Bangladesh Election 2025: बांग्लादेश में चुनावी बिगुल! हसीना सरकार पतन के बाद आज होगा नई चुनावी तारीख का ऐलान
Bangladesh Election Date 2025: शेख हसीना की सरकार के 2024 के जुलाई विद्रोह में पतन के एक साल बाद अब बांग्लादेश एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। सत्ता परिवर्तन, राजनीतिक ध्रुवीकरण और जनता के टूटे भरोसे के बीच देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया दोबारा पटरी पर लौटने की कोशिश कर रही है।
बांग्लादेश के मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन ने गुरुवार, 11 दिसंबर 2025 को घोषणा की कि देश का 13वां नेशनल असेंबली इलेक्शन 12 फरवरी 2025 को आयोजित किया जाएगा। इस ऐलान के साथ ही, मोहम्मद यूनुस सरकार के कार्यकाल विस्तार को लेकर राजनीतिक गलियारों में चल रही तमाम अटकलों पर पूर्ण विराम लग गया है। यह घोषणा सिर्फ चुनाव की तारीख नहीं होगी, बल्कि बांग्देश के भविष्य की सत्ता संरचना, दलों की भूमिका और बांग्लादेश के नए राजनीतिक मॉडल का संकेत भी देगी।

आज होगा चुनावी तारीख का ऐलान
रॉयटर्स ने वरिष्ठ चुनाव आयोग सचिव अख्तर अहमद के हवाले से बताया कि चीफ इलेक्शन कमिश्नर AMM नासिरुद्दीन आज शाम 6 बजे आधिकारिक तौर पर चुनाव की तारीख की घोषणा करेंगे। इस घोषणा के साथ ही एक राष्ट्रीय जनमत संग्रह (Referendum) की तारीख भी तय की जानी है, जो कि 'जुलाई चार्टर' के लागू करने पर आधारित होगा। यह जुलाई चार्टर शेख हसीना सरकार के पतन के बाद तैयार की गई व्यापक राज्य सुधार योजना है।
चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक मोड़
चुनावी तारीख के ऐलान से ठीक कुछ घंटे पहले ही एक अहम फैसला सामने आया, जिसने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। हालांकि आवामी लीग पर लगा प्रतिबंध अभी भी बरकरार है, लेकिन अंतरिम सरकार ने पार्टी के साफ छवि वाले नेताओं को चुनाव लड़ने की इजाजत दे दी है।
शर्त यही है कि वे आवामी लीग के सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ सकते,बल्कि निर्दलीय उम्मीदवार बने रहेंगे। यह फैसला पाकिस्तान मॉडल की याद दिलाता है, जब इमरान खान की PTI पर प्रतिबंध के बाद उम्मीदवार निर्दलीय के रूप में जीते थे। इस फैसले ने चुनावी कहानी को बेहद दिलचस्प बना दिया है क्योंकि आवामी लीग का संगठन मजबूत है, लेकिन बिना सिंबल के उसके उम्मीदवार क्या जनता का भरोसा फिर जीत पाएंगे?
जुलाई चार्टर में क्या है?
यह चार्टर देश के शासन ढांचे में बड़े सुधारों की मांग करता है कि कार्यपालिका (Executive) की शक्तियों में कटौती हो। न्यायपालिका और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को मजबूती मिले। कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के दुरुपयोग पर रोक लगे और सरकारी संस्थानों में जवाबदेही बढ़ाना है। माना जा रहा है कि नए चुनाव के साथ यह जनमत संग्रह बांग्लादेश की राजनीति में एक नया अध्याय खोलेगा।
2026 में चुनाव?-पहले ही हो चुका था संकेत
इससे पहले अगस्त 2024 में चुनाव आयोग के प्रमुख AMM नासिरुद्दीन ने कहा था कि राष्ट्रीय चुनाव फरवरी 2026 के पहले सप्ताह में कराए जाएंगे। उन्होंने यह भी माना था कि चुनाव कराना बड़ी चुनौती होगी क्योंकि जनता का चुनावी प्रक्रिया और तंत्र पर भरोसा काफी हद तक टूट चुका है। उन्होंने कहा था-"जनता का चुनाव प्रणाली, चुनाव आयोग और पूरी प्रशासनिक मशीनरी से विश्वास उठ चुका है।"
कौन-कौन उतरेगा चुनाव मैदान में?
रिपोर्ट्स के मुताबिक आने वाले चुनाव में सबसे प्रबल दावेदार कलीदा जिया की पार्टी-बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) मानी जा रही है। इसके साथ ही जमात-ए-इस्लामी, जिसे 2013 में संविधान के सेक्युलर स्वरूप से विरोधाभास के चलते चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया गया था, वह भी इस बार चुनावी मैदान में लौट सकता है। अंतरिम सरकार ने पार्टी पर लगी कई पाबंदियों में ढील दी है।
कौन नहीं लड़ेगा चुनाव?
सबसे बड़ी बात यह है कि शेख हसीना की पार्टी 'Awami League' को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है। हालांकि, हसीना के बेटे ने चेतावनी दी है कि अगर पार्टी पर लगा प्रतिबंध नहीं हटाया गया तो देशभर में बड़े पैमाने पर अशांति फैल सकती है। वर्तमान में देश का संचालन मुहम्मद यूनुस की अगुवाई कर रहे हैं। अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से बांग्लादेश का शासन नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार संभाल रही है। यह सरकार राजनीतिक सुधारों और शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण की दिशा में काम कर रही है।












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