कराची की घटना ने चीन का पाकिस्तान में तोड़ा विश्वास, सरकार ने कबूला, मकसद में कामयाब शैरी बलूच?
पाकिस्तान सीनेट रक्षा समिति के अध्यक्ष सीनेटर मुशाहिद हुसैन ने कबूल करते हुए कहा कि, ‘इससे चीन में गंभीर चिंता और समझ में आने वाला आक्रोश पैदा हुआ है'।
बीजिंग/इस्लामाबाद, मई 08: बलूचिस्तान की आजादी के लिए संघर्ष करने वाली बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी की मजीद ब्रिगेड की शैरी बलूच खुद आजादी की संघर्ष करते हुए शहीद हो गई हैं, लेकिन उन्होंने अकेले चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की पाकिस्तान में विश्वास की बुनियाद को हिला डाला है।

कराची में बस पर हमला
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कराची में 6 अप्रैल को एक मिनीबस पर हुए भीषण हमले के बाद, पाकिस्तान में चीनी श्रमिकों की रक्षा करने की पाकिस्तान सरकार की क्षमता पर चीन का विश्वास 'गंभीर रूप से हिल गया' है। यह रिपोर्ट 26 अप्रैल को पाकिस्तान के कराची विश्वविद्यालय के परिसर के अंदर एक कार विस्फोट में अपनी जान गंवाने वाले तीन चीनी नागरिकों और एक पाकिस्तानी वैन चालक की हत्या के मद्देनजर आई है। पाकिस्तानी मीडिया आउटलेट डॉन के साथ बातचीत में, पाकिस्तान सीनेट रक्षा समिति के अध्यक्ष सीनेटर मुशाहिद हुसैन ने कहा कि, 'पाकिस्तान की सुरक्षा प्रणाली में अपने नागरिकों और उनकी परियोजनाओं की रक्षा करने की क्षमता में चीनी विश्वास गंभीर रूप से हिल गया है।"

पाकिस्तान ने कबूला
पाकिस्तान सीनेट रक्षा समिति के अध्यक्ष सीनेटर मुशाहिद हुसैन ने कबूल करते हुए कहा कि, 'इससे चीन में गंभीर चिंता और समझ में आने वाला आक्रोश पैदा हुआ है। इससे भी अधिक, हमलों का पैटर्न इतना स्पष्ट है, और यह साफ हो गया है, कि 'फुलप्रूफ सुरक्षा' के पाकिस्तानी वादे महज शब्द हैं, जो जमीन पर जवाबी कार्रवाई से मेल नहीं खाते हैं।" उन्होंने अकर्मण्य होने के लिए पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था की आलोचना की है। सीनेट डिफेंस ने कहा कि ऐसा लगता है कि सुरक्षा एजेंसियां झपकी ले रही हैं। उन्होंने कहा कि, 'अगर इस तरह के हमले जारी रहते हैं, तो न केवल चीनी, बल्कि अन्य विदेशी निवेशक भी पाकिस्तान में अपनी भूमिका की समीक्षा करने के लिए मजबूर होंगे।" उन्होंने घातक हमले के बाद चीनी पक्ष के मूड को साझा करते हुए ये टिप्पणी की है। इससे पहले, सीनेटर मुशाहिद ने पिछले महीने चीनी दूतावास में एक सीनेट प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था और कराची विश्वविद्यालय के परिसर में उनकी वैन पर आत्मघाती हमले में तीन चीनी लोगों के मारे जाने पर शोक व्यक्त किया था।

चीनी नागरिकों पर तीसरा हमला
पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल में पाकिस्तानी धरती पर चीनी नागरिकों पर यह तीसरा आतंकवादी हमला था। सोशल मीडिया पर प्रसारित कई रिपोर्टों के अनुसार, चीनी कार्यकर्ता हमलों के बाद पाकिस्तान छोड़ रहे हैं। हालांकि, एक चीनी सूत्र ने "पलायन" के इन दावों का खंडन किया। इससे पहले बलूचिस्तान में दासू डैम के पास भी चीनी इंजीनियरों से भरी एक बस को उड़ा दिया गया था, जिसमें 20 चीनी इंजीनियर मारे गये थे। जिसके बाद चीन ने कई मीलियन डॉलर पाकिस्तान सरकार ने मुआवजा वसूला था। आपको बता दें कि, कराची बम धमाके में जो तीन चीनी प्रोफेसर मारे गये थे, वो कराची विश्वविद्यालय में कनफ्यूशियस थ्योरी पढ़ाते थे, जो काफी विवादित माना जाता है। कराची बम धमाके की निंदा यूएनएससी ने भी की थी।

कौन थी आत्मघाती हमलावर महिला?
पाकिस्तानी पुलिस ने आत्मघाती महिला हमलावर के बारे में खुलासा करते हुए कहा था कि, महिला हमलावर काफी पढ़ी लिखी थी और उसका पति एक डॉक्टर है। बलूचिस्तान के तुर्बत में नियाजर अबाद के रहने वाले 30 साल की आत्मघाती हमलावर का नाम शैरी बलूच था, जिसने जूलॉजी में एमएससी किया हुआ था, वहीं उसकी शादी एक डॉक्टर से हुई थी। लेकिन, बलूचिस्तान की आजादी और चीनी अतिक्रमण के खिलाफ संघर्ष करने वाली इस महिला ने सोच-विचारकर पूरी प्लानिंग के साथ कराची यूनिवर्सिटी के गेट पर खुद को ठीक उस वक्त उड़ा दिया, जब चीनियों को लेकर एक बस यूनिवर्सिटी कैंपस में घुसने वाली थी।

चीनी नागरिकों पर हमले क्यों?
आपको बता दें कि, कराची बम धमाके की जिम्मेदारी लेने वाले बलूच लिबरेशन आर्मी, पहले पाकिस्तानी सेना के जवानों के निशाना बनाती थी, लेकिन अब इस संगठन ने अपना टारगेट बदल लिया है और डायरेक्ट चीनी नागरिकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। और जिस तरह से चीन का पाकिस्तान से विश्वास टूटा है, उससे जाहिर होता है कि, ये संगठन अपने मकसद में कामयाब भी हो रहा है। बलूचिस्तान की आजादी के लिए लड़ने वाले इस फ्रीडम फाइटर संगठन ने हमले के बाद जिम्मेदारी लेते हुए कहा था कि, "बलूच लिबरेशन आर्मी की मजीद ब्रिगेड ने कराची में एक हमले में चीनी अधिकारियों को निशाना बनाया है। हमले में तीन चीनी अधिकारी हुआंग गुइपिंग, डिंग मुफांग और चेन साई मारे गए हैं, जबकि वांग युकिंग और उनके सुरक्षा गार्ड घायल हो गए'। वहीं, बीएलए ने कहा था कि, वो लगातार पाकिस्तान में रहने वाले चीनी नागरिकों को निशाना बनाएंगे और वो उन्हें तबतक निशाना बनाएंगे, जब तक कि बलूचिस्तान से चीन निकल नहीं जाता है और बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन बंद नहीं किया जाता है।












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