शांति वार्ता के भाग्य में लिखी है नाकामी.. सऊदी के शांति प्रस्ताव पर चीन-रूस उलझे, पुतिन-जिनपिंग क्यों भिड़े?
Russia-China-Saudi Arab: सऊदी अरब में हुए शांति सम्मेलन को लेकर चीन और रूस आपस में भिड़ गये हैं और एक तरह जहां चीन ने शांति वार्ता करा समर्थन किया है, वहीं रूस ने कहा है, कि इस शांति प्रस्ताव के तकदीर में फेल होना लिखा है।
आपको बता दें, कि सऊदी अरब में यूक्रेन युद्ध की शांति के लिए हुए शिखर सम्मेलन में चीन के दूत ने भी हिस्सा लिया था, जबकि हैरानी की बात ये थी, कि इस शिखर सम्मेलन में रूस को ही आमंत्रितन नहीं किया गया था। बीजिंग ने सोमवार को यूक्रेन में शांति का फार्मूला खोजने के उद्देश्य से चल रही वार्ता की सराहना की, जिसे रूस ने "विफल होने के लिए अभिशप्त" बताया है।

शांति प्रस्ताव पर चीन बनाम रूस
रॉयटर्स ने चीनी विदेश मंत्रालय के एक बयान का हवाला देते हुए बताया है, कि चीन ने कहा कि खाड़ी साम्राज्य के बंदरगाह समुद्री शहर. जेद्दा में हुई दो दिवसीय बैठक ने संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान खोजने पर "अंतर्राष्ट्रीय सहमति को मजबूत करने" में मदद की है।
इस शिखर सम्मेलन में यूक्रेन, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय राज्यों और ब्रिक्स देशों के समूह सहित 40 से ज्यादा देशों को एक साथ लाया गया था और शायद रूस के सबसे शक्तिशाली सहयोगी, चीन के अलावा किसी पर भी इतनी करीबी नजर नहीं रखी गई।
रूस की सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, क्रेमलिन के अधिकारियों ने कहा, कि रूस को वार्ता के लिए आमंत्रित नहीं किया गया है, लेकिन वह उन पर नजर रख रहा है।
हालांकि, इस शिखर सम्मेलन से भविष्य में और अधिक चर्चा आयोजित करने की प्रतिज्ञा करने से ज्यादा और कुछ भी समाधान नहीं निकला, हालांकि यूक्रेन ने चीन की उपस्थिति को एक राजनयिक जीत के रूप में स्वीकार किया है।
बीजिंग ने जून में डेनमार्क में पिछले दौर की वार्ता से दूरी बना ली थी, लेकिन हाल के वर्षों में उसने सऊदी अरब के साथ संबंध मजबूत किए हैं।
जेद्दाह की मेज पर चीन को प्रमुख स्थान दिया गया था। सऊदी अरब की राज्य समाचार एजेंसी द्वारा प्रकाशित तस्वीरों में, सऊदी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मुसैद बिन मोहम्मद अल-आइबा अपने अमेरिकी समकक्ष, जेक सुलिवन और यूरेशियाई मामलों पर चीनी विशेष प्रतिनिधि ली हुई के बीच बैठे थे।
चीन के विदेश मंत्रालय ने एक लिखित बयान में रॉयटर्स को बताया, कि "ली ने यूक्रेन संकट के राजनीतिक समाधान पर सभी पक्षों के साथ व्यापक संपर्क पर बात की... सभी पक्षों की राय और प्रस्तावों को सुना और अंतरराष्ट्रीय सहमति को और मजबूत किया।"
बयान में कहा गया है, कि "सभी दलों ने ली हुई की उपस्थिति पर सकारात्मक टिप्पणी की और शांति वार्ता को सुविधाजनक बनाने में चीन की सकारात्मक भूमिका का पूरा समर्थन किया।" चीनी बयान में कहा गया है, कि बीजिंग यूक्रेन के लिए अपने 12-सूत्रीय प्रस्ताव के आधार पर बातचीत को मजबूत करने के लिए काम करना जारी रखेगा।
आपको बता दें, कि यूक्रेन संघर्ष में चीन एक तटस्थ पक्ष होने का दावा करता है, लेकिन नेता शी जिनपिंग ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अपने रिश्ते को गहरा कर दिया है और युद्ध पर क्रेमलिन की बयानबाजी को दोहराया है।
बीजिंग, जो पश्चिम के साथ अपने बढ़ते तनाव के बीच मास्को को एक प्रमुख भागीदार और प्रतिसंतुलन के रूप में देखता है, उसने पुतिन के आक्रमण की निंदा करने या यूक्रेन के क्षेत्र से रूसी सैनिकों की वापसी का आह्वान करने से इनकार कर दिया है, और क्रेमलिन पर पश्चिमी प्रतिबंधों में शामिल होने से इनकार कर दिया है।
फिलहाल इस बात को लेकर कोई संकेत नहीं हैं, कि शिखर सम्मेलन में चीन की उपस्थिति से रूस के प्रति उसके कट्टर समर्थन में कोई बदलाव आएगा या नहीं, लेकिन बीजिंग एक अंतरराष्ट्रीय शांतिदूत के रूप में देखे जाने के लिए उत्सुक है। कीव ने इस डेवलपमेंट की "सुपर सफलता" के रूप में प्रशंसा की है।
यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने शिखर सम्मेलन शुरू होने से पहले शुक्रवार को कहा, कि "सऊदी अरब ने चीन को आकर्षित किया है और यह एक ऐतिहासिक जीत है।"












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