'सेक्स ना बदलना उस वक्त मरने जैसा था...'

Posted By: BBC Hindi
Subscribe to Oneindia Hindi
For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS
For Daily Alerts

    एलन प्राथमिक स्कूल की पहली बच्ची थी जिसका ब्रिटेन में पहली बार लिंग परिवर्तन होना था। लेकिन, उसकी कहानी सही कपड़े पहनने से कहीं ज्यादा गहरी है। उसके लिए लिंग परिवर्तन जिंदगी या मौत का सवाल था, यह अपनी सही पहचान ढूंढने की खोज थी और जो वो महसूस करती है वो होने की इजाज़त थी।

    एलेन
    BBC
    एलेन

    पढ़िए एलन की कहानी उन्हीं की ज़बानी

    मुझे लगता है कि मेरे आसपास के लोग सोचते होंगे कि मैं एक संवदेनशील और दिलचस्प नौजवान हूं जो समलैं​गिक बनने जा रहा है। लंबे समय तक मैं भी यही सोचती थी। स्कूल ही वो जगह थी जहां जाकर मेरे लिए जीवन बेहद मुश्किल हो गया क्योंकि घर पर मैं वैसे रह सकती थी जैसी मैं हूं। मैं जैसे कपड़े पहनना चाहती थी, वैसे पहनती थी और मेरे परिवार को इसे लेकर कोई दिक्कत नहीं थी।

    स्कूल में हुई अलग-थलग

    दूसरों ने इस अंतर पर ध्यान देना शुरू किया और इस पर बोलने लगे। स्कूल में मेरी पहचान अजीब, विचित्र, समलैंगिक लड़के के रूप में बन गई थी। शायद आंतरिक तौर पर मैं जानती थी कि मैं एक समलैंगिक नहीं थी लेकिन पांच साल की उम्र में आप ये नहीं जानते कि उन भावनाओं को कैसे ज़ाहिर करना है।

    मुझे लगातार चिढ़ाया जाता था और लोग कहते थे कि मैं उनसे अलग थी और मुझे अलग हो जाना चाहिए। मुझे लगता था कि मुझे अपने शरीर में कुछ सही महसूस नहीं होता है और मेरे दिमाग में ऐसा कुछ है जिसके कारण दोनों में समन्वय नहीं बन पा रहा है... मैं कौन हूं ये जानने के लिए मुझे क्या करने की जरूरत है?

    मुझे अहसास हुआ कि जब मैं खुश थी कि मेरे कपड़े और जीने का अलग तरीका था। मुझे अच्छा लगता था कि जब मैं स्कूल से घर आऊंगी और मेरे पास लड़कियों के कपड़ों से भरी अलमारी होगी। मैं स्कूल से आकर वो ड्रेस पहनकर घूमुंगी। हालांकि, उन्हें जल्द ही यह अहसास हो गया कि लड़कियों के कपड़े उसके लिए सिर्फ बच्चों का खेल था। यह वो तरीका था जिसे अपनाकर वो कुछ और होना चाहती थी।

    आत्महत्या की कोशिश

    एलेन
    BBC
    एलेन

    घर के अंदर मैं असल एलन थी लेकिन घर के बाहर मैं एक गुस्सैल और दुखी लड़का थी, जिसे कभी अच्छा महसूस नहीं होता था। मुझे याद है कि मैं कैसे अपनी मां से कहती थी, 'मैं बड़ी होकर क्या बनूंगी? और मेरी मां जवाब देती थीं, 'जो तुम बनना चाहती हो, तुम बन सकती हो।'

    यह सुनते ही मेरे चेहरे पर चमक आ गई और मैंने कहा, 'क्या मैं एक लड़की हो सकती हूं? हमेशा के लिए?' और मेरी मां ने तुरंत कहा, 'नहीं, नहीं, बेवकूफी वाली बातें मत करो, इसे भूल जाओ।' मैं बहुत हताश हो गई थी, मैं घर से बाहर नहीं जा रही थी, मुझे छोटी-छोटी बातों बहुत डर लगता था जिन्हें मैं ज़ाहिर भी नहीं कर सकती।

    मैंने सात साल की उम्र में खुद को चाकू से मारने की कोशिश की और खुद को नुकसान पहुंचाने ही वाली थी। मैं उलझन में थी, मैं सबकुछ खत्म करना चाहती थी। मुझे लगता था कि ये ज्यादा आसान होगा कि मैं सभी के लिए मुसीबत न बनूं।''

    माता-पिता ने बताया सच

    एलेन
    BBC
    एलेन

    स्थितियों के इतना खराब होने पर एलन के माता-पिता को अहसास हुआ कि उन्हें अपने बेटे के लिए कुछ करना चाहिए।उन्होंने इस मसले पर जानकारी बटोरी और पाया कि इस स्थिति को जेंडर डिस्फोरिया कहते हैं। उन्होंने मुझे बैठाया और बताया कि उन्होंने ऑनलाइन क्या पढ़ा है। मैं ये सुनकर हैरान हो गई। ये बिल्कुल वही था जो मैं अपने अंदर महसूस करती थी लेकिन कभी ठीक से बता नहीं पाती थी।

    उन्होंने इस बारे में और जानने की कोशिश की और उन्हें मरमेड्स नाम की एक संस्था मिली। ये 10 साल पहले की बात है और वो मेरे लिए जीवनदान जैसी थी। मुझे सच में यह लगता है कि अगर मैं पहले की तरह जी रही होती तो मैं आज यहां नहीं होती क्योंकि जिस झूठ में मैं जी रही थी, उसे बनाए रखना संभव नहीं था।

    तब मेरे परिवार ने मेरा लिंग बदलने पर विचार करना शुरू किया। ये मेरे और मेरे परिवार के लिए एक बहुत मुश्किल फैसला था। उन्हें मेरी सुरक्षा और खुशी की चिंता थी।

    परिवार शुरू की तैयारी

    मेरे माता-पिता ने मेरे स्कूल में बात की, मैं प्राथमिक स्कूल में थी और 11 साल की थी और मेरा स्कूल इसे स्वीकार कर सकता था। लेकिन, ये उनके लिए बिल्कुल नहीं चीज थी- उनके पास कोई साधन या प्रशिक्षण नहीं था। उन्होंने मुझे इसके लिए तैयार होने के लिए एक हफ्ते की छुट्टी दी।

    मुझे डर लग रहा था। मेरे घरवालों ने कहा कि मुझ पर ऐसा करने के लिए कोई दबाव नहीं है लेकिन मैंने कहा, 'मैं ऐसा करना चाहती हू।' प्राथमिक स्कूल के आखिरी महीनों में मैं एक लड़की के तौर पर स्कूल गई। बात जब मीडिया तक पहुंची तो मैं ब्रिटेन में सबसे कम उम्र की ट्रांसेक्सुअल बन गई। मैं और मेरा परिवार मीडिया के केंद्र में आ गया। मैंने कानूनी तौर पर अपना नाम बदला और एक लड़की के तौर पर रहना शुरू कर दिया।

    लिंग बदलकर भी मुश्किलें आईं

    मैं सैकेंड्री स्कूल में गई। वहां मेरे पुराने स्कूल के कुछ बच्चे भी थे। वो जानते थे कि मैंने अपना लिंग बदलवाया है। इसके बाद फिर से अफवाहें फैलने लगीं और मैं फिर से अकेली पड़ गई। अब मैं स्कूल में नहीं जा सकती थी। मैंने कई बार आत्महत्या करने की भी कोशिश की थी। मुझे एक मनोरोग अस्पताल में भर्ती किया गया। लेकिन, 18 साल की उम्र में मेरा एक और ऑपरेशन हुआ. इसने मेरी ज़िंदगी बदल दी।

    मुझे हमेशा डर लगता था कि कहीं कोई मेरे अतीत के बारे में न जान ले। मैं उस मानसिक परेशानी को पीछे छोड़ देना चाहती हूं। मैं दिलचस्पी और रचनात्मकता के साथ अब भी एक इंसान हूं। मैं अपनी कहानी से कहीं ज्यादा हूं।

    (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

    जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

    BBC Hindi
    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
    English summary
    'Changing my sex was like dying at that time '.

    Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
    पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

    X