बांग्लादेश में प्राचीन काली मंदिर पर कट्टरपंथियों का हमला, मूर्ति तोड़कर आधा किलोमीटर दूर फेंका
बांग्लादेश में पिछले साल भी दुर्गा पूजा के दौरान मंदिरों पर हमले किए गये थे, जिसके बाद शेख हसीना सरकार पर गंभीर सवाल उठे थे और इस बार भी दुर्गा पूजा खत्म होने के बाद दशहरे के ठीक अगले दिन मंदिर पर हमला किया गया है।
Bangladesh Temple Attack: बांग्लादेश और पाकिस्तान के कट्टरपंथी लगातार हिन्दुओं को टारगेट बना रहे हैं और पिछले साल की ही तरह इस बार भी हिन्दुओं के मंदिर को निशाना बनाया गया है। बांग्लादेश की स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक अतिप्राचीन हिन्दू मंदिर को कट्टरपंथियों ने निशाना बनाया है और मंदिर के अंदर मौजूद प्रतिमा पर हमला किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अज्ञात कट्टरपंथियों ने जेनैदाह में एक हिन्दू मंदिर के अंदर तोड़फोड़ की है, जिसके बाद अब पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
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काली माता मंदिर में तोड़फोड़
बांग्लादेश के न्यूज पोर्टल bdnews24.com ने मंदिर समिति के अध्यक्ष सुकुमार कुंडा के हवाले से बताया है कि, दौतिया गांव में काली मंदिर में घुसकर अज्ञात कट्टरपंथियों ने प्रतिमा को नुकसान पहुंचाया है और मूर्ति को कई हिस्सों में तोड़ दिया है। मंदिर के अधिकारियों के मुताबिक, ये मंदिर अति प्राचीन है और औपनिवेशिक काल से ही मंदिर के अंदर पूजा-अर्चना की जा रही थी। ये मंदिर बांग्लादेश के झेनाइदाह जिले के दौतिया गांव में स्थिति है, जहां कट्टरपंथियों ने हमला किया है। जिले के सहायक पुलिस अधीक्षक अमित कुमार बर्मन के अनुसार, गुरुवार को मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है। मंदिर समिति के अध्यक्ष सुकुमार कुंडा ने कहा कि, बदमाश ने रात का फायदा उठाकर मंदिर पर हमला किया है और मूर्ति को नुकसान पहुंचाया है। आरोपी ने मंदिर के अंदर घुसकर तोड़फोड़ की है। bdnews24.com के अनुसार, मूर्ति के सिर का हिस्सा मंदिर से आधा किलोमीटर दूर सड़क पर पड़ा मिला है।

दुर्गा पूजा खत्म होते ही उपद्रव
बांग्लादेश में पिछले साल भी दुर्गा पूजा के दौरान मंदिरों पर हमले किए गये थे, जिसके बाद शेख हसीना सरकार पर गंभीर सवाल उठे थे और इस बार भी दुर्गा पूजा खत्म होने के बाद दशहरे के ठीक अगले दिन मंदिर पर हमला किया गया है। बांग्लादेश में किसी मंदिर में तोड़फोड़ की यह पहली घटना नहीं है। इस साल 17 मार्च को ढाका में इस्कॉन राधाकांत जीव मंदिर में तोड़फोड़ की गई थी और मूर्तियों को फेंक दिया गया था। वहीं, कट्टरपंथियों ने कई श्रद्धालुओं के साथ मारपीट भी की गई थी। इस्कॉन मंदिर के जनसंपर्क अधिकारी अमानी कृष्ण दास ने एएनआई को बताया कि, "हाजी शफीउल्लाह के नेतृत्व में 200 से ज्यादा कट्टरपंथियों ने इस्कॉन राधाकांता मंदिर पर हमला किया था और मंदिर में तोड़फोड़ की थी। वहीं,वारी में लाल मोहन साहा स्ट्रीट को लूट लिया।" इससे पहले 16 अक्टूबर 2021 को भी बांग्लादेश के नोआखली शहर में एक मंदिर में तोड़फोड़ की गई थी और एक भक्त को भीड़ ने मार डाला था।

मंदिरों पर लगातार होते हमले
बांग्लादेश और पाकिस्तान में लगातार कट्टरपंथियों की भीड़ मंदिरों को निशाना बनाती रहती है और बांग्लादेश में इससे पहले अगस्त महीने में मोंगला उपजिला में केनमारी मंदिर में हिंदू देवताओं की मूर्तियों को कथित रूप से नुकसान पहुंचाने के आरोप में छह अगस्त को मदरसा के तीन छात्रों को अधिकारियों ने हिरासत में लिया था। यह घटना तब हुई थी, जब मदरसे के कई मुस्लिम युवाओं से मंदिर प्रबंधन ने मंदिर के बगल के मैदान पर फुटबॉल खेलना बंद करने का अनुरोध किया। वहीं, इससे पहले 16 जुलाई को भी मुस्लिमों की भीड़ ने नरेल के लोहागरा के सहपारा क्षेत्र में एक मंदिर को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया था। (सभी तस्वीर फाइल)












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