चीन ने पाकिस्तान को दिया है 48.5 अरब डॉलर का बेलऑउट पैकेज, जिन्ना का देश बन गया परमानेंट गुलाम?

पाकिस्तान, आईएमएफ से बेलऑउट पैकेज हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहा है और IMF ने पाकिस्तान को कहा है, कि वो सऊदी अरब, कतर और यूएईए जैसे देशों से लिखवा कर दें, कि वो पाकिस्तान की मदद करेंगे।

Chinese Loan to Pakistan

Chinese Loan to Pakistan: भारत से अलग होकर एक अलग इस्लामिक मुल्क बनने वाला पाकिस्तान, ऐसा लगता है कि चीन का परमानेंट गुलाम बन गया है। ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है, कि चीन ने पाकिस्तान को अभी तक 48.5 अरब डॉलर का बेलऑउट पैकेज दिया है, और पाकिस्तान के लिए इस रकम को चुकाना असंभव से कम नहीं है। मंगलवार को प्रकाशित एक स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है, कि चीन ने 2008 से 2021 के बीच 22 विकासशील देशों को आर्थिक संकट से उबारने के लिए 240 अरब डॉलर खर्च किए हैं, क्योंकि ज्यादातर देशों ने "बेल्ट एंड रोड" बुनियादी ढांचे के निर्माण में खर्च किए गए ऋणों को चुकाने के लिए संघर्ष किया है। इन देशों में पाकिस्तान और श्रीलंका भी शामिल हैं। लेकिन, असल सवाल पाकिस्तान को लेकर है, कि क्या पाकिस्तान कभी चीन का कर्ज चुका पाएगा?

चीन का स्थाई गुलाम बना पाकिस्तान

इस्लाम के आधार पर भारत से अलग होने वाला पाकिस्तान अब चीन का गुलाम बन चुका है और पाकिस्तान की नीतियों पर अब चीन का प्रभाव साफ देखा जा रहा है। ताजा मामला अमेरिका के डेमोक्रेसी कॉन्फ्रेंस का है, जिसमें पाकिस्तान ने यह कहकर भाग लेने से इनकार कर दिया, क्योंकि उसमें चीन और तुर्की को शामिल नहीं किया गया है। पाकिस्तान के लिए ये फैसला इसलिए हैरान करने वाला है, क्योंकि किसी और देश के लिए अपनी विदेश नीति का बदलना, समझ से परे है। पिछले साल पाकिस्तानी अखबार द ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट में कहा गया था, कि पाकिस्तान पर पब्लिक कर्ज बढ़कर उसकी जीडीपी का 87.5 प्रतिशत हो गया है और पाकिस्तान में जितना टैक्स कलेक्शन होता है, उसका 60 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा, वो कर्ज का ब्याज चुकाने में खर्च करता है। पाकिस्तान इस साल आईएमएफ से बेलऑउट पैकेज हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहा है और आईएमएफ अपनी शर्तों पर पाकिस्तान को नचा रहा है।

पाकिस्तान को सबसे ज्यादा चीनी लोन

पिछले साल अगस्त में अमेरिका के एक विश्वविद्यालय. विलियम एंड मैरी की एक शोध रिसर्च एडडाटा में पता चला था कि, साल 2018 के बाद से चीन ने अपने 900 अरब डॉलर के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव में बदलाव किया है और बीआरआई प्रोजेक्ट्स के लिए लोन देने की जगह, विदेशी मुद्रा की कमी से जूझने वाले देशों को लोन बांटे हैं। एडडाटा के कार्यकारी निदेशक ब्रैड पार्क्स ने कहा था कि, "चीन ने "परियोजना के लिए कर्ज देने से दूरी बनाते हुए भुगतान ऋण संतुलन की ओर और आपातकालीन बचाव ऋण देने की दिशा में महत्वपूर्ण तरीके से ध्यान दिया है।" एडडाटा ने ये रिपोर्ट सरकारी दस्तावेजों और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया है, जिसमें कहा गया है, कि साल 2018 के बाद से चीन ने सबसे ज्यादा कर्ज पाकिस्तान को दिया है।

पाकिस्तान और श्रीलंका, दोनों कर्ज जाल में फंसे

सरकारी दस्तावेजों और आधिकारिक दस्तावेजों से पता चला है कि, सरकारी स्वामित्व वाले चीनी बैंकों ने जुलाई 2018 से पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक को अल्पकालिक ऋण के तौर पर 21.9 अरब डॉलर का ऋण दिया है, जबकि अक्टूबर 2018 से श्रीलंका को ज्यादातर मध्यम अवधि के ऋण के तौर पर चीन ने 3.8 अरब डॉलर का कर्ज दिया है। ये कर्ज चीन के 48.5 अरब डॉलर के बेलऑउट पैकेज में शामिल है। आसान शब्दों में समझें, तो पाकिस्तान को कुल साढ़े 48 अरब डॉलर का कर्ज चीन को चुकाना है और इसमें ब्याज अलग से है। रिपोर्ट से पता चला है, कि चीन ने जिस तरह से कर्ज बांटा है, उससे पता चलता है, कि चीन अब खुद को आईएमएफ के विकल्प के तौर पर प्रस्तुत कर रहा है और जब कुछ छोटे देश कर्ज के जाल में फंस जाते हैं, तो फिर उनका भुगतान संतुलन बनाने के लिए चीन उन्हें बेलऑउट पैकेज देता है। हालांकि, चीन जो कर्ज देता है, वो आईएमएफ या विश्व बैंक की तरह किफायती दरों पर नहीं होता है, जिसकी तुलना आमतौर पर बीआरआई उधार से की जाती है।

चीन के कर्ज जाल में क्यों फंसते हैं छोटे देश?

रिपोर्ट में कहा गया है कि, अमेरिकी बैंकों ने लगातार ब्याज दरों में इजाफा किया है और इस दौरान वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में भी काफी ज्यादा इजाफा हुआ है, जिसकी वजह से विकासशील देशों से काफी तेजी से विदेशी मुद्रा बाहर निकला है, लिहाजा विकासशील देशों का खजाना तेजी से खाली होता चला गया है, ऐसे में छोटे देशों के पास चीन के सामने हाथ फैलाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं होता। एक तरह से कहें, तो चीन दुनिया का नया क्रूर साहुकार बन चुका है। बैंक के शोधकर्ताओं के मुताबिक, चीन ने लगभग 60% विदेशी कर्ज उन देशों को दिया है, जो अब ऋण संकट में हैं। इन देशों में पाकिस्तान और श्रीलंका के अलावा अर्जेंटीना भी शामिल है, जहां पर साप्ताहिक महंगाई बढ़कर 85 प्रतिशत से ज्यादा हो चुका है। वहीं, पाकिस्तान में मुद्रास्फीति 48 प्रतिशत के करीब है।

पाकिस्तान को चीन ने कैसे दिया कर्ज?

पाकिस्तान ने चीन से उस समय विशालकाय कर्ज लेना शुरू किया, जब पाकिस्तान की आयात लागत और विदेशी मुद्रा भंडार के बीच काफी तेजी से वृद्धि होने लगी। उसकी वजह से पाकिस्तान को साल 2017 में अपने अंतर्राष्ट्रीय भुगतानों को संतुलित करने में समस्याओं का सामना करना पड़ा। संकट ने पाकिस्तान को आईएमएफ के साथ लंबी बातचीत को प्रेरित किया और आईएमएफ ने पाकिस्तान को लोन देने के लिए कई तरह की शर्तें रख दीं। आईएमएफ के आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान के विदेशी कर्ज का लगभग 27% चीन का है, जो उसने बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के नाम पर लिया है और वो तमाम परियोजनाएं धूल फांक रही हैं, लेकिन हैरानी की बात ये है, कि जिन परियोजनाओं के लिए पाकिस्तान ने चीन से कर्ज लिए, उन परियोजनाओं पर काम ही नहीं शुरू हुआ है, और पाकिस्तान पैसे उठा चुका है। वहीं, आंकड़ों की बात करें, तो आईएमएफ का लोन 10 से 20 सालों के लिए होता है और ब्याज दरें काफी कम होती हैं, लेकिन चीन ये कर्ज 3 से 5 सालों के लिए उच्च ब्याज दरों पर बांटता है। एडडाटा के अनुसार, पाकिस्तान को चीन ने आपातकालीन ऋण सिर्फ एक से 3 सालों की अवधि के लिए ही दिया है। जिसे चुकाने में पाकिस्तान नाकाम हो रहा है।

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