PoK में बह गया चीन का बनाया भारी पुल, पाकिस्तान से कनेक्शन कटा, ग्लेशियर फटने से तबाही, देखिए Video
मुजफ्फराबाद (पीओके), 8 मई: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में चीन निर्मित एक बड़ा पुल देखते ही देखते टूटकर पानी के तेज बहाव के साथ बिखर गया। इस हादसे की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और इससे यह भी पता लगता है कि जलवायु परिवर्तन कितना बड़ा खतरा है, क्योंकि इस घटना के पीछे ग्लेशियर का फटना बताया जा रहा है। ग्लेशियर के पानी से आई बाढ़ की वजह से जो पुल बहा है, वह चीन और पाकिस्तान को जोड़ने वाला मुख्य पुल है और चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर का ही हिस्सा है, जिसपर चीन बहुत ज्यादा खर्च कर चुका है।

पीओके में चीन का बनाया हुआ पुल बहा
ग्लेशियर फटने की वजह से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तान और चीन को जोड़ने वाला मुख्य पुल ही बह गया है। यह पुल पीओके के गिलगित-बाल्टिस्तान इलाके में काराकोरम हाईवे पर बना था और देखते ही देखते पानी के तेज बहाव में बह गया। सबसे बड़ी बात यह है कि ये पुल चीन ने ही पाकिस्तान अधिकृत में बनवाया था। शिश्पर ग्लेशियर के फटने से यह हादसा हुआ है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक इस हादसे की वजह से पुल के दोनों ओर हजारों टूरिस्ट फंस गए हैं। वीडियो आवाज आ रही है कि लोग किस तरह से सबसे भाग निकलने को कह रहे हैं।

गिलगित-बाल्टिस्तान इलाके की घटना
पीओके में चीन निर्मित जो हसनाबाद पुल बह गया है, वह चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) का हिस्सा है। घटना गिलगित-बाल्टिस्तान के हुंजा तहसील की है। वीडियो फुटेज में दिख रहा है कि किस तरह पुल पानी के तेज बहाव को नहीं झेल पाया और देखते ही देखते ताश के पत्तों की तरह बिखर गया। गौरतलब है कि ग्लेशियर फटने की घटना शनिवार की है। पुल बहने का वीडियो पाकिस्तान की नई जलवायु और पर्यावरण मंत्री शेरी रहमान ने भी शेयर किया है और लिखा है, 'पाकिस्तान जलवायु और मौसम विभाग ने ज्यादा तापमान की वजह से पाकिस्तान के खतरे को लेकर आगाह किया था। काराकोरम हाइवे पर हसनाबाद पुल एक ग्लेशियर लेक की वजह से ढह गया, शिश्पर ग्लेशियर के पिघलने से बाढ़ आ गई, जिससे इसके खंभों के नीचे कटाव हो गया।'
पीओके में 33 हिमनद झील कभी भी फट सकते हैं- पाकिस्तान
पाकिस्तानी एजेंसियों के मुताबिक ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। उनका कहना है कि गिलगित-बाल्टिस्तान और खैबर पख्तूनखा इलाके में ही ग्लेशियर पिघलने से 3,000 से ज्यादा हिमनद झील बन चुके हैं, जिनमें से 33 कभी भी फट सकते हैं। इसी पर एक और ट्वीट करते हुए रहमान ने भी चिंता जताई है और उन्होंने वैश्विक नेताओं से उत्सर्जन कम करने के लिए कदम आगे बढ़ाने का आह्वान किया है। जहां तक शिश्पर हिमनद की बात है तो इसकी वजह से हसनाबाद इलाके के लोगों की जान पर काफी समय से संकट बताया जा रहा है। करीब ढाई साल पहले की रिपोर्ट है कि यह ग्लेशियर हर दिन लगभग चार मीटर नीचे खिसक रहा है। कुल मिलाकर अभी जो हादसा हुआ है, उस तरह का खतरा वहां अब हमेशा मंडरा रहा है।
पाकिस्तान के अवैध कब्जे में यह इलाका
बता दें के गिलगित-बाल्टिस्तान पूर्व की जम्मू और कश्मीर रियासत का हिस्सा था, जो कि 1947 से पाकिस्तान के अवैध कब्जे में है। चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के तहत चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर भी इसी इलाके से होकर गजुरता है। यह वहां के अशांत क्षेत्र बलूचिस्तान से शुरू होकर गिलगित-बाल्टिस्तान होते हुए चीन के शिंजिआंग क्षेत्र के काशगर तक जाता है।












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