LAC पर अब हिंदी को 'हथियार' बनाने की मुहिम में जुटा चीन, खुफिया रिपोर्ट में क्या है ? जानिए

नई दिल्ली, 4 मई: चीन की आर्मी ने अचानक से हिंदी के प्रति लगाव बढ़ा दिया है। चीनी सेना के अधिकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के चक्कर लगाकर लोगों को हिंदी में करियर बनाने की लालच दे रहे हैं। उन्हें बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी में हिंदी बोलने-समझने वालों की कितनी डिमांड बढ़ने वाली है। दरअसल, शातिर चीन का यह हिंदी प्रेम, उसकी बहुत बड़ी चाल की ओर इशारा कर रहा है। वह हिंदी के ऐसे दुभाषियों को जुटाने का अभियान शुरू कर रहा है, जो कि वास्तविक नियंत्रण रेखा से सटे इलाकों में उसे खुफिया सूचनाएं दे सकें।

हिंदी को 'हथियार' बनाने की मुहिम में जुटा चीन

हिंदी को 'हथियार' बनाने की मुहिम में जुटा चीन

न्यूज18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन की सेना पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) चीन के विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से फ्रेश ग्रैजुएट्स की भर्ती के फिराक में लगी है, जिनका इस्तेमाल वह हिंदी दुभाषिए के रूप में करना चाहती है। ताजा खुफिया सूचना के मुताबिक चीन की यह चाल ऐसे दुभाषियों को तिब्बत से सटे वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के आसपास इंटेलिजेंस जुटाने की उसकी मुहिम का हिस्सा है। जानकारी के मुताबिक चीन के वेस्टर्न थियेटर कमांड के तहत आने वाले तिब्बत मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट की योजना है कि वह इस साल जून तक इन हिंदी अनुवादकों की भर्ती का अभियान शुरू कर दे।

खुफिया सूचना जुटाने के लिए चीन की नई चाल

खुफिया सूचना जुटाने के लिए चीन की नई चाल

बता दें कि चीन के तिब्बत मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट के पास भारत के सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और उत्तराखंड से सटी एलएसी की जिम्मेदारी है और यह मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट उसके वेस्टर्न थियेटर कमांड का ही हिस्सा है, जिसके पास भारत के साथ लगने वाली उसकी सीमाओं का जिम्मा है। इसमें तिब्बत से सटी भारतीय सीमा शामिल है। वहीं शिंजिंयांग मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट भी इसी थियेटर कमांड के अधीन है, जो एलएसी के ऊपरी हिस्सों की निगरानी करता है, जिसमें हमारी लद्दाख से सटी वास्तविक नियंत्रण रेखा आती है।

अपने सैनिकों को भी हिंदी सिखा रही है पीएलए-रिपोर्ट

अपने सैनिकों को भी हिंदी सिखा रही है पीएलए-रिपोर्ट

जो खुफिया सूचना प्राप्त हुई है, उसके अनुसार तिब्बत मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट से जुड़े पीएलए के अधिकारियों ने पिछले दो महीनों में चीन के कई यूनिवर्सिटी और कॉलेजों की खाक छानी है और वहां जाकर पीएलए में हिंदी अनुवादकों के करियर की संभावनाओं को लेकर बड़े-बड़े लेक्चरर दिए हैं। पिछले कई महीनों से ऐसी खुफिया सूचनाएं भी मिल रही थीं कि पीएलए धड़ल्ले से उन तिब्बती नागरिकों की भर्ती कर रहा है, जो हिंदी बोल सकते हैं, ताकि उन्हें भारत की उत्तरी सीमाओं से लगे उसके कैंपों में पहुंचाया जा सके। यही नहीं, यह भी सूचना थी कि चीन की सेना अपने सैनिकों को भी हिंदी की ट्रेनिंग दे रही है, ताकि खुफिया जानकारी जुटा सके और इस मकसद से दूसरे कार्यों पर भी उन्हें लगा सके।

भारत में भी तिब्बतोलॉजी सिखाने पर जोर

भारत में भी तिब्बतोलॉजी सिखाने पर जोर

इससे पहले वन इंडिया ऐसी रिपोर्ट दे चुका है कि भारतीय सेना अपने अफसरों को कई संस्थानों में तिब्बतोलॉजी की ट्रेनिंग दे रही है। इस तरह की कोर्स के लिए सेना के अधिकारियों को स्टडी लीव देने की भी व्यवस्था की गई है। क्योंकि, भारतीय सेना के लिए पाकिस्तानी जुबान समझने में कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन, जब बात चाइनीज और तिब्बती भाषा की आती है, तो भारत-विरोधी कोई भी जानकारी हासिल करना बहुत मुश्किल हो जाता है। चीन और चीन की मनोवृत्ति को समझने के लिए ही तिब्बतोलॉजी की ट्रेनिंग की आवश्यकता महसूस की गई है। (तस्वीरें- प्रतीकात्मक)

'भाषा संस्कृति का रोड मैप है.....'

इसी महीने इंडियन आर्मी के पूर्वी कमांड के तहत आने वाली 'त्रिशक्ति कोर' ने एक आधिकारिक ट्वीट करके बताया था कि भारतीय सेना के अफसरों के एक बैच को सफलतापूर्वक तिब्बतोलॉजी की कोर्स कराई गई है। इसका कैप्शन था, 'भाषा संस्कृति का रोड मैप है.....' यह ट्रेनिंग गंगटोक में दी गई है। गौरतलब है कि इससे पहले ऐसी भी रिपोर्ट आ चुकी है कि 2020 के मध्य में लद्दाख की पैंगोंग झील के दक्षिण किनारों की चोटियों पर भारतीय सेना के स्पेशल दस्ते के हाथों बुरी तरह पिटने के बाद चीन ने अपनी सेना में तिब्बती नागरिकों की सीधी भर्ती का भी अभियान शुरू किया है। ताकि, वह तिब्बती युवाओं को लालच देकर बहका भी सके और लद्दाख के चुनौती भरे इलाके में खुद को ज्यादा सशक्त भी कर सके।

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