ईरान पर बहुत बड़े हमले की तैयारी में अमेरिका? सऊदी अरब, इजरायल, इजिप्ट ने भी भेजे फाइटर जेट्स
अमेरिका ने कहा है कि, वो ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। दूसरी तरफ अमेरिका के बी-1बी के साथ इजरायल, इजिप्ट, बहरीन और सऊदी अरब ने भी फाइटर जेट्स ईरान के खिलाफ भेज दिए हैं।
वॉशिंगटन/तेहरान, नवंबर 01: खाड़ी देशों में एक बार फिर से काफी ज्यादा तनाव बढ़ गया है और अमेरिका के विदेश मंत्री ने रहा है यदि ईरान अमेरिका की बात नहीं मानता है, तो अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। इसके साथ ही अमेरिका ने अपने सबसे घातक बॉम्बर जहाज को भी ईरान की सीमा के पास भेज दिया है और ऐसी रिपोर्ट है कि, अमेरिकी बॉम्बर के साथ इजरायली फाइटर जेट भी मौजूद हैं, ऐसे में एक बार फिर से मिडिल ईस्ट में लड़ाई होने की आशंका जताई जा रही है।

ईरान पर हमला करेगा अमेरिका?
अमेरिकी वायु सेना ने रविवार को बयान जारी करते हुए कहा है कि, ईरान के साथ जारी तनाव के बीच उसने अपने घातक बमवर्षक विमान बी-1बी को ईरान के पास भेज दिया है। अमेरिकी बमवर्षक विमान के साथ कई इजरायली फाइटर जेट भी साथ थे। अमेरिकी बी-1बी लांसर बमवर्षक ने शनिवार को फारस की खाड़ी के संकरे मुहाने होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर से उड़ान भरी थी, जिसके जरिए सभी प्रमुख क्षेत्रों के लिए तेल का व्यापार होता है। इसके साथ ही अमेरिकी और इजरायली फाइटर जेट्स और बमवर्षक विमानों ने लाल सागर, लाल सागर की संकरी बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य और मिस्र की स्वेज नहर के ऊपर भी उड़ान भरी है। इसे एक तरह से ईरान के लिए बड़ी धमकी माना जा रहा है, जबकि अमेरिकी विदेश मंत्री ने साफ तौर पर ईरान को एक महीने का वक्त दिया है और कहा है कि, अगर एक महीने में ईरान बातचीत के टेबल पर नहीं आता है, तो फिर अमेरिका उसके ऊपर सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।

एक महीने का अल्टीमेटम!
रविवार को अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा है कि, यदि ईरानी नेता अगले महीने वार्ता की मेज पर वापस नहीं आते हैं, और अपने परमाणु हथियार विकसित करने के प्रोग्राम को नहीं रोकते हैं, तो फिर अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने सीबीएस फेस द नेशन होस्ट मार्गरेट से बात करते हुए कहा कि, ''ईरानियों ने अब कहा है कि वे नवंबर के अंत में बातचीत के लिए वापस आ रहे हैं, हम देखेंगे कि क्या वे वास्तव में बातचीत करने के लिए आ रहे हैं या नहीं? यह महत्वपूर्ण होने जा रहा है''। अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि, ''कूटनीति आगे का पसंदीदा रास्ता है और अमेरिकी प्रशासन 'अन्य विकल्प' भी तलाश रहा है।'' जब एंकर ने ब्लिंकन से पूछा कि, क्या अन्य विकल्पों में मिलिट्री एक्शन भी शामिल है, तो अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि, 'सारे विकल्प टेबल पर हैं'।
सऊदी अरब, इजिप्ट ने भी भेजा फाइटर जेट
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी बम वर्षक विमानों के साथ इजरायली फाइटर जेट्स तो मौजूद थे ही, इसके अलावा ईरान के खिलाफ सऊदी अरब, मिस्र, बहरीन ने भी अपने लड़ाकू विमानों को भेजा है। हालांकि, ईरानी मीडिया ने अभी तक इस बात को स्वीकार नहीं किया है, जबकि न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में ईरान के मिशन ने इस बाबत टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। आपको बता दें कि, इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल में भी अमेरिका ने फ्लाईओवर परमाणु बम से लैश बी-52 बमवर्षक विमानों को ईरान के खिलाफ भेजा था और ईरान पर हमला करने की धमकी दी थी। 2018 में ट्रम्प ने ईरान के 2015 के परमाणु समझौते से एकतरफा रूप से अमेरिका को वापस ले लिया था और डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊपर प्रतिबंध भी लगा दिए थे, जो अभी भी जारी हैं।

ईरान-अमेरिका बढ़ता तनाव
ईरान बार बार जोर देकर कह रहा है कि, उसका मिसाइल कार्यक्रम परमाणु बम बनाने को लेकर नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण कार्यक्रम के तहत है, जबकि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों, पश्चिमी निरीक्षकों और अन्य लोगों का कहना है कि तेहरान के पास 2003 के अंत तक एक संरचित सैन्य परमाणु हथियार कार्यक्रम था। वहीं, कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि, ईरान अगले एक या दो साल में परमाणु बम बनाने में कामयाब हो जाएगा, जिसको लेकर इजरायल काफी आक्रामक है। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा है कि, ईरान के साथ परमाणु समझौते में फिर से प्रवेश करने के इच्छुक हैं।
''बहुत आगे बढ़ रहा है ईरान''
अमेरिका के विदेश मंत्री ने कहा कि, 'ईरान काफी सीख रहा है, काफी कर रहा है, और अब यह एक समस्या बनने लगा है।' बताया जा रहा है कि, अमेरिकी एयरफोर्स के बमवर्षक विमान और सहयोगी देशों के लड़ाकू जेट ने मध्य पूर्व में प्रमुख जलमार्गों पर उड़ान भरी, जहां अमेरिकी और ईरानी नौसैनिक जहाजों का सामना हुआ है। शनिवार को एक बयान में, यूएस सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने घोषणा की, कि बी-1बी लांसर खाड़ी, बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य, स्वेज नहर और ओमान की खाड़ी के ऊपर से गुजरा है। सेंटकॉम ने कहा कि, ''इसका मकसद साफ तौर पर ईरान को साफ संदेश देना था''
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