एक्‍ट्रेस की पोस्‍ट से चीन अलर्ट, नागरिकों से कहा- भारत की धार्मिक उपासनाओं से बचो

बीजिंग। चीन ने अपने नागरिकों को भारत के धार्मिक स्‍कूलों की तरफ से ऑफर होने वाले कोर्सेज को लेकर चेतावनी दी है। चीन का कहना है कि इन कार्सेज की वजह से नागरिकों को यौन शोषण जैसे दलदल में फंसाया जा सकता है। इसके साथ ही चीन ने अपील की है कि वे सभी 'संदिग्‍ध धार्मिक उपासना' से दूर रहे। यह सारा मसला ताइवान की एक एक्‍ट्रेस की ओर से की गई ट्वीट के बाद शुरू हुआ था। चीन पहले भी भारत की ओर से होने वाले कोर्सेज को लेकर नागरिकों को चेतावनी जारी कर चुका है। चीन की सरकार की ओर से जारी इस वॉर्निंग के बाद अब देश में एक नई बहस छिड़ गई है। अलर्ट के बाद लोग सोशल मीडिया पर बहस कर रहे हैं कि क्‍या वाकई एक्‍ट्रेस किसी धार्मिक उपासना को प्रमोट कर रही थी।

साउथ इंडिया की यूनिवर्सिटी का जिक्र

साउथ इंडिया की यूनिवर्सिटी का जिक्र

चीन की मिनिस्‍ट्री ऑफ पब्लिक सिक्‍योरिटी (एमपीएस), चीन पुलिस की ओर से यह अलर्ट जारी किया गया है। इस अलर्ट में ताइवान की एक्‍ट्रेस की ओर से की गई पोस्‍ट का हवाला दिया गया है। इस एक्‍ट्रेस ने अपनी ट्वीट में दक्षिण भारत की एक संस्‍था की ओर से कराए जाने वाले कोर्स को प्रमोट किया था। ग्‍लोबल टाइम्‍स की ओर से बताया गया है कि ताइवान की इस एक्‍ट्रेस का नाम यी नेंगजिंग है और इन्‍हें एनी के नाम से भी जाना जाता है। इन्‍होंने सोमवार को चीन की माइक्रो ब्‍लॉगिंग साइट वेइबो पर अम्‍मा और भगवान के पाठ को प्रमोट किया था जिसे चित्‍तूर की वननेस यूनिवर्सिटी की ओर से तैयार किया जाता है।

राम रहीम की तरफ इशारा

राम रहीम की तरफ इशारा

वेइबो पर कई घंटों तक बहस के बाद एमपीउस और चाइना कल्‍ट एसोसिएशन (सीएसीए) ने नागरिकों को वॉर्निंग दी। ग्‍लोबल टाइम्‍स के मुताबिक एनी की पोस्‍ट के बाद मिनिस्‍ट्री के बाद कहा गया कि कुछ धार्मिक स्‍कूलों में यौन उत्‍पीड़न को बढ़ावा दिया जा रहा है। ग्‍लोबल टाइम्‍स के मुताबिक रिपोर्ट में एक धार्मिक नेता जिसका नाम सिंह है और जिसे 200 महिलाओं के बलात्‍कार के जुर्म में गिरफ्तार किया गया है, उसका भी जिक्र है। माना जा रहा है कि यह गुरमीत राम रहीम है जिसे दिसंबर 2017 में सजा सुनाई गई थी। राम रहीम को 20 वर्ष की सजा सुनाई गई है।

साउथ कोरिया के एक कोर्स से तुलना

साउथ कोरिया के एक कोर्स से तुलना

बीजिंग में विशेषज्ञों की ओर से भी इस बात की ओर ध्‍यान दिलाया गया है कि भारत में बौद्ध धर्म और क्रिश्चियनटी को बढ़ावा देने वाले मिले-जुले कोर्सेज को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह बिल्‍कुल वैसा ही जैसा की साउथ कोरिया के यूनिफिकेशन चर्च की ओर से ऑफर किया जाता है। पीपुल्‍स कोर्ट ऑफ चाइना ने साउथ कोरिया के चर्च की ओर से होने वाली इस उपासना को धार्मिक या किगोंग प्रैक्टिस करार दिया है। यह एक ऐसी हीलिंग प्रैक्टिस है जो सांस लेने के अभ्‍यास से जुड़ी होती है। जिसका मकसद मेंबर्स पर नियंत्रण लगाना है।

बौद्ध धर्मगुरुओं पर भी लग चुका है बैन

बौद्ध धर्मगुरुओं पर भी लग चुका है बैन

साल 2017 में चीन ने वेबसाइट शुरू की थी जिसका नाम था चाइना एंटी-कल्‍ट नेटवर्क और इसका मकसद उन उपायों और नीतियों को आगे बढ़ाना था जो धार्मिक उपासना का सामना करने के लिए थे। इससे पहले चीन ने मई 2018 चीन के सिचुआन प्रांत में भारत से आने वाले और बौद्ध धर्मगुरुओं को बैन कर दिया गया था। चीन ने कहा था कि इन धर्मगुरुओं को बौद्ध धर्म की 'गलत शिक्षा' दी जाती है। सिचुआन प्रांत के लिटयांग काउंटी में अधिकारियों की ओर से एक नोटिस भी जारी किया गया था।

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