चीन ने अपने राष्ट्रगान की पहली पंक्ति पर लगाया बैन, भीषण आर्थिक संकट से घबराए शी जिनपिंग

12 जुलाई को चायनीज पुलिस ने बैंक से पैसे लेने आए सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को बुरी तरह से पीटा और सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया, उन्हें धमकाया गया।

हांगकांग, जुलाई 25: इसमें कोई शक नहीं है, कि चीन बहुत बड़े आर्थिक संकट में फंसा हुआ है और चीन की आर्थिक मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पिछले दिनों तो रिपोर्ट ये भी आई थी, कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने जनता के विद्रोह को कुचलने के लिए और अपने बैंकों को बचाने के लिए सड़क पर टैंकों को उतार दिया था और उसकी तस्वीरों ने पूरी दुनिया को डरा दिया, क्योंकि 1989 में चीन हजारों छात्रों को टैंक से उड़ा चुका है। लेकिन, असल स्थिति इससे भी ज्यादा खतरनाक है और चीन की अर्थव्यवस्था अब कम्युनिस्ट पार्टी के मुखिया शी जिनपिंग से संभाले नहीं संभल रही है।

चीन ने वीडियो को बताया झूठा

चीन ने वीडियो को बताया झूठा

चीन की तरफ से जो रिपोर्ट आ रही है, उनमें कहा गया है कि,हेनान प्रांत की सड़कों पर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के जो टैंक देखे गये थे, असल में उन्हें बैंकों को बचाने के लिए सड़कों पर नहीं उतारा गया था, बल्कि उन टैंकों को कहीं और भेजा जा रहा था और देश में आई बैंकिंग संकट से उनका कोई लेना देना नहीं है। पहले ये दावा किया गया था, कि पीएलए 17 जुलाई को हेनान की राजधानी झेंग्झौ की सड़कों पर टैंकों की तैनाती कर रहा है, ताकि बैंक शाखाओं को नाराज निवेशकों से बचाया जा सके, जिनके खाते फ्रीज हो गए थे। रिपोर्ट आई थी, कि चीनी अधिकारियों ने विरोध को कुचलने के लिए सेना को सक्रिय रूप से तैनात कर दिया है। इस रिपोर्ट के आने के बाद दुनियाभर के हजारों लोगों ने इसे 1989 में तियानमेन की घटना से जोड़ कर ट्वीट करने लगे। रिपोर्ट्स में कहा गया था कि, बैंक ऑफ चाइना की हेनान शाखा ने घोषणा की कि उनकी शाखा में लोगों की बचत अब 'इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट' है और इसे वापस नहीं लिया जा सकता है।"

क्यों झूठ बोल रहा है चीन?

क्यों झूठ बोल रहा है चीन?

चीन की तरफ से कहा गया है कि, दरअसल, इन टैंकों को पूर्वी प्रांत शेडोंग के तटीय शहर रिझाओ भेजा रहा था, लेकिन चीन का दावा इसलिए भी झूठा है, क्योंकि हेनान प्रांत से रिझाओ की दूरी 400 किलोमीटर से दूर है और मिलिट्री जानकारों का कहना है, कि टैंक को सड़कों के जरिए इतनी ज्यादा दूर तक नहीं ले जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, रिझाओ में चीन की नेवी है, लेकिन वहां पर ZTZ-96A टैंक और ZBD-04 की जरूरत ही नहीं होती है और ZTZ-96A टैंक और ZBD-04 टैंक की असल जरूरत चीन के पूर्वी थियेटर कमांड में होती है, लेकिन चीन की तरफ से कहा गया, कि ये टैंकों का काफिला सैन्य अभ्यास का हिस्सा था। लेकिन, चीन इस बात को नकार नहीं पाया, कि बैंक ग्राहक झेंग्झौ में सड़कों पर उतर आए थे। उन्होंने अपेक्षाकृत उच्च ब्याज दरों की पेशकश करते हुए छह हेनान और अनहुई ग्रामीण बैंकों में खाते खोले थे, लेकिन बाद में खबर आने के बाद कई लोगों को बैंक पैसे नहीं दे रहा है, जबकि बैकों की मूल कंपनी पर प्रमुख वित्तीय अपराधों को अंजाम देने के आरोप हैं।

प्रदर्शनकारियों पर थर्ड डिग्री

प्रदर्शनकारियों पर थर्ड डिग्री

12 जुलाई को चायनीज पुलिस ने बैंक से पैसे लेने आए सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को बुरी तरह से पीटा और सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया, उन्हें धमकाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, चायनीज बैंक से करीब 6 अरब डॉलर गायब हो गये हैं, जिन्हें जनता ने जमा करवाया था और अब बैंक ने कह दिया है कि, लोगों को उनका पैसा नहीं मिलेगा, क्योंकि पैसे खो गये हैं। वहीं, कोविड 19 के दौरान लोगों के प्रदर्शन को कुचलने वाले शी जिनपिंग इस बार भी प्रदर्शन को कुचलने के लिए हर दांव आजमा रहे हैं, लेकिन इस बार थोड़ा मुश्किल हो रहा है, क्योंकि लोगों के पैसे सरकार ने ही चोरी कर लिए हैं और लाख कोशिश के बाद भी चीन के सोशल मीडिया वीबो पर ये प्रदर्शन टॉप ट्रेंड करने लगता है।

राष्ट्रगान की पहली पंक्ति बजाने पर रोक

राष्ट्रगान की पहली पंक्ति बजाने पर रोक

चीन की सरकार ने हद तो तब कर दिया, जब चीन के सोशल मीडिया पर देश के राष्ट्रगान की पहली पंक्ति को बजाने पर बैन लगा दिया गया। चीन के राष्ट्रगान की पहली पंक्ति कहता है, 'खड़े हो जाओ! जो तुम्हें गुलाम बनाने की कोशिश करते हैं, उनके खिलाफ खड़े हो जाओ'। यानि, चीन की सरकार के लिए चीन का राष्ट्रीय गान ही मुसीबत बन गया है, क्योंकि लोग अपने राष्ट्रीय गान से प्रेरित होकर सरकार के खिलाफ खड़े हो रहे हैं। चूंकी कोविड 19 के दौरान बार इस शहर में 30 बार से ज्यादा सख्त लॉकडाउन लगाए गये हैं, लिहाजा अब लोगों का सब्र जवाब दे गया है। हेनान प्रांत चीन के सबसे बड़े प्रांत में से एक है और उसकी आबादी करीब 24 करोड़ है और इस प्रांत में चीन ने 30 बार से ज्यादा लॉकडाउन लगाए, लिहाजा अब लोग सरकारी अधिकारियों की बात सुनने के लिए तैयार नहीं हैं। वहीं, चीन की सरकार के बांडों से विदेशी बहिर्वाह ने जून में बिक्री के पांचवें सीधे महीने में एक रिकॉर्ड बनाया।

शी जिनपिंग के आर्थिक मॉडल पर सवाल

शी जिनपिंग के आर्थिक मॉडल पर सवाल

संयुक्त राज्य अमेरिका में द जेम्सटाउन फाउंडेशन थिंक-टैंक के एक वरिष्ठ फेलो विली वो-लैप लैम ने कहा कि, "चीन में बुरी आर्थिक खबरों के निरंतर प्रवाह ने न केवल शी जिनपिंग नेतृत्व की शासन क्षमता को संदेह में डाला है, बल्कि यह भी उजागर किया है कि, चीनी आर्थिक मॉडल की व्यावहारिकता पर भी सवाल खड़े होते हैं। क्योंकि चीन में बाजार पर एक पार्टी का नियंत्रण है, लिहाजा चीन के बाजारों में अंतर्राष्ट्रीय पहुंच काफी सीमित है।" आपको बता दें कि, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का हालिया व्यवहार एक कट्टर माओवादी और सनकी नियंत्रक जैसा हो गया है, जो अब खुद को चीन का सर्वेसर्वा मानता है और जो इस साल तीसरी बार राष्ट्रपति बनने वाले हैं। हालांकि, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) की सुनियोजित प्रचार मशीन के बावजूद, शी जिनपिंग के पास अब अपनी उपलब्धि बताने के लिए मिट्टी का ढेर बचा है, जिन्होंने चीन को पूरी दुनिया में बदनाम कर दिया है और दूसरे देशों में चीन के नागरिकों का रहना काफी मुश्किल हो गया है, क्योंकि उन्हें संदेश से देखा जाता है। वहीं, आगे स्थिति और भी ज्यादा खराब होने की संभावना दिख रही है।

जिनपिंग के मुख्य विरोधी की एंट्री

जिनपिंग के मुख्य विरोधी की एंट्री

कोविड नियंत्रण के बाद आर्थिक संकट से निपटने में रहने के बाद शी जिनपिंग को अपने बड़े विरोधी और चीन के प्रधानमंत्री ली केकियांग को फिर से केन्द्र में लाने के लिए मजबूर कर दिया है। ली केकियांग को शी जिनपिंग का राजनीतिक दुश्मन माना जाता है, जिनके हाथों में देश की अर्थव्यवस्था सुधारने की चुनौती दी गई है। हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है, कि शी जिनपिंग की राजनीतिक पकड़ कमजोर हुई है, लेकिन उन्होंने अपनी छपि माओ जैसी जो बनाई थी, वो कमजोर जरूर हुई है।

चीन का आर्थिक संकट कितना गंभीर है?

चीन का आर्थिक संकट कितना गंभीर है?

चीन का आर्थिक संकट काफी गंभीर है और साल 2022 की दूसरी तिमाही में इसकी अर्थव्यवस्था सिर्फ 0.4% बढ़ी है। भले ही बीजिंग द्वारा जारी किए गए किसी भी आधिकारिक आंकड़ों पर विश्वास करना मुश्किल है, फिर भी यह संख्या पिछले 30 वर्षों में दूसरी सबसे खराब आर्थिक वृद्धि को दिखाता है। चीन पहले ही घोषणा कर चुका है, कि इस साल जीडीपी 5.5% बढ़ेगी, इसलिए शी ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि ऐसा होना ही चाहिए। लेकिन, ज्यादातर पश्चिमी विश्लेषकों का अनुमान है कि चीनी वार्षिक जीडीपी वृद्धि 3% के आसपास रह सकत ही। चीन में स्थिति काफी गंभीर दिख रही है। सिर्फ पहली तिमाही में चीन में करीब चार लाख 60 हजार छोटे और मध्यम उद्यम बंद हो चुके हैं और जून महीने में 16 से 24 आयुवर्ग के बेरोजगारों का आंकड़ा 19.3 प्रतिशत तक जा पहुंचा है, जो शी जिनपिंग की टेंशन बढ़ाने के लिए काफी है। और चूंकी चीन में लोगों के पास बोलने की आजादी नहीं है, ऐसे में जब लोगों के अंदर का गुस्सा फूटता है, तो वो सैलाब लाने के लिए काफी होता है।

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