China Space Mission: चीन ने अंतरिक्ष में किया बड़ा कमाल, जानें कैसे अमेरिका को दे दी भारी टेंशन
China Space Mission: चीन ने पिछले कुछ दशक में अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में काफी निवेश किया है। चीन स्पेस में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए कई अहम अभियानों पर काम कर रहा है। अमेरिका की रक्षा मामलों पर नजर रखने वाली वेबसाइट ब्रेकिंग डिफेंस (Breaking Defence) और अंतरिक्ष ट्रैकिंग कंपनियों स्लिंगशॉट एयरोस्पेस (Slingshot Aerospace) और कमर्शियल स्पेस ऑपरेशन सेंटर (COMSPOC) ने बड़ा दावा किया है।
इनके मुताबिक, 13 जून को अंतरिक्ष में एक ऐसी घटना दर्ज की गई है, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इस दिन चीन के दो सैटेलाइट्स SJ-25 और SJ-21 - कुछ घंटों तक बेहद करीब रहे थे। चीन के सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में रहते हुए रीफ्यूल (ईंधन भरना) किया गया है।

अमेरिका की अंतरिक्ष ट्रैकिंग कंपनियों ने किया दावा
अमेरिकी अंतरिक्ष ट्रैकिंग कंपनियां इस घटना को अभूतपूर्व मान रही है। ऐसा पहली बार हुआ है कि अंतरिक्ष में रहते हुए ही किसी सैटेलाइट रीफ्यूल (ईंधन भरना) किया गया हो। अगर चीन ऐसा करने में वाकई कामयाब रहा है, तो यह अमेरिकी अंतरिक्ष मिशन कार्यक्रमों के लिए बहुत बड़ा धक्का है। अमेरिका अब तक ऐसे शोध और तकनीक ईजाद करने में नाकाम रहा है। यह अंतरिक्ष कार्यक्रमों में अमेरिका की बादशाहत के लिए बड़े खतरे का संकेत है।
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13 जून को चीन ने अंतरिक्ष में रचा इतिहास
SJ-25 नामक चीनी उपग्रह को हाल ही में लॉन्च किया गया था। माना जा रहा है कि उसे इन-ऑर्बिट सर्विसिंग, विशेष रूप से रीफ्यूलिंग मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, 13 जून को यह SJ-21 के बेहद करीब पहुंचा, फिर दोनों एक साथ कुछ घंटों तक एक समान कक्षा में गतिशील रहे और बाद में अलग हो गए। हालांकि, चीन ने आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा है लेकिन सैटेलाइट ट्रैकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि सैटेलाइट की गतिविधियां ऐसी थीं जिसे देखकर लग रहा था कि ईंधन भरने जैसी प्रक्रिया संभव है।
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अंतरिक्ष विज्ञान में चीन बड़ी उपलब्धि दुनिया के लिए खतरा
चीन के सैटेलाइट रीफ्यूल करने को अंतरिक्ष विज्ञान में दिशा बदलने वाला कार्यक्रम माना जा रहा है। अब तक सैटेलाइट को सिंगल यूज़ माना जाता था। इसका मतलब है कि एक बार ईंधन खत्म होते ही वे काम करना बंद कर देते हैं और स्पेस कचरे में बदल जाते हैं। अगर चीन वाकई में रीफ्यूलिंग में सफल हुआ है, तो यह अंतरिक्ष तकनीक में क्रांतिकारी बदलाव है। इससे सैटेलाइट्स की उम्र बढ़ाई जा सकेगी। अंतरिक्ष मलबा काफी कम किया जा सकेगा और अरबों डॉलर की बचत होगी।
स्पेस एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह तकनीक सिर्फ रीफ्यूलिंग तक सीमित नहीं है। जिन रोबोटिक आर्म्स और सटीक मैन्युवर्स का उपयोग रीफ्यूलिंग के लिए किया गया थी, उन्हीं से दुश्मन देशों के सैटेलाइट को पकड़ना या निष्क्रिय करना भी संभव हो सकता है। हालांकि, यह सिर्फ शुरुआती अनुमान भर हैं, लेकिन अमेरिका और दूसरे देशों के लिए चिंता का विषय जरूर है। इससे पहले भी चीन ने अंतरिक्ष विज्ञान में नए प्रयोग करने की कोशिश की है। 2022 में SJ-21 ने एक निष्क्रिय सैटेलाइट को पकड़कर उसका ऑर्बिट बदला था। चीन ने उस वक्त इसे स्पेस कचरा हटाने का मिशन बताया था, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने इस पर शंका जाहिर की थी।
अमेरिका अंतरिक्ष विज्ञान की दिशा में छूट रहा है पीछे?
अमेरिका ने अब तक ऑन-ऑर्बिट रीफ्यूलिंग यानी कि स्पेस में रहते हुए सैटेलाइट में फिर से ईंधन डालने की तकनीक पर विचार किया है। इस दिशा में शोध भी चल रहे हैं। हालांकि, अब तक कोई बड़ी उपलब्धि हासिल नहीं की जा सकी है। अमेरिका के दो सैटेलाइट्स (USA 270 और 271) SJ-25 के आसपास कुछ दिन पहले देखे गए हैं। ऐसा लग रहा है कि चीन के स्पेस मिशन पर अमेरिका ने पैनी नजर रखे हुए है।












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