Bangladesh Violence: हादी की मौत के बाद भारतीय मिशन को बनाया गया निशाना, मौत के मुंह से निकाले गए 25 पत्रकार
Bangladesh Violence: पड़ोसी देश बांग्लादेश एक बार फिर अशांति और अराजकता की गहरी खाई में गिरता नजर आ रहा है। पिछले कुछ महीनों से जारी राजनीतिक अस्थिरता के बीच, शुक्रवार की सुबह एक ऐसी खबर आई जिसने पूरे देश में बारूद की तरह काम किया। शेख हसीना के खिलाफ प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाने वाले उस्मान हादी की मौत ने न केवल उनके समर्थकों को सड़कों पर ला दिया है, बल्कि राजधानी ढाका से लेकर बंदरगाह शहर चटगांव तक हिंसा का एक ऐसा तांडव शुरू कर दिया है, जिसे संभालना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
यह केवल एक छात्र नेता की मौत का शोक नहीं है, बल्कि यह उन दबे हुए आक्रोश का विस्फोट है जो पिछले सप्ताह उस पर हुए जानलेवा हमले के बाद से ही सुलग रहा था। नकाबपोश हमलावरों द्वारा मारी गई गोलियों ने न केवल हादी के शरीर को छलनी किया, बल्कि बांग्लादेश की कानून व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। आज जब उसकी मृत्यु की आधिकारिक पुष्टि हुई, तो प्रदर्शनकारियों का गुस्सा सिर्फ सरकार तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक परिसरों को भी अपने निशाने पर ले लिया।

अखबारों के दफ्तर में लगाई आग
बांग्लादेश के प्रमुख आंदोलनकारी शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद ढाका में हिंसक प्रदर्शन भड़क उठा है। प्रदर्शनकारियों ने प्रमुख अखबारों के दफ्तरों पर हमला किया और आग लगा दी है। अवामी लीग और भारत के खिलाफ नारे लगाए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने प्रथम आलो (देश के सबसे बड़े बांग्ला अखबार) और डेली स्टार के दफ्तरों में आग लगा दी है। कई पत्रकारों के अंदर फंसे होने की आशंका है। इनकी संख्या 25 से ज्यादा बताई जा रही है।
ढाका की सड़कों पर जलती गाड़ियां, आसमान में उठता काला धुआं और चटगांव में भारतीय सहायक उच्चायोग के आवास पर हुआ हमला-ये तस्वीरें बयां कर रही हैं कि हालात काबू से बाहर हो चुके हैं। जहां एक तरफ सेना को दंगाइयों को रोकने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा है, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बात को लेकर चिंता में है है कि क्या बांग्लादेश एक और बड़े गृहयुद्ध की ओर बढ़ रहा है।
सिंगापुर में इलाज के दौरान हुई हादी की मौत
हिंसा की शुरुआत छात्र नेता उस्मान हादी की मौत के बाद हुई। पिछले सप्ताह ढाका में अज्ञात हमलावरों ने हादी को गोली मार दी थी। बेहतर इलाज के लिए उसे सिंगापुर ले जाया गया था, लेकिन शुक्रवार सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। जैसे ही यह खबर बांग्लादेश पहुँची, छात्र और समर्थक सड़कों पर उतर आए।
भारतीय सहायक उच्चायोग के आवास पर पथराव
हिंसा की लपटें चटगांव तक पहुंच गई हैं। देर रात उपद्रवियों की एक भीड़ ने चटगांव स्थित भारत के सहायक उच्चायोग (Indian Assistant High Commission) के आवास को निशाना बनाया।
स्थानीय पुलिस के अनुसार भीड़ ने आवास पर पथराव किया, जिससे परिसर को नुकसान पहुंचा है। इस घटना के बाद भारतीय अधिकारियों और वहां रहने वाले परिवारों में भारी दहशत का माहौल है। भारतीय विदेश मंत्रालय इस घटनाक्रम पर कड़ी नजर रख रहा है।
पुलिस की कार्रवाई और मौजूदा हालात
ढाका और चटगांव के प्रमुख चौराहों को छावनी में बदल दिया गया है।
आंसू गैस के गोले: प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने कई दौर की आंसू गैस छोड़ी।
गिरफ्तारी: पुलिस सूत्रों के अनुसार, हिंसा और आगजनी के आरोप में कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।
सेना का मार्च: संवेदनशील इलाकों में सेना और अर्धसैनिक बल गश्त कर रहे हैं ताकि हिंसा को और फैलने से रोका जा सके।
क्यों सुलग रहा है बांग्लादेश?
जानकारों का मानना है कि छात्र नेता की हत्या ने दबे हुए राजनीतिक असंतोष को फिर से हवा दे दी है। चटगांव में पहले से ही सांप्रदायिक और राजनीतिक तनाव बना हुआ था, जो इस घटना के बाद बेकाबू हो गया। मीडिया संस्थानों पर हमले को अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रहार के रूप में देखा जा रहा है।
बांग्लादेश सरकार ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है, लेकिन छात्र संगठनों ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। इंटरनेट सेवाओं पर भी निगरानी रखी जा रही है ताकि अफवाहों को फैलने से रोका जा सके।












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