दुनिया पर राज करेगा भारतीय रुपया, ब्राजील और द. अफ्रीका से इंपोर्ट होने वाले सामानों की रुपये में होगी पेमेंट
संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया के साथ स्थानीय मुद्रा में व्यापार के बाद अब भारत ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ भी रियल टाइम पेमेंट सिस्टम और भारतीय रुपए में व्यापार की दिशा में बातचीत कर रहा है।
मनीकंट्रोल ने एक सरकारी अधिकारी के हवाले से लिखा है कि यह रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण की भारत की योजना की पृष्टभूमि में आता है। अधिकारी के अनुसार, ब्राजील, अर्जेंटीना, दक्षिण अफ्रीका, सेनेगल और तंजानिया जैसे देशों संग इस बारे में बातचीत कर रही है।

अधिकारी न कहा कि अब सरकार की कोशिश हैं कि सबसे पहले छोटे देशों को रुपये में भुगतान स्वीकार करने के लिए तैयार किया जाए। अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "अगर हमें रुपये के व्यापार को बढ़ावा देना है, तो हमें छोटे देशों से शुरुआत करनी होगी जहां रुपये के अंतर्राष्ट्रीयकरण को बढ़ावा देना आसान होगा।" उन्होंने कहा कि प्रस्ताव प्रारंभिक हैं और इस पर आगे चर्चा की आवश्यकता होगी।
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2022-2023 तक, भारत का तंजानिया और ब्राजील के साथ व्यापार अधिशेष क्रमशः 1.39 बिलियन डॉलर और 3.25 बिलियन डॉलर है। इसी समयावधि के दौरान दक्षिण अफ्रीका, सेनेगल और अर्जेंटीना के साथ व्यापार घाटा न्यूनतम है।
मनीकंट्रोल की पिछली रिपोर्टों के अनुसार, सरकार पहले उन देशों के साथ पहले समझौते पर हस्ताक्षर करना चाहती है जिनके साथ द्विपक्षीय मुद्रा निपटान योजना के तहत व्यापार और बढ़ने की संभावना है। इसके अतिरिक्त उन देशों के लिए जिनके साथ व्यापार संतुलित है। अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों के साथ भारत का व्यापार संतुलन में है।
भारत इन देशों को मुख्यतः अनाज, इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स और पेट्रोलियम उत्पाद आदि निर्यात करता है। जबकि भारत, ब्राजील और अर्जेंटीना से खाद्य तेल का आयात करता है। दक्षिण अफ्रीका से भारत उर्वरक, कपास और खिलौने आयात करता है। वहीं, सेनेगल को भारत चावल निर्यात करता है। इसके अलावा सेनेगल और तंजानिया हीरे और आभूषणों की मांग को पूरा करते हैं।
पिछले महीने भारत ने यूएई संग स्थानीय मुद्रा में व्यापार का ऐलान किया था। इस दौरान दोनों देश रुपये और दिरहम में व्यापार करने पर सहमत हुए थे। इसके अलावा जुलाई के मध्य में इंडोनेशिया के साथ भी रियल टाइम पेमेंट सिस्टम और स्थानीय मुद्रा में व्यापार पर चर्चा की गई थी।
रिपोर्टों के अनुसार, भारत अपनी स्थानीय मुद्रा निपटान योजना के लिए बांग्लादेश और श्रीलंका पर भी विचार कर रहा है क्योंकि दोनों पड़ोसी देश मुद्रा की कमी का सामना कर रहे हैं।












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