हिंद महासागर में कहां भटक गई 180 रोहिंग्या शरणार्थियों से भरी बोट? पिछले महीने चली थी, आखिरी संपर्क भी टूटा
हिंद महासाहर में 180 रोहिंग्या शरणार्थियों से भरी नाव डूबने की आशंका बढ़ गई है। नाव में खाना और पानी खत्म हो चुका था। यह नाव पिछले महीने ही म्यामांर से बांग्लादेश के लिए चली थी

हिंद महासागर से रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर एक और बुरी खबर आने की आशंका बढ़ गई है। ये शरणार्थी पिछले महीने ही म्यांमार से जान बचाकर भागे थे, लेकिन रास्ते में इनकी नाव अपने रास्ते से भटक गई थी। अब आशंका जताई जा रही है कि शायद यह बोट समुद्र में डूब चूकी है और इसपर सवार सारे रोहिंग्याओं की मौत हो चुकी है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र की संस्था UNHCR को अभी भी उम्मीद है कि कोई अच्छी खबर आ जाए। हालांकि, बोट पर सवार रोहिंग्याओं के रिश्तेदारों ने उम्मीद छोड़ दी है।

हिंद महासागर में 180 रोहिंग्या शरणार्थियों का क्या हुआ ?
हिंद महासागर में हफ्तों से भटक रही एक नाव पर सवार 180 रोहिंग्या शरणार्थियों के बारे में आशंका जताई जा रही है कि अब उनकी मौत हो चुकी है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी संस्था ने यह आशंका जताई है। न्यूज एजेंसी एएफपी के मुताबिक इस बोट के बारे में माना जा रहा है कि वह पिछले महीने ही रवाना हुई थी। लेकिन, थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, भारत के अंडमान द्वीप और मलक्का जलडमरूमध्य के आसपास कहीं पर इसमें पानी भरने की सूचना मिली थी, जो कि दुनिया के व्यस्ततम जलमार्गों में से एक है। म्यामांर में मुख्य रूप से मुस्लिम रोहिंग्या प्रताड़ना का शिकार होकर समुद्र के खतरनाक रास्ते से निकल भागने का जोखिम लेते हैं। वह म्यामांर और बांग्लादेश के शरणार्थी कैंपों से निकलकर विशेष रूप से मलेशिया और इंडोनेशिया पहुंचने की कोशिश करते हैं।

रिश्तेदारों का संपर्क टूट चुका है- UNHCR
रविवार को UNHCR ने ट्विटर पर लिखा, 'रिश्तेदारों का संपर्क टूट चुका है। जो सबसे बाद में संपर्क में थे, उन्हें लगता है कि सभी मर चुके हैं। हम उम्मीदों के विपरीत आशा करते हैं कि इस मामले में ऐसा नहीं हुआ हो।' आगे लिखा है, 'अगर यह सही हुआ तो यह विनाशकारी खबर होगी। हमारी संवेदना उन सभी परिवारों के साथ है, जिन्होंने इस दर्दनाक त्रासदी में अपनों को गंवाया होगा। हम फिर से क्षेत्र के देशों से अपील करते हैं कि जिंदगी बचाने के लिए मदद करें। यही प्राथमिकता होनी चाहिए। '

'इस डूबती हुई बोट से हमें बचाने वाला कोई नहीं है'
पिछले हफ्ते बांग्लादेश के रोहिंग्या शरणार्थी कैंप में रहने वाले नूर हाबी ने कहा था कि उसकी 23 साल की बेटी मुनुवारा बेगम नाव पर सवार थी और उसने अपनी बहन से वॉकी-टॉकी पर बात की थी। उस बातचीत के ऑडियो क्लिप के मुताबिक बेगम ने कहा था, 'हम पर खतरा है। मेहरबानी करके हमें बचाओ।' उसने कहा था, 'हमारे पास खाना और पानी नहीं है और इस डूबती हुई बोट से हमें बचाने वाला कोई नहीं है।' पुलिस के मुताबिक रविवार को ही एक और बोट, जिसका इंजन टूट गया था, वह किसी तरह से 57 रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर इंडोनेशिया के पश्चिमी तट पर पहुंचा। यह नाव करीब एक महीने से समुद्र में थी और हाल के महीने में ऐसी तीसरी घटना है।

2015 वाले हालात पैदा ना होने दें- IOM
पिछले हफ्ते ही कथित तौर पर 104 रोहिंग्या शरणार्थियों को बंगाल की खाड़ी की दूसरी तरफ म्यामांर से सैकड़ों किलोमीटर दूर श्रीलंका की बोट से बचाया गया था। इस क्षेत्र के देशों से इसी महीने इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) ने गुजारिश की थी कि '2015 जैसे संकट से बचने के लिए तत्काल और सामूहिक रूप से काम करें, क्योंकि तब हजारों पुरुषों, महिलाओं और बच्चों ने जीवन बचाने के लिए बहुत ही मुश्किल चुनौतियों को झेला था, जिसके चलते समुद्र में जीवन की हानि भी झेलनी पड़ी थी। '

सभी संबंधित सरकारों से सहयोग की अपील
IOM ने संबंधिति सरकारों और बाकी सहयोगियों से ऐसे संकट के समय में साथ आने का आह्वान किया है। उसकी ओर से कहा गया है, 'क्षेत्रीय स्तर पर इस चुनौती से निपटने के लिए विभिन्न सरकारें और साझीदार पहले भी एक साथ आ चुके हैं, तस्करों के हाथों, अधर में लटके शरणार्थियों के जीवन और सुरक्षा के लिए, हम एक बार फिर से तत्काल क्षेत्रीय कार्रवाई का आह्वान करते हैं।' रोहिंग्या शरणार्थियों का मुद्दा भारत के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण रहा है और यह यहां की राजनीति के लिए भी एक अहम मुद्दा बन चुका है। (तस्वीरें- फाइल)












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