ड्रैगन की गोदी में खेलने का अंजाम, नेपाल की परियोजना में नेपाली की जगह भरे चीनी मजदूर
नेपाल में वहां के नागरिकों को रोजगार नहीं मिल रहा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि बीजिंग अपने वर्करों को नेपाल में रोजगार के लिए भेज रहे हैं। इसका खुलासा एक लोडर दुर्घटना से हुई है।
काठमांडू, 01 जून : चीन की विस्तारवादी सोच जमीन से उठकर लोगों के रोजगार छीनने तक जा पहुंची है। खबर के मुताबिक नेपाल के राष्ट्रीय गौरव परियोजना के अंतर्गत फास्ट ट्रैक निर्माण कार्य में नेपाली युवा इंजीनियरों, मजदूरों को नजरअंदाज कर चीन के नागरिकों को काम पर लगाया जा रहा है। ऐसे में वहां के लोग नौकरी के लिए दुसरे देशों में जाने के लिए मजबूर हो रहे हैं।

नेपाली मजदूरों, युवाओं को नहीं मिल रहा रोजगार
नेपाल में वहां के नागरिकों को रोजगार नहीं मिल रहा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि बीजिंग अपने वर्करों को नेपाल में रोजगार के लिए भेज रहे हैं। इसका खुलासा एक लोडर दुर्घटना से हुई है। खबर के मुताबिक पिछले महीने नेपाल में एक लोडर दुर्घटना में तीन चीनी नागरिक मारे गए थे। इससे पता चला की नेपाल में वे लोग काम करने आए थे।
लोडर दुर्घटना के बाद हकीकत सबके सामने आई
खबर के अनुसार, अप्रैल के अंतिम सप्ताह में काठमांडू-तराई (मधेश) फास्ट ट्रैक पर लोडर दुर्घटना से पता चला है कि उनमें से बड़ी संख्या में चीन के लोग परियोजना में कार्यरत हैं जबकि जारी परियोजना में केवल कुछ नेपाली तकनीशियन ही कार्यरत हैं। हालांकि, रिपोर्ट्स यह भी बताती है कि, इस बात का अभी तक खुलासा नहीं हुआ है कि नेपाल में कितने चीनी नागरिकों ने प्रोजेक्ट में काम करने के लिए वर्क परमिट हासिल किया है।
कितने विदेशी लोगों को मिला है नेपाल में वर्क परमिट ?
खबर हब ने के मुताबिक, राष्ट्रीय गौरव परियोजना के ठेकेदार नेपाल सेना ने यह खुलासा नहीं किया है कि कितने विदेशी तकनीशियनों को काम करने के लिए लेबर परमिट दिया गया है। वहीं, चीन के लोगों को नेपाल में वर्क परमिट मिलने से वहां के नेपाली इंजीनियर घर पर बैठे हुए हैं। उनके पास नौकरी नहीं है। ऐसी स्थिति में वहां के मजदूरों को बिना नौकरी के विदेश जाने को मजबूर किया जा रहा है। वहीं, दूसरी तरफ बड़ी संख्या में चीनी नागरिकों को नेपाल में राष्ट्रीय गौरव परियोजनाओं से जुड़े कार्यों में शामिल किया जा रहा है। यह नेपाली नागरिकों के लिए बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है। इसका साफ मतलब यह है कि, नेपाल के नागरिकों को बेरोजगार कर चीन के लोगों को रोजगार दिया जा रहा है, और वहां के लोग भूख और गरीबी से बेहाल होकर विदेशों में जाने को मजबूर हो रहे हैं।
फास्ट ट्रैक परियोजना
खबर हब के मुताबिक, एक श्रमिक की मृत्यु के बाद बीमा का मामला सामने आया है। ठेकेदार से फास्ट ट्रैक बीमा के संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार, पैकेज 1 और पैकेज 2 का अभी तक बीमा नहीं किया गया है। इसका मुख्य कारण यह है कि चीनी ठेकेदार नौ महीने से जोर दे रहा है कि बीमा उसकी पुनर्बीमा कंपनी के तहत चीन में होना चाहिए। इसलिए बीमा में देरी हो रही है। फास्ट ट्रैक एक परियोजना है जिसे नेपाल सेना द्वारा चलाया जा रहा है।
इनसे बीमा प्राप्त करने की कोशिश
सूत्रों का हवाला देते हुए, खबर हब ने बताया कि चीनी ठेकेदार राष्ट्रीय बीमा समिति के बजाय निजी क्षेत्र के नेपाल बीमा, सनिमा बीमा और प्रीमियर बीमा से बीमा प्राप्त करने की कोशिश कर रहा है। अनुबंध संसदीय लेखा समिति के एक पत्र की अवहेलना में दिया गया था। रक्षा मंत्रालय को अनुबंध रद्द करने के लिए।
काम धीमी गति से चल रहा है
प्रस्तावित 72.6 किलोमीटर काठमांडू-तराई-मधेश एक्सप्रेस-वे के लिए ठेके वाली कंपनियों का काम रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। इससे यह आशंका पैदा हो गई है कि काम समय पर पूरा हो जाएगा। समय पर माल नहीं दे पाने, कंपनियों के सलाहकार विवादों में पड़ रहे हैं और बीमा और पुनर्बीमा की समस्या से फास्ट ट्रैक काम में दिक्कत हो रही है।
मंत्रिपरिषद ने अप्रैल 2017 में नेपाल सेना को फास्ट ट्रैक निर्माण की जिम्मेदारी दी थी। इस राष्ट्रीय गौरव परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य 2024 है। परियोजना की अनुमानित लागत 175 अरब रुपये है। 76.2 किमी की यह सड़क काठमांडू घाटी को तराई-मधेश से जोड़ने वाली सबसे छोटी सड़क है।












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