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EXCLUSIVE: बलूचिस्‍तान की इस लड़की ने सुनाई पाकिस्‍तान के जुल्‍मों की दास्‍तां

नयी दिल्‍ली (ब्‍यूरो)। पाकिस्‍तान से आजाद होने के लिए संघर्ष कर रहा बलूचिस्‍तान बुरी हालत से गुजर रहा है। पाकिस्‍तानी सेना ने बलूचिस्‍तान की औरतों और बच्‍चों पर हैवानियत की सारी हदें पार कर दी हैं। सोशल नेटवर्किंग साइट पर अत्‍याचारों की तस्‍वीरें साफ तौर पर देखी जा सकती है। मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने बलूची नागरिकों और पाकिस्‍तानी सेना के बीच काफी समय से जारी संघर्ष की दास्‍तान बयान कर चुकी है।

Baloch girl exposes Pakistan's cruelty in occupied Balochistan

ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर सेना उनके साथ जुल्‍म करती है। किसी का सिर कलम कर दिया जाता है तो किसी को बीच चौराहे नंगा टांग दिया जाता है। वहीं पाकिस्‍तान सरकार ऐसे किसी भी आरोपों को इंकार करती रही है।

आगे की बात करने से पहले आपको बताते चलें कि बलूचिस्तान पाकिस्तान का पश्चिमी प्रांत है। ईरान तथा अफगानिस्तान के सटे हुए क्षेत्रों में बंटे हुए इस प्रांत की राजधानी क्वेटा है लेकिन आज बलूचिस्तान के लोग पाकिस्तान से आजादी की मांग कर रहे हैं।

हर साल बलूचिस्तान में 27 मार्च को काला दिन या पाकिस्तान के महान विश्वासघात की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है। इस दिन बलूचिस्तान के राजकुमार को पाकिस्तान संसद और नेताओं ने वार्ता के लिए आमंत्रित किया, उन्हें आश्वासन दिया कि उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा लेकिन पाक ने अपने सारे वायदे तोड़ दिए।

वहां की सेना वार्ता को लेकर राजी ही नहीं हुई। पाकिस्‍तान की जुल्‍म की कहानी सुनाते हुए बलूचिस्‍तान स्‍टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन (BSO) आजाद की चीफ करीमा बलूचा ने वनइंडिया से खास बातचीत की। करीमा ने बताया है कि पाकिस्तान हमारे बच्चों तक को मिसाइल से उड़ा रहा है, जब माँ अपने बच्चों के शव उनके पास लेकर जाती है तो वो कहते हैं कि तुम आतंकी हो और तुम्हारे नामो निशां मिटा देंगे। यहाँ बच्चों, बूढों, औरतों और जवानों को बिना किसी बात पे उठा लिया जाता है फिर मार दिया जाता है। करीमा बलूच से एक्‍सक्‍लूसिव बातचीत का वीडियो देखने के लिए क्लिक करें:

संघर्ष की शुरुआत

पाकिस्तान के ख़िलाफ 5वे बलूच संघर्ष की शुरुआत 2003 में स्वायत्तता की मांग करने वाले कुछ बलूच समूहों ने गुरिल्ला हमलों से की थी। यह समूह बढ़ते-बढ़ते चरमपंथी और अलगाववादी बन गए। इनके अधिकांश नेता विदेशों में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं और अब पाकिस्तान से आज़ादी मांग रहे हैं। तालिबान शुरू से ही पाकिस्तान में आतंकी हमले कर बलुचिस्तान में अपना हक जताता रहा है।

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