पाकिस्तान से आने वाले सामानों की जांच नहीं, दिल्ली से दूत को बुलाया.. क्या बांग्लादेश भारत को उकसा रहा है?
India-Bangladesh Ties: भारत और बांग्लादेश के बीच पहले से ही खराब चल रहे संबंधों को और बिगाड़ते हुए ढाका ने नई दिल्ली से अपने राजदूत को वापस बुला लिया है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार एक बड़ा कूटनीतिक फेरबदल कर रही है और उसने ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम और पुर्तगाल से चार अन्य राजदूतों को भी वापस बुला लिया है।
इसके साथ ही, जिस देश में एक बड़ा नागरिक विद्रोह हालिया समय में हुआ है, और जिसके कारण प्रधानमंत्री शेख हसीना को पद से हटा दिया गया, वह पाकिस्तान के साथ मजबूत संबंध बना रहा है। बांग्लादेश नेशनल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (NBR) ने व्यापार करने में आसानी का हवाला देते हुए, पाकिस्तान से आयातित वस्तुओं की जांच की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है।

शेख हसीना की सरकार के दौरान पाकिस्तान से खरीदे जाने वाली हर वस्तुओं की जांच को अनिवार्य रखा था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
पाकिस्तान इस लाभ के लिए चुना गया एकमात्र देश है, जिससे यह चिंता बढ़ गई है, अब पाकिस्तान काफी आसानी से बांग्लादेश में हथियारों की तस्करी कर सकता है, जिसका मकसद भारत में अशांति फैलाना होगा, क्योंकि पाकिस्तान और बांग्लादेश का अतीत भी एक जैसा है। 1947 में स्वतंत्रता के बाद, बांग्लादेश पाकिस्तान का हिस्सा बन गया और इसे पूर्वी पाकिस्तान के नाम से जाना गया। 1971 में इसे पाकिस्तान से स्वतंत्रता मिली।
बांग्लादेश की 70 वर्षीय चार बार निर्वाचित प्रधानमंत्री शेख हसीना को एक महीने तक चले हिंसक छात्र विरोध प्रदर्शन के बाद 5 अगस्त को देश छोड़कर भागना पड़ा था।

मोहम्मद यूनुस का डबल गेम
बांग्लादेश की सेना ने नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार के गठन की घोषणा की और शेख हसीना की सरकार का पतन, उन देशों की लंबी सूची में एक और दोस्त का नुकसान था, जिनके साथ भारत के रिश्ते अस्थिर हैं।
शेख हसीना भारत के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक रही हैं, जो भारत विरोधी भावनाओं से भरे पड़ोस में हैं। दक्षिण एशिया में "बड़ी शक्ति" के रूप में पहचाने जाने वाले भारत की स्थिति चीन के बढ़ते प्रभाव से प्रभावित हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शेख हसीना ने 2023 में रिकॉर्ड 10 बार मुलाकात की थी और दोनों देशों के संबंध काफी मजबूत हो गये थे।
हालांकि, मोहम्मद यूनुस ने सार्वजनिक रूप से भारत के साथ संबंधों को बेहतर बनाने की इच्छा जताई है, लेकिन वह चाहते हैं कि भारत, शेख हसीना को मुकदमों का सामना करने के लिए प्रत्यर्पित करे। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री सितंबर में बांग्लादेश की सेना के सी-130 विमान के हिंडन एयर बेस पर उतरने के बाद से भारत में हैं। भारत, शेख हसीना को बांग्लादेश को सौंपेगा, ये नामुमकिन है।
यूनुस ने कहा कि जब तक ढाका जब तक शेख हसीना के प्रत्यर्पण की बात शुरू नहीं करता, शेख हसीना को चुप बैठना चाहिए।

सार्वजनिक टिप्पणियों के बावजूद, प्रधानमंत्री मोदी और यूनुस ने अभी तक द्विपक्षीय बैठक नहीं की है। मोदी की हाल की अमेरिका यात्रा के दौरान एक द्विपक्षीय बैठक आयोजित करने की कोशिश की गई है, लेकिन ऐसी रिपोर्ट है, कि भारत ने मुलाकात से इनकार कर दिया। प्रधानमंत्री मोदी, मोहम्मद यूनुस के पहुंचने से पहले ही अमेरिका से लौट आए।
हालांकि, भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 23 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अपने बांग्लादेशी समकक्ष मोहम्मद तौहीद हुसैन से जरूर मुलाकात की।
इसलिए, भारत में बांग्लादेशी दूत को वापस बुलाना संबंधों के लिए एक और झटका है। बांग्लादेश ने मिशन नेताओं को ढाका वापस बुलाया गया है, जिनमें भारत में उच्चायुक्त मुस्तफिजुर रहमान; संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि मुहम्मद अब्दुल मुहिथ; ऑस्ट्रेलिया में उच्चायुक्त एम अल्लामा सिद्दीकी; बेल्जियम में राजदूत महबूब हसन सालेह; और पुर्तगाल में राजदूत रेजिना अहमद शामिल हैं।
शेख हसीना के निष्कासन के बाद, भारत की पूर्व विदेश सचिव निरुपमा मेनन राव ने नई दिल्ली को स्थिति की रणनीतिक दुविधाओं के बारे में आगाह किया है।
उन्होंने एक्स पर लिखा, कि "आज, जब हम बांग्लादेश में महत्वपूर्ण घटनाओं को देख रहे हैं और जब लोगों की आवाज ने प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश से भागते हुए देखा है, तो हमें अपनी प्रतिक्रियाओं और नीतिगत कदमों को सावधानी और चपलता, स्पष्ट ध्यान और दूरदर्शिता के साथ, अपने पैरों पर खड़े होकर सोचने की क्षमता के साथ तौलना चाहिए। हम कोई भी गलत कदम उठाने का जोखिम नहीं उठा सकते। यहां रणनीतिक दुविधाएं हैं। हम जो भी करें, हमें अपने दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों की रक्षा करनी चाहिए।"
भारत के लिए बांग्लादेश अपने भौगोलिक रूप से अलग-थलग पूर्वोत्तर राज्यों को बंगाल की खाड़ी से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण है। दोनों देश बंगाल की खाड़ी में 4,000 किलोमीटर से ज्यादा भूमि सीमा और समुद्री सीमा साझा करते हैं।

पाकिस्तान के साथ संबंध बना रहा बांग्लादेश
बांग्लादेश ने पाकिस्तान से आयातित सभी वस्तुओं के अनिवार्य 100 प्रतिशत फिजिकल टेस्ट को खत्म कर दिया है। इस फैसला का मकसद सीमा शुल्क निकासी में तेजी लाना और व्यापार में सुधार करना बताया गया है। यह कदम प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पिछले महीने न्यूयॉर्क में बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार डॉ. मुहम्मद यूनिस के साथ बैठक के बाद उठाया गया है। यह बैठक संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी।
इससे पहले, पाकिस्तान से शिपमेंट 'रेड लेन' से होकर गुज़रते थे, जो एक उच्च जोखिम वाला वर्गीकरण है, जिसके लिए दस्तावेज़ी समीक्षा और भौतिक निरीक्षण दोनों की आवश्यकता होती है।
बांग्लादेश पाकिस्तान से कपास, धागा, रसायन, गेहूं, प्लास्टिक सामग्री, चमड़ा और पेट्रोलियम उत्पादों सहित कई तरह के उत्पादों का आयात करता है। अन्य आयातों में शिशु आहार, चावल और फल जैसे खाद्य पदार्थ, साथ ही सर्जिकल उपकरण और बिजली के पंखे शामिल हैं।
पाकिस्तानी मीडिया ने सूत्रों के हवाले से कहा है, कि अनिवार्य निरीक्षणों को हटाने से देरी कम होगी और संभावित रूप से लागत कम होगी। भारतीय विशेषज्ञों को डर है, कि इससे हथियार और गोला-बारूद जैसे प्रतिबंधित सामानों की आवाजाही भी आसान हो जाएगी।
वित्त वर्ष 2022-23 में, बांग्लादेश का आयात 68 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया है, जिसमें से पाकिस्तान से आयातित सामान 699 मिलियन डॉलर था। इस अवधि के दौरान पाकिस्तान को निर्यात लगभग 74 मिलियन डॉलर था। आयातित अधिकांश सामान में परिधान उद्योग के लिए कच्चा माल शामिल है।












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