चीन की 'चतुर' चाल! गलवान में मारे गए सैनिकों के नाम पर रखे पुलों के नाम
चीन ने तिब्बत और शिनजियांग के दो क्षेत्रों को जोड़ने वाले हाईवे में पड़ने वाले कई पुलों का नाम पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के चार सैनिकों के नाम पर रखा गया है।
चीन (China) ने शिनजियांग और तिब्बत प्रांतों (Tibet-Xinjiang highway) को जोड़ने वाले राजमार्ग से लगे पुलों का नाम गलवान संघर्ष में मारे गए पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के सैनिकों (PLA) के नाम पर रखा है। सरकारी अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' के मुताबिक बीजिंग ने पुलों के साथ-साथ कुछ गांवों का नाम भी मारे गए चार सैनिकों के नाम पर रखा है। बता दें कि 2020 में गलवान घाटी में चीन और भारतीय सैनिकों के बीच खूनी संघर्ष हुआ था जिसमें दोनों पक्षों को भारी नुकसान हुआ था।

चीन ने मारे गए सैनिकों के नाम पर रखे पुलों के नाम
चीन की आधिकारिक मीडिया ने बताया कि, चीन ने शिनजियांग और तिब्बत प्रांतों (Tibet-Xinjiang highway) को जोड़ने वाले राजमार्ग से सटे पुलों और गांवों का नाम अपने उन चार सैन्य कर्मियों के नाम पर रखा है, जो 2020 में गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों के साथ संघर्ष में मारे गए थे। बीजिंग ने कहा कि, जिन पुलों का नाम उन्होंने मारे गए सैनिकों की याद में रखा है उनके कुछ हिस्सों अक्साई चीन से होकर गुजरते हैं।

चतुर चीन की चाल
'ग्लोबल टाइम्स' के मुताबिक इन सैन्यकर्मियों के नाम अब तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र से शिनजियांग उइगुर स्वायत्त क्षेत्र तक जी-219 राजमार्ग के साथ सड़क के संकेतक पर दिखाई देते हैं। खबर के मुताबिक मारे गए सैनिकों के गृहनगर के अलावा जी-219 राजमार्ग के साथ 11 पुलों का नामकरण इन सैन्यकर्मियों के नाम पर किया गया है।

2020 गलवान संघर्ष
सैनिकों की याद में स्थानों के नामकरण के कुछ दिन पहले चीनी सैन्य कमांडर क्यूई फाबाओ सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) की कांग्रेस में एक प्रतिनिधि के रूप में शामिल हुआ था। फाबाओ जून, 2020 में भारतीय सैनिकों के साथ गालवान घाटी में हुए संघर्ष में घायल हो गया था।

पूर्वी लद्दाख सीमा गतिरोध
भारत हमेशा से शांति का पक्षधर रहा है। भारत के मुताबिक वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है। भारतीय और चीनी सेनाओं ने लंबे समय से सीमा पर जारी गतिरोध को हल करने के लिए कोर कमांडर स्तर की 16 दौर की वार्ता की है। पैंगोंग झील क्षेत्रों में हिंसक झड़प के बाद पांच मई, 2020 को पूर्वी लद्दाख सीमा गतिरोध शुरू हुआ। खबर के मुताबिक पीएलए के गलवान संघर्ष के वीडियो फुटेज को सीपीसी की कांग्रेस उद्घाटन के दिन 16 अक्टूबर को ग्रेट हॉल ऑफ पीपल में एक बड़े स्क्रीन पर दिखाया गया था। इस वीडियो में फाबाओ भी दिखा था। बता दें कि, गलवान संघर्ष में कर्नल बी. संतोष बाबू समेत 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। चीन को भी भारी जनहानि हुई थी, लेकिन सचाई छिपाने की उसकी आदत के चलते उसने आज तक उसके मृत सैनिकों की सही संख्या नहीं बताई है।












Click it and Unblock the Notifications