China: सत्ता पर एकाधिकार की ओर बढ़े शी जिनपिंग, CPC ने माओत्से तुंग से भी 'बड़ा' ओहदा दिया
बीजिंग, 11 नवंबर: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग वहां की सत्ता पर एकाधिकार की ओर बढ़ गए हैं। चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) पार्टी के इतिहास में एक 'अद्वितीय' प्रस्ताव पास किया गया है, जिससे शी जिनपिंग के राजनीतिक कद और उनकी सत्ता को लगभग तानाशाह वाली शक्ति मिल गई है। वैसे भी यह तय है कि जिनपिंग ही 2022 के आखिर के बाद भी लगातार तीसरी बार राष्ट्रपति का कार्यकाल संभालेंगे। उनके लिए कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना की सबसे प्रभावशाली संस्था ने जो प्रस्ताव तैयार किया है, उससे वह आधुनिक चीन के संस्थापक रहे माओत्से तुंग को भी पीछे छोड़ चुके हैं।

सत्ता पर एकाधिकार की ओर बढ़े शी जिनपिंग
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना ने गुरुवार को जो प्रस्ताव पास किया है, उससे 68 साल के शी जिनपिंग को वही ओहदा मिल गया है, जो कभी सीपीसी के आइकन रहे और आधुनिक चीन के संस्थापक माओत्से तुंग (माओ) को प्राप्त था; या फिर वहां की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के मुख्य शिल्पकार माने जाने वाले देंग शियाओ पिंग को हासिल था। चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के हवाले से गुरुवार शाम को सीपीसी की ओर से जो जानकारी दी गई है, उसके मुताबिक 'सीपीसी के विस्तृत अधिवेशन में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पास हुआ है।' यह विस्तृत अधिवेशन सीपीसी की सेंट्रल कमिटी के 348 सदस्यों के बीच सोमवार से बीजिंग में बंद दरवाजे के अंदर हो रही थी। यह वही कमिटी है, जो हर पांच साल में अपना नया नेता चुनती है। आधुनिक चीन में इस तरह का प्रस्ताव पहले सिर्फ दो ही बार पारित हुआ था- 1945 में माओ के दौरान और 1981 में देंग के कार्यकाल में। जाहिर है कि इसके साथ ही जिनपिंग का चीन की सत्ता पर लगभग एकाधिकार हो गया है।

जिनपिंग की शान में पढ़े गए कसीदे
चीन में आज जो कुछ हुआ है उसकी बुनियाद मार्च, 2018 में ही पड़ चुकी थी। तब वहां के संसद के वार्षिक अधिवेशन में राष्ट्रपति के अधिकतम दो साल के कार्यकाल का नियम हटा दिया गया था, जिससे जिनपिंग के लिए अनिश्चितकाल तक के लिए गद्दी पर बैठने का रास्ता साफ हो गया था। गुरुवार शाम को जारी 12 पेज की विज्ञप्ति में कहा गया है कि विस्तृत अधिवेशन में पार्टी के इतिहास की समीक्षा करना जरूरी था, '.....सेंट्रल कमिटी और पूरी पार्टी में कॉमरेड शी जिनपिंग की मूल स्थिति को शक्तिशाली बनाए रखने और इसके केंद्रीकृत, एकीकृत नेतृत्व को सुनिश्चित करने के लिए, ताकि सभी सदस्य एकजुट होकर कार्य करें।' इस विज्ञप्ति में जिनपिंग की शान में कसीदे पढ़े गए हैं- 'इस तरह से वे एक नए युग के लिए चीनी विशेषताओं के साथ समाजवाद पर शी जिनपिंग विचार के प्रमुख संस्थापक हैं। ये समकालीन और 21वीं सदी के चीन का मार्क्सवाद है। यह हमारे समय में चीनी संस्कृति और लोकाचार का सर्वश्रेष्ठ प्रतीक है और चीन के संदर्भ में मार्क्सवाद को अपनाने के लिए नई खोज का प्रतिनिधित्व करता है।'

माओत्से तुंग से भी 'बड़ा' ओहदा दिया
एक्सपर्ट का मानना है कि सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए शी फिर से इतिहास लिख रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया के मुताबिक विश्लेषकों का यह भी कहना है कि इस प्रस्ताव से शी को चीन पर अपना दृष्टिकोण थोपने और पिछले नेताओं की भूमिकाओं को कम करके सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने में मदद मिलेगी। क्योंकि, शी जिनपिंग की तरफदारी वाला प्रस्ताव माओ और देंग पर भारी पड़ चुका है। क्योंकि, जब 1945 में जब माओत्से तुंग के लिए ऐसा प्रस्ताव पास हुआ था, तब उनका जिक्र 7 बार हुआ था और 1981 में देंग के लिए पारित इसी तरह के प्रस्ताव में सिर्फ 5 बार जिक्र हुआ था। जबकि शी जिनपिंग का 17 बार जिक्र किया गया है। इसी हफ्ते शिन्हुआ ने उन्हें 'बेशक इतिहास गढ़ने वाला मुख्य व्यक्तित्व करार दिया था।'












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