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China Debt Trap: कर्ज के जाल में फंसता जा रहा बांग्लादेश, चीन को देने पड़े बंदरगाह, भारत के लिए टेंशन!

China Debt Trap: चीन की मजबूती फिर से दक्षिण एशिया में बढ़ती नजर आ रही है। हाल ही में चीन ने बांग्लादेश के मोंगला बंदरगाह विस्तार और विकास के लिए पूर्ण रूप से समझौता किया है। यह प्रोजेक्ट लगभग 400 मिलियन डॉलर का है, जिसका उद्देश्य बंदरगाह के आधुनिकीकरण और विस्तार को नई दिशा देना है। इस परियोजना को पूरा करने की जिम्मेदारी चीन की सरकारी कंपनी चाइना हार्बर इंजीनियरिंग कंपनी (China Harbour Engineering Company) को सौंपी गई है।

भारत की बढ़ेगी टेंशन!

भारत ने साल 2018 में मोंगला बंदरगाह मार्ग का इस्तेमाल अपने पूर्वोत्तर राज्यों - जैसे त्रिपुरा, मेघालय आदि - तक सामान पहुँचाने के लिए किया था। तब भारत इस पोर्ट का प्रमुख व्यापारिक उपयोगकर्ता था। लेकिन अब स्थिति बदल रही है, क्योंकि चीन ने इस बंदरगाह के निवेश और विकास की पूरी जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली है। इससे भारत की रणनीतिक और आर्थिक चिंताएँ बढ़ना स्वाभाविक है।

China Debt Trap

क्या है चीन का असली इरादा?

अब सवाल यह उठता है कि आखिर चीन का इरादा क्या है? चीन और बांग्लादेश के बीच हुआ यह समझौता सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच समुद्री मार्ग को सबसे आसान और लाभकारी माना जा रहा है, क्योंकि मल्लका बंदरगाह के जरिए चीन और बांग्लादेश भारत के रास्ते हिंद महासागर तक पहुँच सकते हैं। यह मार्ग चीन के समुद्री सिल्क रूट (Maritime Silk Route) की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

BCIM कॉरिडोर से मजबूत होते आर्थिक रिश्ते

इस समझौते का एक और पहलू यह है कि बांग्लादेश दक्षिण एशियाई बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। इसके लिए वह BCIM (Bangladesh, China, India, Myanmar) कॉरिडोर के माध्यम से क्षेत्रीय व्यापारिक संबंधों को मजबूत कर रहा है। चीन की सहायता से टैक्स-फ्री ट्रेड और पश्चिमी व्यापारिक गलियारों (Western Corridors) को सक्रिय कर आर्थिक विकास को गति देने का प्रयास किया जा रहा है।

कर्ज के जाल में फंसाने की रणनीति?

हालांकि विशेषज्ञ इसे चीन की पारंपरिक नीति से जोड़कर देख रहे हैं। कई विश्लेषकों का मानना है कि चीन का असली उद्देश्य बांग्लादेश को कर्ज के जाल (Debt Trap) में फंसाकर अपनी पैठ जमाना है। बांग्लादेश की आर्थिक स्थिति अभी भी कमजोर है; उसकी प्रति व्यक्ति आय पाकिस्तान से भी कम बताई जाती है। ऐसे में चीन की भारी निवेश नीति बांग्लादेश के लिए दीर्घकाल में जोखिम भरी साबित हो सकती है।

गरीब देशों पर नियंत्रण की पुरानी नीति

चीन की पुरानी नीति हमेशा से यही रही है - "गरीब देशों को कर्ज दो और बदले में उनकी जमीन या संसाधनों पर कब्जा करो।" श्रीलंका का हंबनटोटा बंदरगाह इसका ताज़ा उदाहरण है। अब बांग्लादेश में भी वैसी ही स्थिति बनती दिख रही है, जहाँ चीन की आर्थिक उन्नति और बांग्लादेश की गरीबी के बीच संतुलन बनाना कठिन हो सकता है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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