‘मुस्लिम फ्री’ चीन के लिए शी जिनपिंग का पंचवर्षीय प्लान

उइगर मुस्लिमों पर चीन इतना अत्याचार क्यों कर रहा है और मुस्लिमों की पहचान मिटाने की शी जिनपिंग की पंचवर्षीय प्लानिंग क्या है?

हांगकांग, अप्रैल 12: उइगर मुस्लिमों को लेकर चीन की आक्रामकता और सख्ती लगातार बढ़ती ही जा रही है। शिनजियांग उइगर ऑटोनॉमस रीजन यानि एक्सयूएआर, जो चीन के पश्चिमोत्तर हिस्से में है, वहां उइगर मुस्लिमों पर प्रताड़ना हर दिन और बढ़ती ही जा रही है। उइगर मुस्लिमों को लेकर चीन हर दिन अलग अलग सफाई पेश करता है और हर सफाई में वो नई नई दलील पेश करता है। यूनाइटेड नेशंस की रिपोर्ट के मुताबिक इस वक्त चीन ने शिनजियांग प्रांत में करीब 10 लाख से ज्यादा उइगर मुस्लिमों को कन्सट्रेशन कैंप में बंदी बनाकर रखा हुआ है। जिसके बारे में चीन दुनिया से कहता है कि उसने 10 लाख मुस्लिमों को बंदी नहीं बनाया है, बल्कि उन्हें 'व्यावसायिक ट्रेनिंग सेंटर' में रखा गया है, जहां उन्हें रोजगार परख ट्रेनिंग दी जा रही है।

अमेरिका का दबाव

अमेरिका का दबाव

यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने शिनजियांग प्रांत में रहने वाले 10 प्रतिशत से ज्यादा 18 साल की उम्र पार कर चुके मुस्लिमों को डिटेंशन कैंप में रखा हुआ है। वहीं, बीजिंग के ऊपर अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के साथ पश्चिमी देशों का प्रेशर बढ़ता जा रहा है। मुस्लिमों के मानवाधिकार को लेकर विश्व शक्तियों के प्रेशर को अब चीन भी महसूस कर रहा है, लिहाजा चीन ने अपनी पूरी शक्ति इन आरोपों को झुठलाने में लगा दी है। इसके लिए चीन ने प्रोपेगेंडा वीडियो जारी करना शुरू कर दिया है। वहीं, चीन के बाकी हिस्सों में रहने वाले लोगों को पता ही नहीं है कि शिनजियांग में क्या हो रहा है, क्योंकि उनतक विदेशी न्यूजपेपर्स या वेबसाइट की पहुंच नहीं है और देश के बाकी हिस्से के लोग शिनजियांग के बारे में उतना ही जान पाते हैं, जितनी जानकारी चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी उनतक पहुंचने देना चाहती है। इस साल जनवरी में अमेरिका विश्व का पहला देश था, जिसने उइगर मुस्लिमों को लेकर चीन को घेरना शुरू किया और फिर बाकी शक्तियां भी धीरे धीरे अपनी आवाजें उठानी शुरू कर दी।

मुस्लिमों से चीन का डर

मुस्लिमों से चीन का डर

चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी को डर है कि कहीं चीन के अंदर रहने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के लोग चीन में अस्थिरता की वजह ना बन जाएं, लिहाजा वो अल्पसंख्यकों को लगातार प्रताड़ित करते हैं। उइगर मुस्लिमों के अलावा चीन में रहने वाले 12 करोड़ से ज्यादा अल्पसंख्यक समुदाय को लेकर चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी के बड़े नेताओं का सोच काफी सख्त है। ये नेता इन अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को चीन की मूल परंपरा और डीएनए में ढ़ालना चाहते हैं। चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी चाहती है कि चीन में रहने वाले 12 करोड़ से ज्यादा अल्पसंख्यक समुदाय के लोग भी चीन की बहुसंख्यक हान समुदाय में परिवर्तित हो जाएं ताकि चीन में आने वाले वक्त में भी कोई खतरा उत्पन्न ना हो, लिहाजा चीन की सुरक्षा और स्थायीत्व के लिए अल्पसंख्यकों को बहुसंख्यत आबादी में मिला देने की कोशिश कम्यूनिस्ट पार्टी कर रही है।

उइगर मुस्लिम और शी जिनपिंग

उइगर मुस्लिम और शी जिनपिंग

शी जिनपिंग ने जब चीन की सत्ता संभाली थी उस वक्त उन्होंने 'सेंन्ट्रल एथनिक वर्क' कॉन्फ्रेंस में कहा था कि 'जो सड़ चुका है, उसे लेकर हमें शुरूआत नहीं करनी चाहिए और चीन को जो खत्म हो चुका है उसे हटाते हुए नये सिरे से शुरूआत करनी चाहिए। पुरानी और सड़ चुकी जड़ों को पूरी तरह से उखाड़ फेंकना चाहिए ताकि नई और अच्छी जड़ें जमीन से निकल सके।' शी जिनपिंग के इस बयान ने उइगर मुस्लिमों को लेकर उनकी नीति जाहिर कर दी थी। शी जिनपिंग के शुरूआती शासनकाल में यानि शुरूआती दो साल में शिनजियांग प्रांत में कई बम धमाके हुए। कई उइगर मुस्लिम आतंकियों ने सरकारी अधिकारियों पर हमले किए। उइगर मुस्लिमों के हमले ने चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी के बड़े नेताओं को भारी नाराज कर दिया और फिर शी जिनपिंग ने उइगर मुस्लिमों को लेकर पंचवर्षीय योजना बना दी। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उइगर मुस्लिमों की बाहुल्य क्षेत्र शिनजियांग की जमीनी स्थिति बदलने के लिए 2016 में चेन क्वांगो नाम के नेता के हाथों में पूरी जिम्मेदारी सौंप दी। चेन क्वांगो अपनी 'बंद मुठ्ठी' वाली पहचान के लिए जाने जाते थे। इसीलिए शी जिनपिंग ने चेन क्वांगो को शिनजियांग की जिम्मेदारी दे दी। जिम्मेदारी संभालन के साथ ही चेन क्वांगो ने शिनजियांग में बन गये छोटे छोटे कट्टरपंथी और चरमपंथी उइगर मुस्लिमों के ग्रुप को खत्म करना शुरू दिया और बड़े पैमाने पर सुधार अभियान चलाना शुरू कर दिया।

शी जिनपिंग का पंचवर्षीय प्लान

शी जिनपिंग का पंचवर्षीय प्लान

चेन क्वांगो ने शिनजियांग की स्थिति को पूरी तरह से बदलने के लिए पंचवर्षीय प्लान बनाकर काम करना शुरू किया। जिसके तहत पहले साथ में शिनजियांग की पूरी स्थिति को नियंत्रण में लेना था। दूसरे साल में शिनजियांग में कम्यूनिस्ट पार्टी की स्थिति को मजबूत करना था। तीसरे साल में उइगर मुस्लिमों को सामान्य करना था। चौथे साल में शिनजियांग प्रांत में व्यापक स्तर पर स्थिरता लाना था और पांचवें साल में अपना टार्गेट पूरा करना था। लेकिन, पांच साल होने को आ गये हैं चेन क्वांगो अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाए हैं। चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी शुरूआती डेढ़ साल तक कन्सट्रेशन कैंप को दुनिया की नजरों से छिपाए रखा लेकिन धीरे धीरे उइगर मुस्लिमों पर किए जाने वाले अत्याचार की खबर दुनिया में फैलने लगी। लेकिन, चीन ने शुरूआती दौर में हर अत्याचार की बात से सीधे तौर पर इनकार कर दिया।

रोजगार या अत्याचार ?

रोजगार या अत्याचार ?

शुरूआती सालों चीन किसी भी तरह के कैंप होने की बात से ही इनकार करता रहा लेकन जब चीन को सबूत दिए जाने लगे तो फिर उसने रोजगार कैंप होने की बात कहनी शुरू कर दी। चीन कहता है कि वो उइगर मुस्लिमों के लिए रोजगार ट्रेनिंग कैंप चलाता है, जहां उन्हें काम सिखाया जाता है। लेकिन सवाल ये उठता है कि अगर कैंप के जरिए वास्तव में उइगर मुस्लिमों का विकास हो रहा है तो फिर चीन कैंप्स को लेकर झूठ क्यों बोलता रहा। इस वक्त कम्यूनिस्ट पार्टी अपनी गुलाम मीडिया के जरिए शिनजियांग के बारे में प्रोपेगेंडा चलाने में व्यस्त है। वहीं, साल 2019 में नेशनल पीपुल्स कॉन्ग्रेस शोहरत जाकिर, जो शिनजियांग सरकार के चेयरमैन हैं, उन्होंने कहा था कि 'साफ साफ कहूं तो इन कैंपो में काफी कम संख्या में लोग हैं और एक दिन समाज को इन कैंप्स की जरूरत नहीं होगी, और फिर ये कैंप्स अपने आप हट जाएंगे'। ऐसे में फिर सवाल ये उठे कि जब ये कैंप इतने जरूरी हैं तो फिर इन्हें हटाया क्यों जाएगा और यहां इतने कम लोग क्यों हैं?

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    जारी है अत्याचार

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    ऑस्ट्रेलियन स्ट्रेटजी पॉलिसी इंस्टीट्यूट यानि एएसपीआई की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उइगर मुस्लिमों को लेकर चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी का अत्याचार जारी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि डिटेंशन कैंप्स से 80 हजार से ज्यादा उइगर मुस्लिमों को बाहर निकालकर चीन के 9 अलग अलग राज्यों में स्थित अलग अलग फैक्ट्रियों में काम करने के लिए भेजा गया है। इन फैक्ट्रीज में बड़े बड़े ब्रांड्स के कपड़े बनाए जाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इन फैक्ट्रियों में काम करने वाले उइगर मुस्लिमों को फैक्ट्री एरिया से बाहर जाने की इजाजत नहीं है। वो काम के अलावा अपने कमरे से बाहर नहीं निकल सकते हैं। उइगर मुस्लिमों को बिना इजाजत नमाज पढ़ने या फिर अपनी मजहबी रीति-रिवाज को मानने की इजाजत नहीं है। ताजा रिपोर्ट्स में कहा गया है कि चीन किसी भी हाल में उइगर मुस्लिमों की धार्मिक और पारंपरिक पहचान को बदलना चाहता है और इसके लिए चीन हर हद को पार करने के लिए तैयार है।

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