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Bangladesh में हिंदू युवक की हत्या पर भड़के अमेरिकी सांसद, एक ट्वीट ने ढाका से वाशिंगटन तक मचाया हड़कंप

Bangladesh Dipu Chandra Das lynching: भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या किए जाने की कड़ी निंदा की है। 27 वर्षीय दीपू की हत्या छात्र नेता उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की हिंसा के दौरान मैमनसिंह में कर दी गई थी। डेमोक्रेट नेता रो खन्ना ने इस घटना को "भयानक" बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से नफरत और कट्टरता के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की है।

इस जघन्य हत्याकांड ने न केवल भारत-बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव पैदा कर दिया है, बल्कि भारत के कई बड़े शहरों में इसके खिलाफ भारी विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गए हैं।

Bangladesh Dipu Chandra Das lynching

अमेरिकी सांसद रो खन्ना का कड़ा रुख

कैलिफोर्निया से कांग्रेस सदस्य रो खन्ना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दीपू चंद्र दास की हत्या पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि एक हिंदू गारमेंट वर्कर की इस तरह हत्या किया जाना दिल दहला देने वाला है और उनकी संवेदनाएं पीड़ित परिवार के साथ हैं। खन्ना ने जोर देकर कहा कि हमें बिना किसी संकोच के ऐसी नफरत भरी वारदातों के खिलाफ बोलना चाहिए। हालांकि, उनके इस बयान पर कुछ अमेरिकी यूजर्स ने सवाल उठाए और पूछा कि कैलिफोर्निया के सांसद के लिए बांग्लादेश का मुद्दा कितना प्रासंगिक है।

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दीपू चंद्र दास की हत्या और भड़का गुस्सा

18 दिसंबर को बांग्लादेश के मैमनसिंह में एक उग्र भीड़ ने दीपू चंद्र दास को अपना निशाना बनाया था। रिपोर्टों के अनुसार, छात्र नेता उस्मान हादी की हत्या के बाद फैले तनाव के बीच दीपू की बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस घटना ने दुनिया भर के हिंदुओं और मानवाधिकार समर्थकों को झकझोर कर रख दिया है। दीपू की मौत के बाद बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे वहां की अंतरिम सरकार की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।

भारत में राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन

दीपू की हत्या के विरोध में भारत की राजधानी नई दिल्ली से लेकर कोलकाता, मुंबई, हैदराबाद और अगरतला तक सड़कों पर प्रदर्शन हुए। कई हिंदू संगठनों ने बांग्लादेशी दूतावासों और मिशनों के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और पड़ोसी देश में रह रहे अल्पसंख्यकों के लिए तत्काल सुरक्षा की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है, जो चिंता का विषय है।

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कूटनीतिक तनाव और बिगड़ते रिश्ते

इस हत्याकांड ने भारत और बांग्लादेश के बीच राजनयिक संबंधों को काफी कमजोर कर दिया है। दोनों देशों ने एक-दूसरे के दूतों को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है। भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा बांग्लादेश की जिम्मेदारी है। वहीं, बांग्लादेश में उस्मान हादी की हत्या के बाद शुरू हुई अस्थिरता ने सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक नाजुक बना दिया है। राजनयिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय शांति के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं।

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