बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना 4 दिवसीय यात्रा पर भारत पहुंचीं, पीएम मोदी के साथ अहम मुद्दों पर होगी चर्चा

सूत्रों का कहना है कि हसीना भारत से खाद्य आपूर्ति, नेपाल और भूटान माल भेजने की अनुमति की मांग कर सकती हैं। मेहमान पीएम के अजमेर की यात्रा पर जाने की संभावना है।

नई दिल्ली/ढाका, 5 सितंबर : बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना द्विपक्षीय रिश्ते को मजबूती देने के इरादे से चार दिवसीय दौरे पर सोमवार को भारत पहुंचीं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य रक्षा सहयोग को और भी ज्यादा विकसित करना, क्षेत्रीय संपर्क पहल का विस्तार करना और दक्षिण एशिया में स्थिरता स्थापित करना है। अपनी यात्रा के दौरान बांग्लादेश की पीएम हसीना राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से मुलाकात करेंगी। इसके साथ ही वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेंगी। बता दें कि, 2021 में दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के 50वें वर्ष पूरे होने के बाद यह उनकी पहली यात्रा है।

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    PM Sheikh Hasina की PM Narendra Modi से इन मुद्दों पर होगी बात, | वनइंडिया हिंदी |*News
    शेख हसीना भारत पहुंचीं

    शेख हसीना भारत पहुंचीं

    पिछले साल बांग्लादेश की स्वतंत्रता की 50 वीं वर्षगांठ और राष्ट्र के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान की 100 वीं जयंती भी मनाई गई थी। पीएम मोदी ने 2021 में बांग्लादेश का दौरा किया था। मैत्री दिवस समारोह दिल्ली और ढाका सहित दुनिया भर की 20 राजधानियों में आयोजित किया गया था। 2015 से अब तक दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की 12 बार मुलाकात हो चुकी है।

    पीएम मोदी से मुलाकात महत्वपूर्ण

    पीएम मोदी से मुलाकात महत्वपूर्ण

    दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच वार्ता के दौरान लंबित और नियमित द्विपक्षीय मुद्दों के अलावा दक्षिण एशिया में रक्षा सहयोग और स्थिरता के मुद्दे पर सबसे अधिक जोर रहेगा। सूत्रों का कहना है कि हसीना भारत से खाद्य आपूर्ति, नेपाल और भूटान माल भेजने की अनुमति की मांग कर सकती हैं। मेहमान पीएम के अजमेर की यात्रा पर जाने की संभावना है।

    भारत-बांग्लादेश के रिश्ते

    भारत-बांग्लादेश के रिश्ते

    भारत और बांग्लादेश ने पिछले कुछ वर्षों में कई कनेक्टिविटी पहलों को फिर से शुरू करने के अलावा क्षेत्रीय सहयोग के लिए एक मॉडल बनाने की दिशा पर जोर दिया है। अगर ऐसा रहा तो आने वाले दिनों में अखौरा-अगरतला रेल लिंक जल्द ही फिर से खुल जाएगा और यह भी अनुमान है कि अगरतला और चटगांव के बीच कुछ हफ्तों के बीच हवाई मार्ग सेवा भी शुरू किया जाएगा।

    कई समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे

    कई समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे

    उम्मीद है कि, बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना अपने भारत दौरे के क्रम में कुशियारा नदी के पानी के अंतरिम बंटवारे पर एक समझौते पर हस्ताक्षर करेंगी। पीएम हसीना इस दौरान मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह और राजस्थान में स्थित अजमेर का भी दौरा कर सकती हैं। बता दें कि, समझौता ज्ञापन (एमओयू) को 25 अगस्त को दिल्ली में आयोजित भारत-बांग्लादेश संयुक्त नदी आयोग (जेआरसी) की 38वीं मंत्रिस्तरीय बैठक में अंतिम रूप दिया गया था। साझा नदियों पर आपसी हित के लिए, आयोग का गठन 1972 में मुद्दों के समाधान के लिए एक द्विपक्षीय तंत्र के रूप में किया गया था।

    इन विषयों पर रहेगी नजर

    इन विषयों पर रहेगी नजर

    बांग्लादेश भारत का पड़ोसी राष्ट्र है, इसके मद्देनजर भारत की पड़ोसी पहले नीति के तहत ढाका नई दिल्ली का महत्वपूर्ण भागीदार है। रक्षा सहयोग, व्यापार और वाणिज्य, बिजली और ऊर्जा, परिवहन और कनेक्टिविटी , विज्ञान और प्रौद्योगिकी, रक्षा, नदियों और समुद्री मामलों सहित सभी क्षेत्रों में फैला हुआ है। बांग्लादेश और भारत दोनों देशों के बीच संस्कृति, आर्थिक नीति, इतिहास, भाषा, धर्म में काफी समानताएं हैं। भारत ने बाग्लादेश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश ने हाल में विकास के मामले में लंबी छलांग लगाई है।

    एशिया में राजनीतिक और आर्थिक संकट के माहौल में दौरा

    एशिया में राजनीतिक और आर्थिक संकट के माहौल में दौरा

    बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना का यह दौरा दक्षिण एशिया क्षेत्र में राजनीतिक और आर्थिक संकट को पटरी पर लाने की कोशिशों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बांग्लादेश ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर करने के लिए कर्ज के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का दरवाजा खटखटाया है। बांग्लादेश चाहता है कि भारत-बांग्लादेश व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) के लिए बातचीत की पहल शुरू हो।

    जल संसाधनों को लेकर विवाद

    जल संसाधनों को लेकर विवाद

    भारत और बांग्लादेश 54 नदियों को साझा करते हैं। इन नदियों में गंगा, तीस्ता, मनु, मुहुरी, खोवई, गोमती, धारला, दुधकुमार और कुशियारा प्रमुख हैं। दोनों देशों के बीच जल प्रबंधन और जल संसाधनों को साझा करने को लेकर पिछले 35 सालों विवाद बना हुआ है। कई द्विपक्षीय समझौतों और कई दौर की वार्ता के बाद भी ठोस नतीजा नहीं निकल सका है। दोनों देशों ने सात नदियों की पहचान जल साझा करने के लिए है।

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