हो रहा है और उन्हें पिछले दिनों चीनी कांग्रेस की बैठक में प्रमोशन देते हुए पॉलिटिकल ब्यूरो में शामिल किया गया है। वो राष्ट्रपति शी जिनपिंग के काफी करीबी माने जाते हैं और उनके कार्यकाल में शी जिनपिंग ने चीन के 'वुल्फ वॉरियर' डिप्लोमेसी को तेजी से आगे बढ़ाया है, जिसका नतीजा ये है, कि चीन के पश्चिमी देशों के साथ साथ भारत के साथ भी संबंध काफी खराब हो चुके हैं।

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