India-China faceoff: लद्दाख में टकराव को 100 दिन पूरे, चीन बोला-भारत के साथ चाहते हैं शांति
बीजिंग। भारत और चीन के बीच लद्दाख में जारी टकराव को 100 दिन हो चुके हैं। अभी तक चीन की तरफ से कई जगहों पर डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया न के बराबर है। लेकिन इसके बाद भी पड़ोसी देश का कहना है भारत के साथ शांति कायम करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से यह बयान आया है। इसमें यह भी कहा गया है कि चीन अपने पड़ोसियों के साथ साझा हितों को आगे बढ़ाने की कोशिशें करेगा। न्यूज एजेंसी शिन्हुआ की तरफ से इस बात की जानकारी दी गई है। भारत और चीन के बीच पांच मई से लद्दाख में टकराव की शुरुआत हुई थी और अभी तक इसके खत्म होने की कोई सूरत नजर नहीं आ रही है।

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तनाव का कोई जिक्र नहीं
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान से भारत के साथ जारी तनाव से जुड़ा सवाल पूछा गया था। इस पर उन्होंने जवाब दिया, 'चीन-भारत के रिश्तों के लिए जरूरी है कि दोनों पक्ष साथ में मिलकर बॉर्डर के इलाकों में शांति और स्थिरता की सुरक्षा करें और द्विपक्षीय संबंधों में विकास और स्थिरता को कायम रखें।' झाओ ने भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर जारी तनाव का कोई जिक्र नहीं किया। झाओ का बयान चीनी विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर भी जारी हुआ। इसमें कहा गया है, 'हम अपने पड़ोसियों और दूसरे विकासशील देशों के साथ रणनीतिक आपसी भरोसे को और प्रगाढ़ करना चाहता है।' भारत और चीन के बीच पांच दौर की कोर कमांडर स्तर की वार्ता हो चुकी है और कई दौर की राजनयिक वार्ता भी हुई है। इसके बाद भी चीन की तरफ से डि-एस्कलेशन की प्रक्रिया को पूरा नहीं किया गया है।
भारत ने दी थी चीन को सलाह
चीनी विदेश मंत्रालय की मानें तो चीन और भारत की सेनाओं के बीच में हालात को नियंत्रित करने के लिए लगातार आपसी संकर्प बना हुआ है। चीन की भाषा में जारी बयान में आगे कहा गया है, 'वर्तमान समय में दोनों पक्षों की तरफ से बॉर्डर के इलाकों पर डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया है और आगे भी आपसी सहयोग जारी रहेगा।' बयान में मिलिट्री और राजनयिक सलाह के जरिए इलाकों में शांति और स्थिरता को कायम करने की बात भी कही गई है। 30 जुलाई को भारत की तरफ से चीन के उस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया था जिसमें कहा गया था कि डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया विवादित सीमा के कई इलाकों पर पूरी कर ली गई है। भारत की तरफ से तब से चीन को एलएसी पर स्थिति को सामान्य करने के लिए डिसइंगेजमेंट को गंभीरता से पूरा करने के लिए भी कहा गया था।












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