चीन ने 2015 में ही कोरोना वायरस से जैविक युद्ध लड़ने को लेकर की थी जांच, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

चीन ने 2015 में ही कोरोना वायरस से जैविक युद्ध लड़ने को लेकर की थी जांच, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

लंदन, 10 मई: ब्रिटेन के 'द सन' अखबार ने 'द ऑस्ट्रेलियन' की ओर से एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें चीन और कोरोना वायरस को लेकर एक चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि चीन के वैज्ञानिकों ने कोविड-19 महामारी से 5 साल पहले वर्ष 2015 में कथित तौर पर कोरोना वायरस के जरिए जैविक युद्ध लड़ने को लेकर जांच की थी। जिसमें उन्होंने तीसरा विश्व युद्ध जैविक हथियार से लड़ने का पूर्वानुमान भी लगाया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी विदेश विभाग को एक कथित दस्तावेज मिला है, जिससे पता चलता है कि चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के वैज्ञानिक कोविड-19 महामारी से पांच साल पहले सार्स कोरोना वायरस के हथियारकरण पर चर्चा कर रहे थे। पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के कमांडर ने यह घातक पूर्वानुमान जताया था।

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    दावा किया गया है कि दस्तावेजों साल 2015 में चीनी सैन्य वैज्ञानिकों और चीन के वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा लिखे गए थे, जो लोग कोविड-19 उत्पत्ति के संबंध में जांच कर रहे थे। जिसमें उन्होंने सार्स कोरोना वायरस को जैविक हथियार का नया युग बताया गया है। कोविड-19 उसका एक उदाहरण है।

    चीनी वैज्ञानिक कोरोना से अलग-अलग स्ट्रेन की जांच कर रहे थे

    ऑस्ट्रेलियाई रणनीतिक नीति संस्थान (ASPI) के कार्यकारी निदेशक पीटर जेनिंग्स ने news.com.au को बताया कि दस्तावेज एक "स्मोकिंग गन" के करीब है जैसा कि हमें मिला है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि यह महत्वपूर्ण है क्योंकि यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि चीनी वैज्ञानिक कोरोनो वायरस के अलग-अलग स्ट्रेन को लेकर सैन्य गतिविधियों को लेकर सोच रहे थे और ये पता लगा रहे थे कि इसे कैसे तैनात किया जा सकता है।''

    चीन ने बाहरी मेडिकल टीम को जांच क्यों नहीं करने दिया, उठे सवाल

    पीटर जेनिंग्स ने यह भी कहा कि दस्तावेजों को देखने के बाद ये साफतौर पर यह समझा जा सकता है आखिर चीन ने कोविड-19 की उत्पत्ति होने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन और बाहरी मेडिकल टीम की जांच अपने देश में क्यों नहीं करवाना चाहता था। उन्होंने कहा, अगर कोरोना वायरस वेट मार्केट से फैला होता तो चीन जांच सहयोग करना ना कि इसके लिए मना करता या टालता।

    दस्तावेजों में अमेरिकी वायुसेना के कर्नल का जिक्र

    पीएलए के दस्तावेजों में यह दर्शाया गया है कि जैविक हथियारों का इस्तेमाल कर दुश्मन देश के मेडिर सिस्टम को ध्वस्त किया जा सकता है। दावा किया जा रहा है कि इस दस्तावेज में अमेरिकी वायुसेना के कर्नल माइकल जेके कार्यों की भी चर्चा की गई है। कर्नल माइकल जेके कार्यों ने इस बात की संभावना जताई थी कि तीसरा विश्व युद्ध जैविक हथियारों से लड़ा जा सकता है। दस्तावेजों से ये भी पता चला है कि साल 2003 में फैला सार्स एक वैज्ञानिक द्वारा बनाया जैव हथियार हो सकता है।

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