अमेरिकी संसद में भारत को लेकर बेहद अहम बिल पेश, PM मोदी के 'ड्रीम प्रोजेक्ट' में मदद देने की मांग

क्लीन एनर्जी के दिशा में भारत का लक्ष्य साल 2060 तक देश को कोयला से मुक्त करना है और इस दिशा में काम करने के लिए भारत को टेक्नोलॉजी की जरूरत है।

वॉशिंगटन, 17: अमेरिका के दो प्रभावशाली सांसदों ने अमेरिकी संसद में भारत को मदद देने के लिए काफी अहम बिल पेश किया है और अगर अमेरिकी संसद में ये बिल पास हो जाता है, तो भविष्य में भारत को इससे काफी ज्यादा फायदा होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, दो प्रभावशाली अमेरिकी सांसदों ने स्वच्छ ऊर्जा में भारत के ट्रांजिशन फेज का समर्थन करने के लिए संसाधन प्रदान करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस में एक विधेयक पेश किया है।

कांग्रेस में पेश बिल में क्या है?

कांग्रेस में पेश बिल में क्या है?

अमेरिकी सांसद स्कॉट पीटर्स और अमी बेरा ने संसद में इस अहम बिल को पेश किया है, जिसमें भारत के साथ क्लीन एनर्जी और जलवायु सहयोग के क्षेत्र में प्राथमिकता अधिनियम, क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी पर सहयोग के लिए प्राथमिक मंच के रूप में काम करने के लिए यूएस-भारत जलवायु और स्वच्छ ऊर्जा एजेंडा 2030 साझेदारी स्थापित करने का प्रस्ताव करता है। आपको बता दें कि, सांसद अमी बेरा एशिया, प्रशांत, मध्य एशिया के लिए हाउस फॉरेन अफेयर्स उपसमिति के अध्यक्ष हैं। यह विधेयक क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में रिसर्च और इनोवेशन में अमेरिका-भारत भागीदारी को बढ़ावा देने, भारत में ग्रिड सुधार और ऊर्जा दक्षता के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करने और भारत में नए अक्षय ऊर्जा स्रोतों के निर्माण के लिए प्रोत्साहन प्रदान करने का प्रयास करता है।

भारत सरकार को सहयोग देने की मांग

भारत सरकार को सहयोग देने की मांग

अमेरिकी कांग्रेस में प्रस्तावित बिल में कहा गया है कि, इन बातों के अलावा भारत में जलवायु परिवर्तन जोखिम में कमी लाने और लचीलापन रणनीतियों को एकीकृत करने के लिए भारत सरकार के साथ सहयोग करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय विकास के लिए अमेरिकी एजेंसी की आवश्यकता है। सांसद पीटर्स ने कहा कि, 'अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बिना, हमारे पास जलवायु परिवर्तन से लड़ने का मौका नहीं है'। उन्होंने कहा कि, भारत में मौजूदा चुनौतियां इस बात पर प्रकाश डालती हैं कि जलवायु परिवर्तन को कम करने के लिए रिसर्च और क्लीन टेक्नोलॉजी को ध्यान में रखकर कैसे भारत जैसे भागीदारों के साथ अपने संबंधों को गहरा कर सकता है। सतत ऊर्जा के लिए एक वैश्विक ट्रांजिशन फेज, और स्वच्छ ऊर्जा क्रांति में एक नेता के रूप में अमेरिका को मजबूत करना इसका लक्ष्य है।

भारतीय मूल के हैं अमी बेरा

भारतीय मूल के हैं अमी बेरा

इंडियन अमेरिकी कांग्रेसी अमी बेरा ने कहा कि, 'दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में, संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के पास हमारी स्वच्छ ऊर्जा साझेदारी को मजबूत करने और संयुक्त रूप से जलवायु परिवर्तन के साझा खतरे का मुकाबला करने का अवसर है'। उन्होंने कहा कि, 'यह कानून क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी पर द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने और विद्युत ग्रिड तक भारतीय नागरिकों की पहुंच बढ़ाने के मौजूदा प्रयासों को बढ़ाने के लिए यूएस-भारत जलवायु और स्वच्छ ऊर्जा साझेदारी स्थापित करेगा। मुझे भारत के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने के लिए अपने अच्छे दोस्त प्रतिनिधि पीटर्स के साथ काम करने पर गर्व है'।

क्लीन एनर्जी के लिए भारत का लक्ष्य

क्लीन एनर्जी के लिए भारत का लक्ष्य

आपको बता दें कि, क्लीन एनर्जी के दिशा में भारत का लक्ष्य साल 2060 तक देश को कोयला से मुक्त करना है और इस दिशा में काम करने के लिए भारत को टेक्नोलॉजी की जरूरत है। पिछले साल अक्टूबर महीने में पीएम मोदी ने एक कार्यक्रम के दौरान इस बात पर जोर देते हुए कहा था, कि, भारत क्लीन एनर्जी की दिशा में काम कर रहा है। आने वाले कुछ वर्षों में एनर्जी खपत में भारत में दोगुनी हो जाएगी। ऐसे में एनर्जी में निवेश के लिए दुनिया में भारत सबसे बेहतर विकल्प बनकर उभरा है। पीएम ने कहा था कि, उर्जा सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। ऐसे में भारत हमेशा वैश्विक लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए काम करेगा। हम वैश्विक समुदाय के साथ की गई प्रतिबद्धता के साथ चलेंगे। हमने 2022 तक अक्षय ऊर्जा स्थापित क्षमता को 175 गीगावॉट बढ़ाने का लक्ष्य रखा था, जिसे हमने अब 2030 तक 450 गीगावॉट तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।

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