चीन ने कहा- चमगादड़ चीनी व्‍यंजनों का हिस्‍सा नहीं, न ही वुहान में होती है इसकी बिक्री

बीजिंग। कोरोना वायरस की वजह से निश्चित तौर पर अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय में चीन की इमेज को एक बड़ा धक्‍का लगा है। कहीं न कहीं लोगों को भरोसा उस पर से कम हुआ है। अब शायद चीन ने भरोसा बहाल करने के मकसद से अलग-अलग देशों में अपने राजनयिकों को वायरस के लेकर बरकरार गल‍तफहमियों को दूर करने का जिम्‍मा सौंप दिया है। भारत में चीन के दूतावास की जी रोंग की तरफ से मंगलवार रात जो ट्वीट्स किए गए, उनसे तो कम से कम यही इशारा मिलता है। रोंग ने छह ट्वीट्स के जरिए उन भ्रांतियों को दूर करने की कोशिश की जो कोरोना को लेकर लोगों में मौजूद हैं।

सी फूड मार्केट में नहीं बिकता BAT

सी फूड मार्केट में नहीं बिकता BAT

ऐसा माना जा रहा है कि कोरोना वायरस चमगादड़ से इंसानों में आया है और वुहान का वेट मार्केट इसका अहम सोर्स है। जी रोंग, जो चीनी दूतावास की प्रवक्‍ता हैं उन्‍होंने ट्वीट किया और इसे लेकर गलतफहमी दूर करने की कोशिश की। उन्‍होंने लिखा, 'चमगादड़ किसी भी चीनी व्‍यंजन का हिस्‍सा कभी नहीं रहे हैं। वुहान के हुनान का सी फूड मार्केट में चमगादड़ नहीं बिकता है। अभी तक कोरोना वायरस कहां से आया और इसका संक्रमण कैसे फैला इसकी पहचान नहीं हो सकी है।' उन्‍होंने इस बात से भी इनकार कर दिया कि चीन में किसी तरह का कोई ऐसा मार्केट है जिसे वाइल्‍डलाइफ वेट मार्केट के नाम से जाना जाता है।

वायरस को वुहान से जोड़ना गलत

उन्‍होंने यह भी लिखा कि वुहान में कोरोना वायरस का पहला केस आया मगर इसका मतलब यह नहीं है कि वायरस यहीं से निकला हो। जी रोंग ने अपनी ट्वीट्स में अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के उन आरोपों का भी जवाब दिया जिसमें उन्‍होंने कोरोना को 'चाइना वायरस' या फिर 'वुहान वायरस' बताया था। जी ने लिखा कि विश्व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के पास किसी भी महामारी को नाम देने के खास नियम हैं। ऐसे में वायरस को वुहान से जोड़ना या फिर चीन को दोषी ठहराना गलत है। जी रोंग Truth You Need to Know के साथ सारी ट्वीट कर रही थी।

कोरोना एक प्राकृतिक वायरस

उन्‍होंने अपनी एक ट्वीट में यह भी साफ किया कि वायरस को वुहान इंस्‍टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में तैयार नहीं किया गया था। जी ने वायरस को पूरी तरह से प्राकृतिक वायरस करार दिया है। कई अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि कोरोना वायरस को लैब में बनाया गया है। जी के मुताबिक इस बात के कोई सुबूत नहीं हैं कि इंस्‍टीट्यूट के किसी स्‍टाफ में कोरोना वायरस के लक्षण मिले हों। उन्‍होंने इसके साथ ही यह ट्वीट भी किया कि डॉक्‍टर झांग जिशियान पहली डॉक्‍टर थीं जिन्‍हें कोविड-19 केसेज का पता लगा था। उन्‍हें चीन की सरकार की तरफ से सम्‍मानित भी किया गया है। जबकि डॉक्‍टर ली वेनलियांग न तो व्‍हीस्‍लब्‍लोअर थे और न ही उन्‍हें कभी गिरफ्तार किया गया था।

अमेरिका ने चीन पर लगाए हैं कई आरोप

आपको बता दें कि अमेरिका की सेंट्रल इंटेलीजेंस एजेंसी (सीआईए) का मानना है कि चीन ने विश्‍व स्‍वास्‍थ्य संगठन (डब्‍लूएचओ) को जनवरी में कोरोना वायरस महामारी के बारे में अलर्ट जारी करने से रोकने की कोशिश की थी। इसी समय चीन ने दुनियाभर की मेडिकल सप्‍लाई को भी इकट्ठा करने में लगा हुआ था। सीआईए की एक रिपोर्ट के बारे में अमेरिका के दो इंटेलीजेंस अधिकारियों ने न्‍यूजवीक को पुष्टि की है। वहीं ट्रंप के राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) रॉबर्ट ब्रायन ने भी कहा है कि पिछले 20 सालों में चीन ने दुनिया को पांच महामारियां दी है।

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